भारत में हर घंटे 59 सड़क हादसे, हादसों में सबसे ज्यादा मौतें उत्तर प्रदेश में

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सड़क हादसे की सांकेतिक तस्वीर

क्या आप भी सड़क पर रॉंग साइड में गाड़ी चलाने वालों से परेशान हैं? संसद में सरकार ने बताया कि देश में सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह रॉंग साइड में गाड़ी चलाना और लेन का पालन नहीं करना है. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने जानें लोकसभा में क्या दी जानकारी.

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संसद में सरकार ने बताया कि 2025 में तेज रफ्तार देश में सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजहों में रही. इस दौरान ओवरस्पीडिंग के कारण 82,124 सड़क दुर्घटनाएं हुईं. यानी देश में हुए कुल सड़क हादसों में करीब 16 फीसदी मामले तेज रफ्तार की वजह से थे. लोकसभा में नितिन गडकरी ने बताया कि गलत दिशा (रॉंग साइड) में गाड़ी चलाना और लेन नियमों का पालन नहीं करना 4,089 सड़क हादसों की वजह बना. इसके बाद रेड लाइट तोड़ने से 276 और ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल करने से 136 दुर्घटनाएं हुईं.

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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में भारत में सड़क हादसों की संख्या 5.3 फीसदी बढ़कर 5.13 लाख से ज्यादा हो गई. देश में औसतन हर घंटे करीब 59 सड़क हादसे हुए. यानी हर दिन बड़ी संख्या में दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें कई लोगों की जान चली गई और कई लोग घायल हुए.

गडकरी ने कहा, "साल 2025 में देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस विभागों ने कुल 5,13,563 सड़क हादसे दर्ज किए. इन दुर्घटनाओं में 1,83,382 लोगों की मौत हुई."

2025 में सबसे ज्यादा सड़क हादसे तमिलनाडु में

मंत्री ने बताया कि 2026 के पहले छह महीनों में देशभर में 2,85,770 सड़क हादसे दर्ज किए गए. ये आंकड़े राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस विभागों से मिले हैं. राज्यों की बात करें तो 2025 में सबसे ज्यादा सड़क हादसे तमिलनाडु में दर्ज किए गए, जहां 71,387 दुर्घटनाएं हुईं. वहीं, सड़क हादसों में सबसे ज्यादा मौतें उत्तर प्रदेश में हुईं. यहां दुर्घटनाओं में 27,550 लोगों की जान चली गई.

इलेक्ट्रिक गाड़ियों का खर्च कम आता है : नितिन गडकरी

एक अन्य सवाल के जवाब में नितिन गडकरी ने बताया कि पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियों की तुलना में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का खर्च कम आता है. उनसे धुआं भी नहीं निकलता. इसी वजह से देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि VAHAN के आंकड़ों के मुताबिक भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है. वित्त वर्ष 2019-20 में जहां देश में EV की हिस्सेदारी सिर्फ 0.71 फीसदी थी, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 8.26 फीसदी हो गई है.


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