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1,300 अंकों की गिरावट के साथ सेंसेक्स का सरेंडर,  इंवेस्टर्स के 6.3 लाख करोड़ रुपए डूबे

Updated at : 24 Feb 2026 4:57 PM (IST)
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Share Market Crash

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Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार के लिए ब्लैक ट्यूसडे साबित हुआ. एंथ्रोपिक के AI टूल के खौफ और रिकॉर्ड कमजोर रुपये ने निवेशकों के ₹6.3 लाख करोड़ स्वाहा कर दिए. आईटी-ऑटो में मची भगदड़ से सेंसेक्स 1,300 अंक टूट गया, जिससे मार्केट कैप घटकर ₹462 लाख करोड़ के करीब पहुंच गया.

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Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार के लिए मंगलवार का दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा. आईटी (IT) और ऑटो सेक्टर में आई जोरदार बिकवाली की लहर ने पूरे बाजार को हिलाकर रख दिया. दोपहर के सत्र तक BSE Sensex 1,300 अंकों से ज्यादा गोता लगा गया, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा. इस गिरावट के साथ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर 462 लाख करोड़ रुपए के करीब पहुंच गया.

आखिर किन कारणों ने बाजार में यह ‘कोहराम’ मचाया? आइए विस्तार से समझते हैं.

IT सेक्टर में क्यों मची भगदड़?

IT शेयरों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बढ़ता डर है. अमेरिकी फर्म एंथ्रोपिक के एक दावे ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है. कंपनी का कहना है कि उसका नया क्लाउड कोड टूल पुराने सॉफ्टवेयर सिस्टम को बेहद सस्ते और आसान तरीके से अपग्रेड कर सकता है. इस खबर के बाद भारतीय आईटी कंपनियों के रेवेन्यू मॉडल पर खतरे की आशंका जताई जाने लगी, जिससे आईटी इंडेक्स लगभग 3% तक टूट गया.

ग्लोबल मार्केट से मिले निराशाजनक संकेत

भारतीय बाजार पर वैश्विक दबाव भी साफ नजर आया. अमेरिकी बाजार (Wall Street) में आई गिरावट और एशियाई बाजारों में छाई सुस्ती ने माहौल बिगाड़ दिया. इसके अलावा, ट्रंप के 15% टैरिफ वाले बयान और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से पैदा हुई अनिश्चितता ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स को डरा दिया है, जिसका सीधा असर भारत पर भी पड़ा.

रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर की ओर 90.96 के पार

डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने भी बाजार की कमर तोड़ दी. मंगलवार को रुपया 7 पैसे टूटकर 90.96 प्रति डॉलर के स्तर पर जा गिरा. करेंसी की इस गिरावट ने विदेशी निवेशकों के भरोसे को डगमगा दिया, जिससे बाजार का सेंटीमेंट पूरी तरह नकारात्मक हो गया.

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों में 1% का उछाल देखा गया, जिससे यह 72.13 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. भारत के लिए कच्चा तेल महंगा होने का मतलब है बढ़ती महंगाई और बढ़ता व्यापार घाटा. तेल की कीमतों में आई इस तेजी ने निवेशकों को सतर्क कर दिया और उन्होंने बिकवाली को ही बेहतर विकल्प समझा.

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Anshuman Parashar

लेखक के बारे में

By Anshuman Parashar

अंशुमान पराशर पिछले दो वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के लिए बिजनेस की लेटेस्ट खबरों पर काम कर रहे हैं. इसे पहले बिहार की राजनीति, अपराध पर भी इन्होंने खबरें लिखी हैं. बिहार विधान सभा चुनाव 2025 में इन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और विस्तृत राजनीतिक कवरेज किया है.

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