Film Review ''करीब करीब सिंगल'': फिर इरफान ने दिल जीत लिया

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 10 Nov 2017 3:14 PM

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II उर्मिला कोरी II फ़िल्म: करीब करीब सिंगलनिर्देशक: तनुजा चंद्राकलाकार: इरफान खान, पार्वती, नेहा धूपिया और अन्यरेटिंग: तीन लव स्टोरी बॉलीवुड का सबसे पुराना और पसंदीदा जॉनर रहा है. ‘करीब करीब सिंगल’ भी प्रेमकहानी है- दो बड़े उम्र के लोगों के बीच लेकिन इसके साथ ऑनलाइन डेटिंग, रोड ट्रिप और कॉमेडी को भी साथ में […]

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II उर्मिला कोरी II

फ़िल्म: करीब करीब सिंगल
निर्देशक: तनुजा चंद्रा
कलाकार: इरफान खान, पार्वती, नेहा धूपिया और अन्य
रेटिंग: तीन

लव स्टोरी बॉलीवुड का सबसे पुराना और पसंदीदा जॉनर रहा है. ‘करीब करीब सिंगल’ भी प्रेमकहानी है- दो बड़े उम्र के लोगों के बीच लेकिन इसके साथ ऑनलाइन डेटिंग, रोड ट्रिप और कॉमेडी को भी साथ में मिलाया गया है. जो इस फिल्म के कांसेप्ट को फ्रेश बना जाता है. फ्रेश कांसेप्ट वाली इसकी कहानी की बात करें तो फिल्म की कहानी 35 साल की जया (पार्वती) की है. जया के पति का निधन हो चुका है और वह अकेले जिंदगी जी रही है. वह बहुत अकेली है.

जया ज़िन्दगी को एक और मौका देना चाहती है. वह एक डेटिंग साइट पर जाती हैं जहां उसकी मुलाकात जिंदादिल और मस्तमौला योगी (इरफान) से होती है. जया से उसका स्वभाव अलग है लेकिन खास है. एक मुलाकात में योगी जया से कहता है कि उसकी पूर्व तीन गर्लफ्रेंड उसके लिए आज भी रोती होंगी इस बात को जया बकवास कहती है.

जिसके बाद ये दोनों योगी की पुरानी गर्लफ्रेंड्स का हाल जानने के लिए देहरादून, जयपुर और गंगटोक जाते हैं. पुराने प्यार से मिलने के इस सफर के दौरान क्या ये दोनों सिंगल लोग एक हो पाएंगे. इसी पर आगे की फ़िल्म है. फ़िल्म का फर्स्ट हाफ एंगेजिंग के साथ साथ एंटरटेनिंग भी है. सेकंड हाफ में थोड़ा मज़ा कम हो गया है. फ़िल्म की कहानी खिंचती जान पड़ती है लेकिन यह आम मुम्बइया फिल्मों की तरह नहीं है. इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है.

फ़िल्म का क्लाइमेक्स कहानी की तरह की एकदम सहज है. फ़िल्म जब खत्म होती है तो यह आपके दिल को छू चुकी होती है. निर्देशिका के तौर पर तनुजा चंद्रा का तारीफ करनी होगी. फ़िल्म में एक अलग अंदाज देखने को मिला है. हिंसा और ड्रामा उनकी पिछली फिल्मों का अहम हिस्सा रहे हैं लेकिन यहां मामला बिल्कुल विपरीत है.

अभिनय की बात करें तो इस फ़िल्म की सबसे बड़ी खासियत अभिनेता इरफान हैं. योगी के किरदार को उन्होंने जिस स्वाभाविक ढंग से जिया है. वह इस फ़िल्म को खास बना जाता है. योगी के किरदार के देशीपन, जिंदादिली, शायराना मिज़ाज़ हर रंग को इरफान परदे पर बखूबी जीते हैं. उनकी मौजूदगी आपके चेहरे पर एक मुस्कराहट बरक़रार रखती है साउथ फिल्मों की अभिनेत्री पार्वती भी अपनी भूमिका में खूब रही हैं. इरफ़ान और उनकी केमिस्ट्री खास है.

नेहा धूपिया और बाकी के किरदारों के लिए फिल्म में कुछ खास नहीं था लेकिन उनकी मौजूदगी कहानी को बखूबी आगे बढ़ाते हैं. फिल्म में तीन गाने हैं जो फिल्म की कहानी और सिचुएशन में बखूबी बुने गए हैं. फिल्म रोड ट्रिप जर्नी है फिल्म में ऋषिकेश, उत्तराखंड, जयपुर के खूबसूरत लोकेशंस हैं. खास बात है कि इस जर्नी में बिजनेस क्लास से लेकर स्लीपर क्लास सभी को कहानी में जोड़ा गया है. फ़िल्म के संवाद खास बन पड़े हैं.

कुलमिलाकर करीब करीब सिंगल एक हल्की फुल्की फ़िल्म है. जो आपके चेहरे पर मुस्कुराहट ले आती है.

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