सोन नदी पार करने के दौरान डूबे किसान का 20 घंटे बाद भी नहीं मिला शव, तलाश में जुटे गोताखोर
सोन नदी तट पर प्रशासन के लोग नदी में शव खोजते गोताखोर. फोटो: प्रभात खबर
Palamu News: पलामू के हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के दंगवार गांव में सोन नदी पार करने के दौरान 62 वर्षीय किसान बिगन चौधरी डूब गए. घटना के 20 घंटे बाद भी उनका शव बरामद नहीं हो सका है. प्रशासन, गोताखोर और ग्रामीण लगातार नदी में खोज अभियान चला रहे हैं. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
हुसैनाबाद से नौशाद की रिपोर्ट
Palamu News: पलामू जिले के हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के दंगवार गांव में सोन नदी पार करने के दौरान एक वृद्ध किसान की डूबने से मौत हो गई. घटना शुक्रवार देर शाम की बतायी जा रही है. हादसे के करीब 20 घंटे बाद भी किसान का शव बरामद नहीं हो सका है. प्रशासन, स्थानीय गोताखोर और ग्रामीण लगातार सोन नदी में खोजबीन में जुटे हुए हैं. घटना के बाद मृतक के परिवार में मातम का माहौल है, जबकि पूरे गांव में शोक व्याप्त है.
रोजाना सोन नदी पार करते थे बिगन चौधरी
मृतक की पहचान दंगवार गांव निवासी 62 वर्षीय बिगन चौधरी के रूप में की गई है. ग्रामीणों के अनुसार वह लंबे समय से खेती-किसानी से जुड़े हुए थे और रोजाना सोन नदी के उस पार स्थित डीला क्षेत्र में खेती का काम करने जाया करते थे. शुक्रवार की शाम भी वह खेतों में काम खत्म करने के बाद घर लौट रहे थे. इसी दौरान सोन नदी पार करते समय अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वह तेज बहाव में डूब गए. आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी.
सूचना मिलते ही ग्रामीणों ने शुरू की खोजबीन
घटना की जानकारी मिलते ही गांव के लोगों में हड़कंप मच गया. स्थानीय ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और नाव की मदद से नदी में शव की तलाश शुरू की. देर रात तक ग्रामीणों ने काफी प्रयास किया, लेकिन अंधेरा होने और नदी की परिस्थितियों के कारण शव का पता नहीं चल सका. शनिवार सुबह भी ग्रामीणों ने खोज अभियान जारी रखा. हालांकि कई घंटों की मशक्कत के बाद भी कोई सफलता हाथ नहीं लगी.
प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे
घटना की सूचना मिलने के बाद शनिवार सुबह अंचल पदाधिकारी पंकज कुमार, हुसैनाबाद पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी चंदन कुमार, सब इंस्पेक्टर धर्मेंद्र सिंह, दंगवार पंचायत के मुखिया अमरेंद्र ठाकुर तथा पंचायत समिति सदस्य संतोष राम घटनास्थल पर पहुंचे. प्रशासन की पहल पर स्थानीय गोताखोरों को नदी में उतारा गया और शव की तलाश शुरू कराई गई. प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और खोज अभियान की निगरानी कर रहे हैं.
सोन नदी के किनारे डटे हैं ग्रामीण
घटना के लगभग 20 घंटे बीत जाने के बाद भी बिगन चौधरी का शव बरामद नहीं हो पाया है. प्रशासन और स्थानीय ग्रामीण सोन नदी के किनारे डटे हुए हैं. गोताखोर नदी के अलग-अलग हिस्सों में तलाश कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि शव मिलने तक खोज अभियान जारी रखा जाएगा. इंसान की जिंदगी कितनी अनिश्चित है, इसका अंदाजा ऐसे हादसे ही कराते हैं. जो व्यक्ति रोज उसी रास्ते से गुजरता था, वही रास्ता एक दिन उसकी जिंदगी का आखिरी सफर बन गया.
सोन नदी के डीला क्षेत्र में खेती करते थे बिगन चौधरी
जानकारी के अनुसार बिगन चौधरी सोन नदी के पार स्थित डीला क्षेत्र में खेती किया करते थे. वहां उनकी कृषि योग्य जमीन है, जहां वह प्रतिदिन आना-जाना करते थे. गर्मी के कारण पिछले कुछ दिनों से सोन नदी का जलस्तर काफी कम हो गया था, जिसके कारण ग्रामीण आसानी से नदी पार कर लेते थे. लेकिन शुक्रवार शाम से नदी के जलस्तर में कुछ बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. बताया जा रहा है कि खेत से लौटते समय अधिक पानी होने के कारण बिगन चौधरी नदी पार करते हुए अचानक गहरे हिस्से में चले गए और डूब गए.
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परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
इस घटना के बाद मृतक के घर में मातम छा गया है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. गांव के लोग भी परिवार को ढांढस बंधाने में जुटे हुए हैं. वहीं, प्रशासन और ग्रामीणों की निगाहें अब शव की बरामदगी पर टिकी हुई हैं. उम्मीद की जा रही है कि लगातार चल रहे खोज अभियान के दौरान जल्द ही बिगन चौधरी का शव बरामद कर लिया जाएगा. इस दुखद घटना ने पूरे दंगवार गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है.
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लेखक के बारे में
By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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