हैप्पी बर्थडे कमल हासन: ऐसे किरदार जिन्हें भूला नहीं जा सकता....

कमल हासन को जन्म 7 नवंबर 1954 हो हुआ था. कमल हासन ने लंबे समय से तमिल और हिंदी सिनेमा में कई यादगार फिल्में दी है जिसका कोई तोड़ नहीं है. उन्हें भारत के मौजूदा सुपरस्टार्स में सबसे काबिल अभिनेता कहा जाये तो गलत नहीं होगा. मात्र 5 साल उम्र में कमल हासन ने तमिल […]
कमल हासन को जन्म 7 नवंबर 1954 हो हुआ था. कमल हासन ने लंबे समय से तमिल और हिंदी सिनेमा में कई यादगार फिल्में दी है जिसका कोई तोड़ नहीं है. उन्हें भारत के मौजूदा सुपरस्टार्स में सबसे काबिल अभिनेता कहा जाये तो गलत नहीं होगा. मात्र 5 साल उम्र में कमल हासन ने तमिल फिल्म ‘कलातुर कन्नम्मा’ में काम किया था, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रपति से गोल्ड मेडल मिला था.
इसके बाद कमल हासन की प्रतिभा ने जो चमक बिखेरी वो आज भी बरकरार है. उन्होंने दुनियाभर में अपने किरदारों को लेकर कई प्रयोग किये, ना तो वे किसी क्षेत्र में बंधे न भाषा में. हिंदी सिनेमा में उनकी फिल्में ‘एक दूजे के लिए’, ‘सदमा’ और ‘सागर’ में उनकी अदाकारी आज भी लोग नहीं भूले हैं.
(फिल्म: सदमा)
1980-90 के तक के दशक में भारतीय सिनेमा एक लीक पर चल रहा था. इसमें ताजगी लाने का श्रेय अभिनेता कमल हासन को जाता है. कमल हासन ‘पुष्पक’ जैसी साइलेंट फिल्म में लेकर आये. 131 मिनट की इस फिल्म में एक भी डॉयलॉग नहीं था. इसके बाद वे फिल्म ‘अप्पू राजा’ में वे बौने के किरदार में नजर आये.
(फिल्म: हे राम)
फिल्म ‘नायकन’ में उन्होंने गैंगस्टर के रूप में एक पति, पिता, दोस्त और फिर बूढ़ा होने तक की भूमिका को संजीदगी से जीया. ‘नायकन’ की कहानी और कमल हासन की अदायगी ने हिंदी फिल्म निर्माताओं को ऐसा झकझोरा कि उन्हें ‘नायकन’ की कहानी पर दयावान नाम से हिंदी फिल्म बनाई.
फिल्म ‘चाची 420’ में उनके महिला के किरदार को बेहद पसंद किया गया. इसके बाद वे लोगों के बीच सबसे प्यारी चाची के तौर फेमस हो गये. कमल हासन रूके नहीं, इसके बाद वे ‘दशावतारम’ में 10 रूपों के साथ पर्दे पर दिखे. साल 2008 में रिलीज हुई फिल्म ‘दशावतारम’ के 10 किरदारों में उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का भी रोल निभाया.
कमल हासन की फिल्म ‘अभय’ से प्रेरणा लेने की बात दुनिया भर में मशहूर डायरेक्टर क्वांटीन टेरंटीनो कह चुके हैं. ‘अपूर्वा रागानगल’ के लिए कमल हासन को सर्वश्रेष्ठ तमिल अभिनेता का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था.
(फिल्म: एक दूजे के लिए)
साल 1981 में बालाचंदर की फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ के साथ कमल ने हिंदी फिल्मों में कदम रखा. ‘एक दूजे के लिए’ के बाद उन्होंने ‘सदमा’, ‘ये तो कमाल हो गया’ और ‘जरा सी जिंदगी’ में काम किया जिसके बाद हिंदी सिनेमा में उनकी पहचान और पुख्ता हो गई. 1984 में आई मल्टीस्टारर फिल्म ‘राजतिलक’ और 1985 में आई ‘सागर’ ने उन्हें हिंदी सिनेमा में एक स्टार का दर्जा दिला दिया.
पद्मश्री से सम्मानित हो चुके कमल हासन, भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे अधिक सम्मान पाने वाले अभिनेता हैं. उनके नाम 4 राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार, 3 सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार तथा 1 सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार पाने वाले अभिनेता होने का रिकॉर्ड दर्ज है. इसके अलावा कमल हासन, पांच भाषाओं में रिकॉर्ड उन्नीस फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार पा चुके हैं. साल 2000 में नवीनतम पुरस्कार के बाद, संगठन से ख़ुद को पुरस्कारों से मुक्त रखने का आग्रह किया.
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