रांची में दूसरे दिन भी जारी रहा मनरेगा कर्मियों का महाधरना, 17 जून से आमरण अनशन की चेतावनी

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रांची में धरना देते झारखंड के मनरेगा कर्मचारी. फोटो: प्रभात खबर

Ranchi News: रांची में झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ का महाधरना दूसरे दिन भी जारी रहा. कर्मियों ने ग्रेड-पे आधारित वेतन, सेवा सुरक्षा और स्थायी समायोजन समेत विभिन्न मांगों को लेकर 17 जून से आमरण अनशन शुरू करने और 19 जून को मानव श्रृंखला बनाने की चेतावनी दी है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से मनोज सिंह की रिपोर्ट

Ranchi News: झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के आह्वान पर राजधानी रांची में चल रहा राज्य स्तरीय महाधरना दूसरे दिन भी जारी रहा. राज्य के विभिन्न जिलों, विशेषकर संताल परगना प्रमंडल से बड़ी संख्या में पहुंचे मनरेगा कर्मियों ने अपनी मांगों के समर्थन में एकजुटता का प्रदर्शन किया. आंदोलनरत कर्मियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो 17 जून से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा.

मनरेगा कर्मियों ने दिखायी एकजुटता

महाधरना स्थल पर राज्य के अलग-अलग जिलों से पहुंचे मनरेगा कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया. आंदोलन में शामिल कर्मचारियों ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है. संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि बार-बार वार्ता और सकारात्मक संकेत मिलने के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है. इससे हजारों मनरेगा कर्मियों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है.

17 जून से आमरण अनशन पर बैठने की चेतावनी

संघ की ओर से घोषणा की गई कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो बुधवार 17 जून से आंदोलन को और तेज करते हुए आमरण अनशन शुरू किया जाएगा. इसके अलावा 19 जून को राजभवन से जयपाल सिंह स्टेडियम तक मानव श्रृंखला बनाकर सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित किया जाएगा. कर्मचारियों का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के बावजूद अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

ग्रेड-पे आधारित वेतन और सेवा सुरक्षा प्रमुख मांग

महाधरना को संबोधित करते हुए संघ के नेताओं ने कहा कि मनरेगा कर्मी कई वर्षों से ग्रेड-पे आधारित वेतन व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं. इसके अलावा स्थायी समायोजन, सेवा सुरक्षा, दिवंगत कर्मियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति तथा अन्य लंबित मांगों के समाधान की भी मांग की जा रही है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में मनरेगा कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सम्मानजनक वेतन और भविष्य की सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है.

विभागीय वार्ता के बावजूद नहीं निकला समाधान

संघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि 25 मई 2026 को विभागीय स्तर पर हुई वार्ता में कई मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई थी. उस समय कर्मचारियों को उम्मीद जगी थी कि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द निकलेगा, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलनरत कर्मियों पर प्रशासनिक दबाव और कार्रवाई की स्थिति बनने से कर्मचारियों में निराशा और बढ़ी है.

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मांगों के समाधान तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान

मनरेगा कर्मचारी संघ ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी लंबित मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि राज्य के हजारों मनरेगा कर्मी अपने अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर रहे हैं और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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