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हाईकोर्ट ने हांसखाली दुष्कर्म व हत्या मामले की CBI जांच के दिये आदेश, 2 मई तक मांगी प्राथमिक रिपोर्ट

Updated at : 12 Apr 2022 9:37 PM (IST)
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हाईकोर्ट ने हांसखाली दुष्कर्म व हत्या मामले की CBI जांच के दिये आदेश, 2 मई तक मांगी प्राथमिक रिपोर्ट

हाईकोर्ट में कहा कि पीड़िता की मां ने सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया है और पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज कर जांच भी शुरू कर दी है. लेकिन, मुख्यमंत्री ने इस घटना को प्रेम प्रसंग बताया है और पीड़िता के गर्भवती होने की संभावना जतायी है.

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कोलकाता: नदिया जिला के हांसखाली में नाबालिग के कथित रूप में हुए सामूहिक दुष्कर्म व हत्या मामले की कलकत्ता हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दे दिये हैं. सीबीआई जांच की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी. मंगलवार को चीफ जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव व जस्टिस राजर्षि भारद्वाज की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद जांच सीबीआई को सौंप दी.

कोर्ट में पेश किया गया मुख्यमंत्री का बयान

मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान हांसखाली घटना की सीबीआई जांच की मांग करते हुए याचिका दायर करने वाली अधिवक्ता सुष्मिता साहा दत्त ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दिये गये बयान को अदालत के समक्ष रखा. उन्होंने हाईकोर्ट में कहा कि पीड़िता की मां ने सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया है और पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज कर जांच भी शुरू कर दी है. लेकिन, मुख्यमंत्री ने इस घटना को प्रेम प्रसंग बताया है और पीड़िता के गर्भवती होने की संभावना जतायी है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के इस बयान से जांच प्रभावित हो सकता है.

कोर्ट ने पूछे ये सवाल

उन्होंने हाईकोर्ट के समक्ष कहा कि इस मामले की भी सीबीआई जांच होनी चाहिए. किन परिस्थितियों में पीड़िता का शव जलाया गया. इस मामले को लेकर पीड़िता के परिवार जब हांसखाली थाना पहुंचे थे, तो पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से इंकार कर दिया था. साथ ही अधिवक्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि जहां पर पीड़िता का शव जलाया गया, उस जगह को भी पानी से धो दिया गया है. इस पर न्यायाधीश ने राज्य सरकार के वकील से पूछा कि जहां पर पीड़िता का शव जलाया गया था, उस जगह का जांच अधिकारियों ने दौरा किया है या नहीं.

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सीएफएल को बुलाने की मांग

इस घटना को लेकर एक और जनहित याचिका दायर करने वाले वकील अनिंद्य सुंदर दास की ओर से अधिवक्ता फिरोज एडुलजी ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले में धारा 375 के तहत मामला दर्ज किया जाये, क्योंकि पीड़िता नाबालिग थी. पुलिस ने रविवार को आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इसलिए अगर 15 दिनों के अंदर मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को नहीं सौंपा गया, तो इससे सबूत नष्ट हो जायेंगे. इस मामले की जांच के लिए सेंट्रल फॉरेंसिक रिसर्च लैबोरेटरी को भी बुलाने की मांग की.

आरोपियों व गवाहों के बयान की वीडियो रिकार्डिंग की जाये

अधिवक्ता फिरोज एडुलजी ने कहा कि इस प्रकार के मामले में सभी आरोपियों व गवाहों के बयान की वीडियो रिकार्डिंग की जाये, ताकि बयान को लेकर स्पष्टता बनी रहे. उन्होंने पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि जहां से नाबालिग को बरामद किया गया था, वहां कोई खून का नमूना था या नहीं, यह जानना जरूरी है. अगर जांच में लुमिनल का प्रयोग किया गया तो सबूत मिल सकते हैं. आरोपियों के कपड़ों को जब्त किया गया है या नहीं. इसके साथ ही जिस घर में घटना हुई थी, वहां बेड शीट को जब्त किया गया है या नहीं. इसे लेकर भी अधिवक्ता ने सवाल उठाये.

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सरकार के वकील को कोर्ट ने लगायी फटकार

इस पर राज्य सरकार के वकील ने बताया कि घटनास्थल से बेड शीट जब्त किया गया है. तब मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आप अभी बता रहे हैं कि बेड शीट जब्त किया गया है. कौन सा बेड शीट और कब जब्त किया गया. यह बात आपने कोर्ट को पहले क्यों नहीं बतायी. आप क्यों बातों को छिपा रहे हैं.

रिपोर्ट- अमर शक्ति प्रसाद

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