अनाज-पानी के साथ शराब की भी हो सकती है होम डिलीवरी, अगर सरकार ने मान ली वाइन इंडस्ट्री की ये बात...

शराब निर्माता उद्योग ने सरकार से ऑनलाइन बिक्री तथा धीरे-धीरे दुकानों को खोले जाने की मंजूरी देने की मांग की है.
नयी दिल्ली : शराब निर्माता उद्योग ने सरकार से ऑनलाइन बिक्री तथा धीरे-धीरे दुकानों को खोले जाने की मंजूरी देने की मांग की है. उद्योग जगत का कहना है कि लॉकडाउन के कारण शराब उद्योग को वित्तीय दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है तथा लोगों की नौकरियां जा रही हैं. शराब बनाने वाली कंपनियों के संगठन ‘कंफेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज’ ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री को पत्र लिखकर कहा कि जब से लॉकडाउन लागू हुआ है, शराब का थोक और खुदरा व्यापार ठप हो गया है. उसने कहा कि हम यह मांग करते हैं कि कोविड-19 की रोकथाम के दिशानिर्देशों पर अमल की शर्त के साथ शराब उद्योग को तत्काल धीरे-धीरे खोला जाए.
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बता दें कि देश में कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए 21 दिन का लॉकडाउन (बंद) लागू है. यह बंद फिलहाल 14 अप्रैल तक लागू है. संगठन ने कहा कि शराब की आपूर्ति करने वाले ट्रक रास्ते में फंसे हुए हैं, वितरण करने वाले गोदाम बंद पड़े हैं तथा खुदरा दुकानों में भंडार अटका हुआ है.
40 लाख किसानों की आजीविका प्रभावित : संगठन के महानिदेशक विनोद गिरी ने कहा कि यह उद्योग विभिन्न करों के जरिये करीब दो लाख करोड़ रुपये का राजस्व देता है. इससे करीब 40 लाख किसानों की आजीविका भी इससे जुड़ी है. मौजूदा खराब हालात में भी यह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीके करीब 20 लाख लोगों को रोजगार दिए हुए है. गिरी ने आबकारी वर्ष को तीन महीने बढ़ाकर 30 जून तक करने तथा शराब की ऑनलाइन बिक्री की मंजूरी देने की भी मांग की.
लाखों लोगों के रोजगार पर लटक रही तलवार : उन्होंने कहा कि शराब उद्योग की दिक्कतें इस बात से बढ़ जाती हैं कि अधिकांश राज्यों में आबकारी नीति की समयसीमा 31 मार्च तक की होती है. शराब कंपनियों को परिचालन जारी रखने के लिए इससे पहले कई विधायी शर्तों को पूरा करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि यदि लॉकडाउन लंबा खिंचा, तो शराब कंपनियों को न सिर्फ भारी आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि लाखों लोग बेरोजगार भी हो जाएंगे.
सारी शर्तों को मानने को तैयार : उन्होंने कहा कि दुकानों को ऑनलाइन आवेदन के जरिये होम डिलिवरी के लिए रजिस्ट्रेशन कराने को कहा जाना चाहिए. सरकार इसके लिए लाइसेंस शुल्क के अलावा अलग से शुल्क ले सकती है. हर पात्र दुकानों को होम डिलिवरी के लिए तीन-चार कर्फ्यू पास दिये जाने चाहिए. गिरी ने कहा कि उपभोक्ता फोन से ऑर्डर दे सकते हैं. उम्र के लिए पहचान पत्र मांगा जा सकता है. सरकार डिलिवरी पर मात्रा की सीमाएं तय कर सकती है और यह भी तय किया जा सकता है कि एक व्यक्ति को किसी समयसीमा के भीतर कितनी बार डिलिवरी की जा सकती है.
ऐसे की जा सकती है होम डिलीवरी : उन्होंने कहा कि लोगों का आपस में दूरी बनाये रखना अब सामाजिक जीवन का नया अंग हो जाने वाला है. ऐसे में सरकार शराब की होम डिलिवरी पर निगरानी के लिए अलग से प्रशासनिक व्यवस्था बना सकती है. इसके लिए सरकार अपना पोर्टल बनाने पर भी विचार कर सकती है. तैयार खाद्य पदार्थों की होम डिलिवरी करने वाले सेवा प्रदाताओं की भी मदद ली जा सकती है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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