मैन्युफैक्चरिंग के मोर्चे पर झटका, दिसंबर 2024 में 12 महीने के निचले स्तर पर पहुंची वृद्धि दर
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 02 Jan 2025 2:44 PM
दिसंबर में मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 12 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा.
Manufacturing PMI: दिसंबर 2024 में भारत के विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर में मामूली गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन यह अभी भी विस्तार के क्षेत्र में है. नए ऑर्डर और उत्पादन की धीमी गति के बावजूद विनिर्माताओं का भविष्य के प्रति आशावाद बना हुआ है. हालांकि, बढ़ती लागत और प्रतिस्पर्धी दबावों के चलते चुनौतियां बरकरार हैं.
Manufacturing PMI: भारत की अर्थव्यवस्था को मैन्युफैक्चरिंग के मोर्चे पपर झटका लगा है. दिसंबर 2024 में भारत के मैन्युफैक्टचर सेक्टर की वृद्धि दर घटकर 12 महीने के निचले स्तर 56.4 अंक पर आ गई, जो नवंबर में 56.5 अंक थी. यह गिरावट नए ऑर्डर और प्रोडक्शन की गति धीमी हसेपे के कारण हुई है. हालांकि, यह आंकड़ा अभी भी 50 से ऊपर है, जो उत्पादन गतिविधियों में विस्तार की ओर इशारा करता है.
क्या होता है विनिर्माण पीएमआई
मैन्युफैक्चरिंग प्राइस मैनेजमेंट इंडेक्स (पीएमआई) 50 से ऊपर होने पर उत्पादन गतिविधियों में विस्तार और 50 से नीचे होने पर उत्पादन गतिविधियां घटने का संकेत है. दिसंबर में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का पीएमआई का 56.4 पर रहने का मतलब परिचालन स्थितियों में कमजोर सुधार है, लेकिन यह अभी भी अपने दीर्घकालिक औसत 54.1 से ऊपर है. यह इसकी मजबूत वृद्धि दर को दर्शाता है.
मैन्युफैक्चरिंग की वृद्धि में गिरावट के क्या हैं कारण
एचएसबीसी की अर्थशास्त्री इनेस लैम के अनुसार, भारत की विनिर्माण गतिविधि ने 2024 में एक मजबूत वर्ष का समापन किया, लेकिन औद्योगिक क्षेत्र में मंदी के संकेत मिले हैं. नए ऑर्डर में विस्तार की दर इस साल सबसे धीमी रही, जो भविष्य में उत्पादन में कमजोर वृद्धि का संकेत देती है. मैन्युफैचरिंग सेक्टर में गिरावट आने का दूसरा कारण कीमतों में बढ़ोतरी भी है. नवंबर से कंटेनर, विनिर्माण सामग्री और श्रम लागत में वृद्धि के कारण भारतीय विनिर्माताओं ने समूचे खर्च में बढ़ोतरी दर्ज की है. हालांकि, मासिक आधार पर कच्चे माल की मूल्य मुद्रास्फीति की दर ऐतिहासिक मानकों के अनुसार मध्यम रही है.
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भविष्य की क्या हैं संभावनाएं
भारतीय विनिर्माता 2025 में वृद्धि को लेकर आश्वस्त हैं. एक सर्वेक्षण के अनुसार, निवेश और अनुकूल मांग में सकारात्मकता दिख रही है. फिर भी, मुद्रास्फीति और प्रतिस्पर्धी दबावों को लेकर चिंताओं ने धारणाओं को प्रभावित किया है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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