Coronavirus: कोविड-19 से ठीक हुए लोगों में हृदय संबंधी समस्याओं में वृद्धि, जानें वजह और बचाव के तरीके
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 16 Mar 2022 2:39 PM
Heart Attack
Coronavirus: हार्ट फेल्योर, कार्डियक अरेस्ट या स्ट्रोक, बल्कि लगभग सभी कार्डियोवैस्कुलर डिजीज को भी रोका जा सकता है अगर उनके बारे में जल्दी पता चल जाए. और इसके लिए, अब बहुत सटीक डिजिटल रूप से एकीकृत, निवारक और पूर्वानुमानित कार्डियोवैस्कुलर स्क्रीनिंग कियोस्क उपलब्ध है. जानें.
Coronavirus: हाल ही में, हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट से होने वाली मृत्यु दर में उल्लेखनीय वृद्धी हुई है. पिछले हफ्ते मशहूर क्रिकेटर (स्पिन-किंग) शेन वार्न के निधन ने सभी को स्तब्ध कर दिया. हालांकि, कोविड संक्रमित लोगों में हार्ट फेल्योर की दर थोड़ी अधिक होती है, लेकिन निवारक जांच (प्रिवेंटिव स्क्रीनिंग) चाहे वह कोविड संक्रमित या गैर-संक्रमित हो, हृदय रोगों की महामारी के जोखिम को दूर रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है!
न केवल हार्ट फेल्योर, कार्डियक अरेस्ट या स्ट्रोक, बल्कि लगभग सभी कार्डियोवैस्कुलर डिजीज को भी रोका जा सकता है अगर उनके बारे में जल्दी पता चल जाए. और इसके लिए, अब बहुत सटीक डिजिटल रूप से एकीकृत, निवारक और पूर्वानुमानित कार्डियोवैस्कुलर स्क्रीनिंग कियोस्क उपलब्ध है, जो बीमारी की शुरुआत में ही उसका पता लगा सकते हैं, जिससे उसकी रोकथाम करना संभव हो सकता है.
इंडिया हेल्थ लिंक (आईएचएल) के संस्थापक और सीईओ, डॉ सत्येंद्र गोयल कहते हैं, “1.3 अरब भारतीय आबादी के लिए डिजिटल रूप से एकीकृत निवारक और अनुमानित फिजिटल (भौतिक + डिजिटल) पारिस्थितिकी तंत्र की अत्यधिक जरूरत को ध्यान में रखते हुए, सेल्फ सर्विस कियोस्क तैयार किया गया है. ताकि, प्राथमिक हृदय जांच की जा सके, क्योंकि अधिकांश लोग नैदानिक केंद्रों में जाने में संकोच करते हैं. यह अमेरिका में विकसित एक कियोस्क पर आधारित है, जो पहले ही 23 करोड़ 50 लाख से अधिक स्कैन पूरा कर चुका है. इसे 6 वर्षों में भारतीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, और इसे एक तृतीयक देखभाल अस्पताल प्रणाली में एक साल के व्यापक नैदानिक परीक्षण से गुजरना पड़ा, और इसमें भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) जैसे प्रीमियम अनुसंधान संगठनों की प्रौद्योगिकियां शामिल हैं. इसने डेटा गोपनीयता के लिए आईटीए2008/एचआईपीएए प्रमाण पत्र प्राप्त किया है, इसके चिकित्सा घटक यूएस एफडीए और सीई अनुमोदित हैं और भारत में क्युएआई प्रमाणन के लिए नामांकित हैं.”
हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह सामने आया है कि कोविड -19 से ठीक हुए लोगों में संक्रमण के बाद के एक साल में हृदय संबंधी समस्याओं में वृद्धि हुई है. कोविड-19 से संक्रमित लोगों में हार्ट फेल्योर का खतरा 72 प्रतिशत, हार्ट अटैक का खतरा 63 प्रतिशत, और स्ट्रोक का खतरा 52 प्रतिशत तक बढ़ गया है.
