Yes Bank संकट पर SBI चीफ की दो टूक : कहा, उसकी समस्या है, इसका Banking Sector से कोई लेना-देना नहीं

गुरुवार की रात से उपजी येस बैंक की समस्या को लेकर शुक्रवार को भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि यह समस्या पूरे बैंकिंग सेक्टर की नहीं है. यह समस्या केवल और केवल येस बैंक की ही है.
नयी दिल्ली : भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चेयरमैन रजनीश कुमार ने शुक्रवार को कहा कि येस बैंक (Yes Bank) की समस्या सिर्फ उससे जुड़ी है, यह पूरे बैंकिंग सेक्टर की समस्या नहीं है. कुमार यह बात रिजर्व बैंक की ओर से गुरुवार को येस बैंक पर रोक लगाने के एक दिन कही है. केंद्रीय बैंक ने निजी क्षेत्र के देश के चौथे सबसे बड़े बैंक येस बैंक के नया कर्ज बांटने, कर्ज पुनर्गठित करने और निवेश करने पर रोक के साथ-साथ उसके निदेशक मंडल को भी तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया. इसके अलावा, बैंक के ग्राहकों पर 50,000 रुपये महीने तक निकासी करने की पाबंदी लगायी है. गुरुवार देर शाम एसबीआई के निदेशक मंडल ने येस बैंक में निवेश अवसर तलाशने के लिए सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बैठक के बाद कुमार ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘रिजर्व बैंक ने कहा है कि वह येस बैंक के लिए एक पुनर्गठन योजना लेकर आएंगे.’ उन्होंने कहा कि येस बैंक के मुद्दे का समाधान ‘बहुत जल्द’ हो जाएगा. कुमार ने कहा, ‘यह बैंकिंग क्षेत्र की दिक्कत नहीं है. यह सिर्फ बैंक से जुड़ी (Yes Bank) दिक्कत है.’ येस बैंक में एसबीआई के हिस्सेदारी खरीदने पर उन्होंने कहा कि बैंक को ऐसा करने की सैद्धांतिक मंजूरी पहले ही मिल चुकी है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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