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यहां देखें पूरा इंटरव्यू : बच्चन साहब एंग्री यंग मैन बने तो मैं कॉमन मैन विलेन

Updated at : 30 Sep 2019 5:53 PM (IST)
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यहां देखें पूरा इंटरव्यू : बच्चन साहब एंग्री यंग मैन बने तो मैं कॉमन मैन विलेन

सुबह छह बजे फिल्म की शूटिंग खत्म हुई. मुंबई से रांची के लिए सुबह आठ बजे फ्लाइट ली. शाम तकरीबन साढ़े सात बजे रांची पहुंचे. रात के दस बजे तक प्रभात खबर के गुरु सम्मान समारोह में शामिल रहे. इसके बावजूद भी रात के साढ़े ग्यारज बजे तक हमें इंटरव्यू दिया फिल्मों पर बात करते […]

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सुबह छह बजे फिल्म की शूटिंग खत्म हुई. मुंबई से रांची के लिए सुबह आठ बजे फ्लाइट ली. शाम तकरीबन साढ़े सात बजे रांची पहुंचे. रात के दस बजे तक प्रभात खबर के गुरु सम्मान समारोह में शामिल रहे. इसके बावजूद भी रात के साढ़े ग्यारज बजे तक हमें इंटरव्यू दिया फिल्मों पर बात करते रहे. पढ़ें प्रभात खबर डॉट कॉम से हुई पूरी बातचीत..

सवाल – आशुतोष राणा का नाम लेते ही एक दृश्य याद आता है संघर्ष फिल्म का वह सीन है जिसमें विलेन सिर्फ चिल्लाकर सबको डरा देता है.
जवाब- किसी अभिनेता के लिए यह आनंद का विषय है. कला दर्शक के मन मस्तिक के रह जाए तो यह लगता है कि काम करना सफल हुआ.
सवाल – फिल्म अभिनेता के रूप में आपने अलग पहचान बनायी है. कम लोग जानते हैं कि आप बेहतरीन लेखक हैं कवि हैं, कैसे शुरूआत हुई.
जवाब- मैं मध्यप्रदेश के गाडरवारा का रहने वाला हूं. वहां साहित्यक गितिविधियां हुआ करती थीं. कई साहित्यकार हुए, हमने उन्हें बहुत नजदीक से सुना है. हमारे व्यक्तित्व में हमारे शहर का योगदान है, हमारे परिवेश का योगदान है, हमारे परिवार का योगदान है. रूचि तो बचपन से रही. हमारे परिवार में सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए बढ़ावा दिया जाता था. छोटा गांव लेकिन बड़ी संपन्न विरासत हमें मिली है.
सवाल- आपकी किताब "मौन मुस्कान की मार" कोई लांच नहीं हुआ, बेस्ट सेलर हो गयी.
जवाब- "मौन मुस्कान की मार" का कोई लांच नहीं हुआ. किसी शहर में नहीं हुआ. मैंने इसे लिखा है, ना मेरे शहर में हुआ ना, मुंबई में ना दिल्ली में हुआ, किसी शहर में नहीं हुआ. एक साल हो गये, किताब बेस्ट सेलर में आ गयी. जो किताब चुपचाप रिलीज हुई. वह चुपचाप ही बेस्ट सेलर हो गयी लेकिन इस पर कोई हंगामा नहीं हुआ. कई बार ऐसा होता है, जो चीज बहुत ज्यादा पढ़ी, देखी जाती है उस पर कभी- कभी विवाद हो जाता है लेकिन यहां लोगों ने पसंद किया.
सवाल- आप कॉमन मैन विलेन लेकर आये, संघर्ष और दुश्मन जैसी फिल्में लोगों को आज भी याद है.
जवाब- मैं भाग्यशाली हूं. पहले हीरो ऐसा व्यक्ति होता था जिसे गुस्सा नहीं आता था. बच्चन साहेब कॉमन मैन हीरो लेकर आये, जिसे गुस्सा भी आता है. विलेन उस दौर में बड़े होते थे, बड़ी गाड़ी, महंगे कपड़े, बड़ा गैंग. मुझे कॉमन मैन विलेन की भूमिका निभाने का मौका मिला. एक साधारण व्यक्ति जो खतरनाक हो सकता है, उतना ही जितना दूसरे ताकतवर विलेन है. एक ऐसा पोस्टमैन जो आपके घर रोज आता है, जिसे आप याद नहीं रखते. अगर बिना वरदी के बाहर मिल जाये, तो आप याद भी नहीं करेंगे. मैं भाग्यशाली हूं कि ऐसे चुनौती निभाने का मौका मिला
सवाल- आपने कई भाषाओं में फिल्में की है, क्या परेशानियां आती है
जवाब- भाषा भाव के प्रचार का माध्यम है, आपके भाव को लोगों तक पहुंचाने का काम करती है. भाषा मंजिल नहीं है, रास्ता है. बंगाली, पंजाबी खाना आज पूरे देश का स्वाद है. हम और आप स्वाद औक संस्कार के स्तर पर भी जुड़े हुए हैं. हम एक से नहीं है लेकिन एक हैं. यह आनंद का विषय है, मेरा यह मानना है कि मुझे मुंबई से चेन्नई जाना है तो मैं लंदन क्यों जाऊंगा. मैं अंग्रेजी में जितनी ऊर्जा लगाऊंगा मैं तमिल सीख सकता हूं. यही कारण है कि कई भाषा में फिल्में कर ली है. बड़ा सुख मिलता है जब कोई भारतीय फिल्म अभिनेता कहता है.
सवाल- रांची शहर कैसा लगा
जवाब- मैं यहां के लोगों से मिला. अगर शहर के व्यक्तियों में रस होता तो शहर भी अच्छा होता है. मैं कह सकता हूं कि रांची प्रबुद्ध शहर है.
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