”डॉ एच के चोपड़ा, सीनियर कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट, मेदांता मूलचंद हार्ट इंस्टीट्यूट और अध्यक्ष, वर्ल्ड वेलनेस फाउंडेशन, डब्ल्यूएचए, पूर्व में राष्ट्रीय अध्यक्ष, सीएसआई और आईएई कहते हैं, “हृदय से संबंधित समस्याओं के निदान और उपचार करने के लिए, विशेष रूप से कोविड के बाद, जिन्हें सह-रूग्णता (को-मॉर्बिडिटी) है या नहीं है, कार्डियक स्क्रीनिंग जरूरी है. हर चार महीने में, हृदय और कार्डियोवैस्कुलर स्वास्थ्य का उचित मूल्यांकन कराएं और इनमें होने वाले असामान्य परिवर्तन के बारे में समय रहते जानें. नैदानिक स्पेक्ट्रम में हृदय की धड़कनें, सांस फूलना, सीने में तकलीफ, चक्कर आना, जल्दी थकान होना आदि शामिल हैं. ईसीजी, इको, पल्स और बीपी मॉनिटरिंग स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जल्दी पता लगाने और समय पर उपचार के लिए आवश्यक है. ऐसे लोग जिन्हें उच्च रक्तचाप और मधुमेह है और उनका वजन अधिक है या मोटे हैं, उनमें हृदय रोग, हार्ट फेल्योर और स्ट्रोक होने की आशंका अधिक है.“
प्राथमिक, निवारक और अनुमानित स्वास्थ्य देखभाल को जोड़ने वाला ऐसा ही एक नान-इनवेसिव (जिनमें चीरफाड़ करने की जरूरत नहीं होती) एकीकृत फिगिटल (भौतिक + डिजिटल) पारिस्थितिकी तंत्र भारत में उपलब्ध है. यह इंडिया हेल्थ लिंक (आईएचएल) द्वारा विकसित एक पुरस्कृत स्वयं सेवा, वॉक-इन एच-पॉड (फिटनेस स्टेशन/हेल्थ कियोस्क/हेल्थ एटीएम) है. यह कियोस्क है जहां लोग बीपी और ईसीजी सहित (20 से अधिक) नान-इनवेसिव चिकित्सा परीक्षण कर सकते हैं.
डॉ. गोयल आगे जानकारी देते हुए कहते हैं, “चूंकि भारत में निवारक और पूर्वानुमानित स्क्रीनिंग की पहुंच दुर्लभ है, इसलिए हम एक सावधानीपूर्वक डिजाइन किया गया एच-पॉड लेकर आए हैं जो 5 मिनट के भीतर त्वरित और सुविधाजनक स्वास्थ्य जांच प्रदान करता है. यह बिना किसी पैरामेडिक असिस्टेंस (चिकित्सक सहायक) के रक्तदाब, शरीर का तापमान, बॉडी मास कंपोजिशन, नाड़ी, एसपीओ 2 और ईसीजी जैसे प्रमुख मापदंडों सहित आवश्यक महत्वपूर्ण मापदंडों की स्क्रीनिंग (20 से अधिक) करने में सक्षम है. यह गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) का पता लगाने और उन्हें नियंत्रित रखने के लिए इस्तेमाल में आसान और किफायती समाधान है. यह एक बहुत ही कुशल फिजिटल (भौतिक + डिजिटल) स्वास्थ्य देखभाल पारिस्थितिकी तंत्र बनाता है जो जन स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणाली के लिए काफी मददगार है. एच-पॉड प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य पर नियंत्रण रखने, शुरुआत से पहले स्वास्थ्य समस्याओं का पता लगाने और हृदय रोगों की बढ़ते मामलों को रोकने के लिए समय रहते विशेषज्ञों से सलाह लेने को सुलभ बनाता है. यह पीस-मील कॉरपोरेट वेलनेस पेशकश में भारी अंतर को भरने में भी सहायता करता है.
यह जानना बहुत जरूरी है कि यदि हृदय की जांच नियमित रूप से की जाए तो हृदय रोगों को काफी हद तक रोका जा सकता है. और यह अब एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य केंद्रों की उपलब्धता के साथ आसान हो गया है. यह हमें जोखिम कारकों की पहचान करने और बीमारी को बढ़ने से रोकने के लिए उनका प्रबंधन करने में सहायता करेगा. भारत को हार्ट-हेल्दी लिविंग (स्वस्थ्य हृदय के साथ जीना) सुनिश्चित करने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में भी अपनी विशाल आबादी को समाविष्ट करने के लिए एक डिजिटल स्क्रीनिंग क्रांति की आवश्यकता है.
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