कटिहार में 100 साल से अधिक पुराना कष्टहरण नाथ गौरीशंकर मंदिर, जहां जलाभिषेक से दूर होते हैं भक्तों के कष्ट

कष्टहरण नाथ गौरीशंकर मंदिर
Aaj Ka Darshan: कटिहार शहर के बीचोंबीच स्थित कष्टहरण नाथ गौरीशंकर मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धाओं का केंद्र है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से जलाभिषेक करने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है और जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं.
कटिहार से सूरज गुप्ता की रिपोर्ट
Aaj Ka Darshan: कटिहार शहर के डॉ राजेंद्र प्रसाद पथ स्थित बाटा चौक के समीप अवस्थित श्री 108 कष्टहरण नाथ गौरीशंकर मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अधीन संचालित यह मंदिर शहर के सबसे प्राचीन शिवालयों में गिना जाता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मंदिर का इतिहास एक सदी से भी अधिक पुराना है. भक्तों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करने पर जीवन के दुख, कष्ट और बाधाएं दूर हो जाती हैं.
शिव भक्ति के साथ देवी-देवताओं का दिव्य संगम
कष्टहरण नाथ गौरीशंकर मंदिर परिसर केवल शिव उपासना का केंद्र नहीं है, बल्कि यहां कई देवी-देवताओं के मंदिर भी स्थापित हैं. मुख्य गर्भगृह में विराजमान शिवलिंग पर प्रतिदिन श्रद्धालु जल, बेलपत्र और पुष्प अर्पित करते हैं. इसके अलावा माता पार्वती, राधा-कृष्ण और बजरंगबली के मंदिर भी भक्तों की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं. सुबह से लेकर शाम तक यहां पूजा-अर्चना और दर्शन का सिलसिला जारी रहता है.
सावन और शिवरात्रि में उमड़ता है श्रद्धा का सैलाब
मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता सावन और महाशिवरात्रि के दौरान देखने को मिलती है. सावन के प्रत्येक सोमवार को हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं. मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठता है. विशेष अवसरों पर भव्य पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है, जिसमें दूर-दराज के श्रद्धालु भी शामिल होते हैं.
जानिए पूजा और आरती का समय
मंदिर के पुजारी हेमचंद्र भारती के अनुसार प्रतिदिन सुबह 7 बजे से पूजा-अर्चना शुरू होती है. सुबह 8 बजे विशेष आरती संपन्न होती है. दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक पूजा-अर्चना स्थगित रहती है. इसके बाद शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक श्रद्धालु दर्शन और पूजा कर सकते हैं. रात्रि 8 बजे संध्या आरती के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं.
कटिहार की सांस्कृतिक पहचान भी है यह मंदिर
कष्टहरण नाथ गौरीशंकर मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि कटिहार की सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है. शहर और आसपास के जिलों से आने वाले श्रद्धालु यहां बाबा भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त कर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं. मंदिर का शांत वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा हर आगंतुक को विशेष अनुभूति प्रदान करती है.
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लेखक के बारे में
By प्रत्युष प्रशांत
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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