"भारत के छोटे शहरों की लडकियां फैशन के प्रति ज्यादा जागरूक"
नयी दिल्ली : अगर किसी फिल्म के ट्रेलर को अगर प्रवेश परीक्षा की तरह देखा जाये तो कहा जा सकता है कि निर्देशक अश्विनी अय्यर तिवारी को उनकी फिल्म ‘ ‘बरेली की बर्फी ‘ ‘ के लिये शानदार अंक मिलने चाहिये. ‘ ‘निल बटे सन्नाटा ‘ ‘ के साथ सफल पदार्पण करने वाली निर्देशक का […]
नयी दिल्ली : अगर किसी फिल्म के ट्रेलर को अगर प्रवेश परीक्षा की तरह देखा जाये तो कहा जा सकता है कि निर्देशक अश्विनी अय्यर तिवारी को उनकी फिल्म ‘ ‘बरेली की बर्फी ‘ ‘ के लिये शानदार अंक मिलने चाहिये. ‘ ‘निल बटे सन्नाटा ‘ ‘ के साथ सफल पदार्पण करने वाली निर्देशक का कहना है कि उन्हें वुडी एलेन, ऋषिकेश मुखर्जी और साई परांजपे का सिनेमा पसंद है, खासकर दैनिक जीवन में हास्य को प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता काबिले-तारीफ है.
उन्होंने पीटीआई-भाषा को एक साक्षात्कार में बताया, ‘ ‘हम भारतीय काफी मजेदार लोग हैं. जब आप किसी शादी समारोह में शामिल होते हैं और आपको उसमें बहुत सारे मजेदार किरदार देखने को मिलती है. तब हम उन पर ध्यान नहीं देते हैं. ‘बरेली की बर्फी ‘ के साथ मैं उस अजीब दुनिया को पर्दे पर उतारना चाहती थीं. मैं चाहती थी कि यह हमारे देश की संस्कृति पर आधारित हो.’ ‘ 37 वर्षीय तिवारी ने कहा कि भारत के छोटे शहरों के दैनिक जीवन के छोटे-छोटे पहलुओं ने उनका ध्यान आकषर्ति किया, जहां चीजें बहुत तेजी से बदल रही है.
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