अब नहीं बिकेंगे 850, 875, 900 और 950 ML के तेल पाउच ! सरकार ला रहीं स्टैंडर्ड पैकट नियम
Published by : Abhishek Pandey Updated At : 04 Jun 2026 5:23 PM
सांकेतिक तस्वीर ( फोटो : AI )
Standardize Edible Oil Pack Sizes : सरसों, रिफाइंड और सोयाबीन तेल खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर! सरकार जल्द लागू कर सकती है खाद्य तेल का 'एक समान साइज नियम'. अब कंपनियों के चालाकी वाले पैक साइज (850ml, 910ml) होंगे बंद, जानें आपको कैसे होगा फायदा.
Standardize Edible Oil Pack Sizes : अगर आप भी बाजार से फॉर्च्यून, धारा या किसी अन्य ब्रांड का सरसों, सोयाबीन या सूरजमुखी का तेल खरीदते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. केंद्र सरकार जल्द ही देश के करोड़ों राशन उपभोक्ताओं और आम ग्राहकों के हक में एक बहुत बड़ा फैसला लेने जा रही है.
विश्वसनीय रिपोर्ट्स और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सरकार अब खाद्य तेलों के लिए ‘स्टैंडर्डाइज्ड पैक साइज’ (एक समान तय आकार) लागू करने की तैयारी में है. इस ऐतिहासिक कदम के पीछे सरकार का सीधा मकसद बाजार में पारदर्शिता (Transparency) लाना, कंपनियों की पैकेजिंग वाली चालाकी को रोकना और आम ग्राहकों को धोखे से बचाकर सही कीमत पर सामान उपलब्ध कराना है.
क्यों पड़ी इस नए नियम की जरूरत ?
बाजार के मौजूदा तौर-तरीकों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों (Consumer Rights Experts) का कहना है कि अभी एडिबल ऑयल मार्केट में साइज को लेकर भारी कन्फ्यूजन है. बाजार में इस समय 1 लीटर के नाम पर
- 850 मिलीलीटर (ML)
- 875 मिलीलीटर (ML)
- 900 मिलीलीटर (ML)
- 950 मिलीलीटर (ML)
जैसे अजीबोगरीब साइज के पैक बेचे जा रहे हैं.
दिक्कत कहां आती है ?
आम ग्राहक सुपरमार्केट या किराना दुकान पर जाकर सिर्फ पैकेट के ऊपर लिखी ‘कीमत’ देखता है, उसका ‘साइज’ नहीं. उदाहरण के लिए, एक ब्रांड का 900 ML का पैकेट ₹140 में मिल रहा है और दूसरे ब्रांड का 1 लीटर (1000 ML) का पैकेट ₹150 में है. ऊपरी तौर पर ₹140 वाला पैकेट सस्ता लगता है, लेकिन प्रति लीटर की वास्तविक लागत (Per Litre Real Cost) निकालने पर ग्राहक को नुकसान हो रहा होता है. अलग-अलग साइज होने के कारण ग्राहक दो ब्रांड्स की कीमतों की सही तुलना नहीं कर पाते.
नए नियम से ग्राहकों को क्या होगा फायदा?
कीमतों की तुलना होगी बेहद आसान: जब सरकार नियम तय कर देगी (जैसे तेल सिर्फ 500 ML, 1 Litre या 2 Litre के पैक में ही बिकेगा), तब कंपनियों के बीच पैकेजिंग के साइज को लेकर होने वाला खेल खत्म हो जाएगा. ग्राहक तुरंत समझ जाएंगे कि कौन सा ब्रांड शुद्धता और कीमत के मामले में बेहतर वैल्यू दे रहा है. साइज का अंतर खत्म होने के बाद कंपनियों के बीच मुकाबला इस बात पर नहीं होगा कि कौन कितना कम तेल पैक में भरता है, बल्कि इस बात पर होगा कि किसकी ‘गुणवत्ता’ (Quality) और ‘शुद्धता’ कितनी बेहतर है.
कंपनियों की लागत घटेगी और पर्यावरण को मिलेगा फायदा
इंडस्ट्री के विनिर्माण विशेषज्ञों (Manufacturing Experts) का मानना है कि इस फैसले का एक दूसरा शानदार पहलू भी है, जो पर्यावरण और कॉर्पोरेट दोनों के लिए फायदेमंद है. अभी कंपनियों को 850ml, 900ml और 1 लीटर के लिए अलग-अलग डिजाइन की बोतलें, अलग कस्टमाइज्ड लेबल और अलग कार्टन बनाने पड़ते हैं. इससे प्रॉडक्शन प्रोसेस जटिल और खर्चीला हो जाता है. साइज एक होने से मैन्युफैक्चरिंग बेहद सरल हो जाएगी. साइज फिक्स होने से पैकेजिंग मटेरियल की बर्बादी रुकेगी. प्लास्टिक का उपयोग सीमित होगा, जिसे सस्टेनेबल (टिकाऊ) और पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
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By Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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