बिहार शिक्षा विभाग का सख्त निर्देश: 9वीं से 12वीं तक के स्कूलों में पूरी तरह क्रियाशील होंगी विज्ञान प्रयोगशालाएं

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बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में विज्ञान शिक्षा को व्यावहारिक बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. अगले 15 दिनों में सभी स्कूलों में आदर्श विज्ञान प्रयोगशालाएं पूरी तरह से क्रियाशील होंगी. विभाग ने उपकरणों की खरीद और रखरखाव के लिए निर्देश जारी किए हैं.
बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में विज्ञान शिक्षा को व्यावहारिक और गतिविधि-आधारित बनाने के लिए कड़ा रुख अपनाया है. माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के निदेशक सज्जन आर ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO), जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPOC) और स्कूल के प्रधानाध्यापकों (Headmasters) को प्रयोगशालाओं (Science Labs) को अविलंब पूरी तरह क्रियाशील बनाने का आदेश जारी किया है.
15 दिनों में आदर्श विज्ञान प्रयोगशालाएं होंगी शुरू
निदेशक द्वारा जारी आदेश के अनुसार:
- कक्षा 9 से 12 तक फोकस: विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि पाठ्यक्रम आधारित प्रयोगात्मक (Practical) प्रयोग कराए जाएंगे.
- 15 दिनों का अल्टीमेटम: चयनित सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालयों) में विज्ञान व्याख्याताओं के समन्वय से प्राथमिकता के आधार पर अगले 15 दिनों के भीतर 'आदर्श विज्ञान प्रयोगशालाओं' का संचालन अनिवार्य रूप से शुरू करने को कहा गया है.
विद्यालय कोष से खरीदे जाएंगे आवश्यक उपकरण
विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी विद्यालय में विज्ञान उपकरण अधूरे, क्षतिग्रस्त या निर्धारित मानक सूची के अनुरूप नहीं पाए जाते हैं, तो:
- विद्यालय में उपलब्ध विकास कोष से तुरंत नए उपकरणों की खरीद या मरम्मत कराई जाएगी.
- विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के पदेन सदस्य के रूप में प्रधानाध्यापक लैब की स्वच्छता, नियमित रखरखाव और उपकरणों को सुरक्षित रखने के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे.
- जिला स्तर पर इसकी नियमित समीक्षा होगी और प्रगति रिपोर्ट सीधे विभाग को भेजी जाएगी.
लापरवाही पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी
शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि प्रयोगशाला संचालन में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. निर्देशों की अनदेखी करने पर संबंधित हेडमास्टर और विज्ञान शिक्षकों के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) की जाएगी.
साथ ही, प्रयोगशालाओं को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले तकनीकी विशेषज्ञों, सीएसओ (CSO) और एनजीओ (NGO) का सहयोग लेने की भी छूट दी गई है.
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लेखक के बारे में
By सूरज कुमार गुप्ता
सूरज कुमार गुप्ता पिछले 25 वर्षों से प्रिंट मीडिया में एक्टिव है. वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत की. राजनीतिक व सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों पर पत्रकारिता करना इनकी रुचि में शामिल है. सामाजिक कार्यो में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2007 में इन्हें भारत सरकार की ओर से तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से सम्मानित किया था.
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