Sports Academy के जरिए गरीब बच्चियों को Football में कर रहे ट्रेन, लोगों ने कहा भला बुरा पर नहीं मानी हार

Published by : Shambhavi Shivani Updated At : 03 Sep 2025 10:22 PM

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रानी लक्ष्मीबाई अकैडमी के निदेशक संजय पाठक और अकैडमी की स्टूडेंट्स

Teachers Day Special: संजय पाठक जिले के मैरवा में रानी लक्ष्मीबाई स्पोर्ट्स अकैडमी चलाते हैं, जहां कमजोर व गरीब परिवार से आने वाली बच्चियों को सशक्त बनाने के लिए उन्हें हैंडबॉल, फुटबॉल जैसे स्पोर्ट्स की ट्रेनिंग दी जाती है.

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Teachers Day Special: कहते हैं “गुरु बिना ज्ञान नहीं, जीवन में मान नहीं”. कई बार तो गुरु माता-पिता से भी बढ़कर हो जाते हैं क्योंकि वो न सिर्फ हमारा मार्गदर्शन करते हैं, हमें सही राह पर सीखाना चाहते हैं बल्कि हमारी तरक्की ही उनका एक मात्र उद्देश्य बन जाता है. ये बात सिवान जिले से आने वाले संजय पाठक पर बिलकुल फिट बैठती है. संजय पाठक जिले के मैरवा में रानी लक्ष्मीबाई स्पोर्ट्स अकैडमी (Rani Laxmibai Sports Academy) चलाते हैं, जहां कमजोर व गरीब परिवार से आने वाली बच्चियों को सशक्त बनाने के लिए उन्हें हैंडबॉल, फुटबॉल जैसे स्पोर्ट्स की ट्रेनिंग दी जाती है. ये बच्चियां संजय पाठक को न सिर्फ अपना शिक्षक और गुरु मानती हैं बल्कि उन्हें अभिभावक जैसा सम्मान देती हैं. 

राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कंपटीशन में भाग ले रही हैं बिहार की बेटियां 

रानी लक्ष्मीबाई अकैडमी के निदेशक संजय पाठक ने इस अकैडमी को चलाने के लिए काफी संघर्ष किया है. ये उनके त्याग और बलिदान का नतीजा है कि आज बिहार के इस जिले से लड़कियां राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में शामिल हो रही हैं. 

जीत से मिली हिम्मत 

संजय पाठक का सफर 2009 में शुरू हुआ, जब उनकी नियुक्ति गांव के आदर्श सरकारी मिडिल स्कूल में हुई. उन्होंने दो छात्रा को ट्रेन करके स्थानीय खेल प्रतियोगिता के लिए तैयार किया. इसमें जीत हासिल करने के बाद उनका हौसला बढ़ा और उन्होंने सिवान की बच्चियों को ट्रेनिंग देने का फैसला लिया. हालांकि, शुरुआत में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा. लोग संजय पाठक को भला बुरा कहते थे. सरकारी स्कूल के शिक्षक होने के कारण उनकी कुछ जिम्मेदारी भी थी और दायरा भी. साथ ही सबसे बड़ी दिक्कत थी आर्थिक सहयोग. लेकिन संजय पाठक ने हार नहीं मानी. खुद के दम पर अकैडमी की शुरुआत की.

कई सारी लड़कियों को किया जाता है ट्रेन

बिहार के इस शिक्षक ने स्कूल के मैदान में लड़कियों को प्रशिक्षण देना शुरू किया. धीरे धीरे उनसे प्रशिक्षण लेने के लिए और भी लड़कियां जुटीं. उन्होंने कहा कि अकैडमी की बच्चियां जबरदस्त मेहनत करती हैं और उनमें कौशल भी है. अकैडमी में अनुशासन का पालन किया जाता है. सभी लड़कियों की डाइट का और उनके स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाता है. रानी लक्ष्मीबाई स्पोर्ट्स अकैडमी में लड़कियों को हैंडबॉल, फुटबॉल और रग्बी सीखाया जाता है.

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Shambhavi Shivani

लेखक के बारे में

By Shambhavi Shivani

शाम्भवी शिवानी डिजिटल मीडिया में पिछले 3 सालों से सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शिक्षा और रोजगार से जुड़ी खबरों की समझ रखने वाली शाम्भवी एग्जाम, सरकारी नौकरी, रिजल्ट, करियर, एडमिशन और सक्सेस स्टोरी जैसे विषयों पर रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग करती हैं. सरल भाषा और जानकारी को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है. डिजिटल मीडिया में अपने करियर के दौरान शाम्भवी ने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्थाओं के साथ काम किया है. यहां उन्होंने एजुकेशन, युवा मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर कंटेंट तैयार किया. वर्तमान में प्रभात खबर के साथ जुड़कर वे खास तौर पर बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा, सरकारी नौकरी, करियर ऑप्शंस और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज पर काम कर रही हैं. शाम्भवी की रुचि सिर्फ पत्रकारिता तक सीमित नहीं है. उन्हें सिनेमा और साहित्य में भी गहरी दिलचस्पी है, जिसका असर उनकी लेखन शैली में भी देखने को मिलता है. वे तथ्यों के साथ भावनात्मक जुड़ाव और मानवीय पहलुओं को भी अपनी स्टोरीज में जगह देने की कोशिश करती हैं. पटना में जन्मीं शाम्भवी ने Patna University से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद Indira Gandhi National Open University (IGNOU) से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. पत्रकारिता और जनसंचार की पढ़ाई ने उन्हें न्यूज राइटिंग, डिजिटल कंटेंट और ऑडियंस बिहेवियर की बेहतर समझ दी है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार बदलते ट्रेंड्स और रीडर्स की जरूरतों को समझते हुए शाम्भवी SEO-फ्रेंडली, इंफॉर्मेटिव और एंगेजिंग कंटेंट तैयार करने पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों तक सही, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाई जा सके.

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