आरबीआई ने किसानों को दिया नए साल का तोहफा, बिना किसी गारंटी के मिलेगा दो लाख का लोन

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास
RBI ने शुक्रवार को देश के लाखों किसानों को बढ़ती महंगाई से राहत दिलाने के लिए बिना किसी गारंटी के लोन की सीमा को बढ़ा दिया है. केंद्रीय बैंक के इस कदम से बैंक से कर्ज लेने वाले छोटे और सीमांत किसानों का दायरा बढ़ेगा. इसके साथ ही, बैंकों के पास पूंजी भी आएगी.
RBI: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार 6 दिसंबर 2024 को देश के लाखों किसानों को नए साल 2025 का तोहफा दिया है. केंद्रीय बैंक ने किसानों के लिए कोलैटरल फ्री लोन की सीमा को बढ़ाने का ऐलान किया है. कोलैटरल फ्री लोन का मतलब संपत्ति गिरवी रखे बिना बैंकों की ओर से दिया जाने वाला कर्ज से है. आरबीआई के इस ऐलान के बाद देश के सरकारी और प्राइवेट बैंक किसी भी किसान को संपत्ति गिरवी रखे बिना या बिना किसी गारंटी कम से कम दो लाख रुपये तक का लोन दे सकते हैं.
बढ़ती महंगाई से किसानों को मिलेगी राहत
आरबीआई ने बढ़ती महंगाई से किसानों को राहत देने के मकसद से बिना गारंटी के अब दो लाख रुपये तक का कर्ज उपलब्ध कराने का ऐलान किया है. अभी यह सीमा 1.6 लाख रुपये है. आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समीक्षा की जानकारी देते हुए बुधवार को कहा कि महंगाई और कृषि में उपयोग होने वाले कच्चे माल की लागत में वृद्धि को देखते हुए गारंटी मुक्त कृषि लोन की सीमा को 1.6 लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये करने का निर्णय किया गया है.
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सर्कुलर जल्द जारी करेगा आरबीआई
गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि इससे बैंकों से कर्ज लेने को लेकर छोटे और सीमांत किसानों का दायरा बढ़ेगा. आरबीआई ने 2010 में कृषि क्षेत्र को बिना किसी गारंटी के एक लाख रुपये देने की सीमा तय की थी. 2019 में इसे बढ़ाकर 1.6 लाख रुपये कर दिया गया था. आरबीआई ने कहा कि इस संबंध में सर्कुलर जल्द ही जारी किया जाएगा.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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