कांग्रेस नेता फैक्ट चेक करें, राहुल गांधी के बयान पर DU की कड़ी आपत्ति

Updated at : 14 Mar 2026 11:01 AM (IST)
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DU Dismisses Rahul Gandhi Statement

राहुल गांधी और डीयू कैंपल की तस्वीर

DU Dismisses Rahul Gandhi Statement: कांग्रेस लीडर राहुल गांधी ने कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स अपनी जाति के कारण फेल हो रहे हैं. कांग्रेस लीडर के इस बयान को दिल्ली यूनिवर्सिटी ने खारिज किया है. यूनिवर्सिटी ने इस मामले को लेकर ट्वीट भी किया है.

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DU Dismisses Rahul Gandhi Statement: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कांशीराम जयंती पर हुए संविधान सम्मेलन में में दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) को लेकर विवादित बयान दिया है. उन्होंने कहा कि डीयू में जाति देखकर इंटरव्यू में फेल कर दिया जाता है. लेकिन दिल्ली यूनिवर्सिटी ने राहुल गांधी के इस बयान को खारिज कर दिया. डीयू ने कहा कि यूनिवर्सिटी के UG और PG कोर्स में CUET के माध्यम से एडमिशन मिलता है और आमतौर पर कोई इंटरव्यू नहीं होता है.

दिल्ली यूनिवर्सिटी ने क्लियर किया अपना स्टैंड

दिल्ली यूनिवर्सिटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के माध्यम से कहा कि University of Delhi में छात्रों को मुख्य रूप से Common University Entrance Test (CUET) के स्कोर के आधार पर एडमिशन मिलता है. यूनिवर्सिटी में आमतौर पर यूजी और पीजी कोर्स के लिए इंटरव्यू अनिवार्य नहीं होता है.

DU
दिल्ली यूनिवर्सिटी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

डीयू की इस ट्वीट में आगे कहा गया है कि कांग्रेस लीडर राहुल गांधी की टिप्पणी अगर फैकल्टी भर्ती जैसी प्रक्रिया पर थी तो यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यूनिवर्सिटी ने हाल के वर्षों में सभी कैटेगरी में हजारों शिक्षकों की नियुक्ति की है.

डीयू ने जताई कड़ी आपत्ति

डीयू ने राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि इससे यूनिवर्सिटी का माहौल प्रभावित होता है. एक स्वस्थ एजुकेशनल माहौल बनाने में बाधा आती है. नेता प्रतिपक्ष को ऐसा बयान देने से पहले तथ्यों की सही तरीके से जांच कर लेनी चाहिए थी.

क्या था राहुल गांधी का बयान?

लखनऊ में कांशीराम जयंती पर हुए संविधान सम्मेलन में राहुल गांधी पहुंचे. इस दौरान भाषण देते हुए उन्होंने समाज में बराबरी और एक समान अधिकार पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि अगर हिंदुस्तान में विकास हो रहा है तो गरीब-से-गरीब बच्चा, फिर चाहे वो किसी भी वर्ग का हो, उस प्रगति में उसे शामिल होना चाहिए. भारत की संस्थाओं को देखें जैसे कि न्यायपालिका, कॉर्पोरेट इंडिया, शिक्षण संस्था आदि को चुन लीजिए तो आप देखेंगे कि उसमें वंचित वर्ग कहीं है ही नहीं. आप इंटरनेट पर जाइए और 500 सबसे बड़ी कंपनी के CEO और सीनियर मैनेजमेंट का नाम निकाल लीजिए आपको पिछड़ा वर्ग और आदिवासी का एक भी कैंडिडेट इस लिस्ट में नहीं दिखेगा.

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Shambhavi Shivani

लेखक के बारे में

By Shambhavi Shivani

शाम्भवी शिवानी पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया के साथ जुड़ी हुई हैं. उन्होंने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्था के साथ काम किया है. अभी प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ जुड़कर एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शाम्भवी यहां एग्जाम, नौकरी, सक्सेस स्टोरी की खबरें देखती हैं. इसके अलावा वे सिनेमा और साहित्य में भी रुचि रखती हैं.

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