ePaper

Maithili Sharan Gupt Jayanti 2024: राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती आज, जानें उनकी महान रचनाओं के बारे में

Updated at : 03 Aug 2024 9:23 AM (IST)
विज्ञापन
Maithili Sharan Gupt Jayanti 2024 पर आज जानें उनकी रचनाओं के बारे में

Maithili Sharan Gupt Jayanti 2024 पर आज जानें उनकी रचनाओं के बारे में

Maithili Sharan Gupt Jayanti 2024: आधुनिक हिंदी कविता के दिग्गज और खड़ी बोली के खास तरहीज देने वाले मैथिलीशरण गुप्त की आज जयंती है. आज के दिन को हर वर्ष ‘कवि दिवस’ के रूप में मनाया जाता है.

विज्ञापन

Maithili Sharan Gupt Jayanti 2024: राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की आज जयंती है. मैथिलीशरण गुप्त का जन्म आज ही के दिन 3 अगस्त 1886 को उत्तर प्रदेश में झांसी के चिरगांव में हुआ था. आज के दिन को हर वर्ष ‘कवि दिवस’ के रूप में मनाया जाता है.

पढाई रह गई अधूरी

स्कूल में खेलकूद के प्रति ज्यादा दिलचस्पी और ध्यान देने के कारण पढ़ाई अधूरी ही रह गई. जिसके बाद उन्होंने घर में ही हिन्दी, बंगला, संस्कृत साहित्य का अध्ययन किया.

Festivals of Jharkhand: झारखंड राज्य के 5 मुख्य त्योहारों के बारे में जानें, JSSC CGL 2024 में यहां से आ सकते हैं सवाल

List of Governors of Jharkhand: झारखंड के नए राज्यपाल नियुक्त हुए संतोष गंगवार, यहां देखें अब तक के राज्यपालों की सूची

दद्दा नाम से संबोधित किया जाता था मैथिलीशरण गुप्त को

मैथिलीशरण गुप्त को हिन्दी साहित्य में खड़ी बोली के प्रथम महत्त्वपूर्ण कवि हैं. उन्हें ‘दद्दा’ नाम से सम्बोधित किया जाता था.

मैथिलीशरण गुप्त का हिन्दी कविता के इतिहास में योगदान


ब्रजभाषा जैसी समृद्ध काव्य-भाषा को ज्यादा महत्व दिया जाता था. पर मैथिलीशरण गुप्त ने अपनी रचनाओं में खड़ी बोली को माध्यम बनाया साथ ही उन्होंने अपनी कविता के द्वारा खड़ी बोली को एक काव्य-भाषा के रूप में निर्मित करने में अथक प्रयास भी किया.

मैथिलीशरण गुप्त की अविस्मरणीय कविता

नर हो न निराश करो मन को

कुछ काम करो कुछ काम करो

जग में रहके निज नाम करो

यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो

समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो

कुछ तो उपयुक्त करो तन को

नर हो न निराश करो मन को

मैथिलीशरण गुप्त की रचनाएं

रंग में भंग: 1909 ई.
जयद्रथवध: 1910 ई.
भारत भारती: 1912 ई.
किसान: 1917 ई.
शकुन्तला: 1923 ई.
पंचवटी: 1925 ई.
अनघ: 1925 ई.
हिन्दू: 1927 ई.
त्रिपथगा: 1928 ई.
शक्ति: 1928 ई.
गुरुकुल: 1929 ई.
विकट भट: 1929 ई.
साकेत: 1931 ई.
यशोधरा: 1933 ई.
द्वापर: 1936 ई.
सिद्धराज: 1936 ई.
नहुष: 1940 ई.
कुणालगीत: 1942 ई.
काबा और कर्बला: 1942 ई.
पृथ्वीपुत्र: 1950 ई.
प्रदक्षिणा: 1950 ई.
जयभारत: 1952 ई.
विष्णुप्रिया: 1957 ई.
अर्जन और विसर्जन: 1942 ई.
झंकार: 1929 ई

विज्ञापन
Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola