750 मिलियन डॉलर बॉन्ड केस में अदाणी का जवाब: ‘अमेरिका से कोई लेना-देना नहीं’

गौतम अदाणी (फोटो/Wikipedia)
Adani US Court Fraud Case: अदाणी ग्रुप ने न्यूयॉर्क कोर्ट में प्री-मोशन लेटर दाखिल कर SEC के फ्रॉड केस को खारिज करने की मांग की है. वकीलों की दलील है कि 750 मिलियन डॉलर की बॉन्ड बिक्री भारत में हुई थी और इसमें कोई ‘घरेलू अमेरिकी लेनदेन’ शामिल नहीं था.
Adani US Court Fraud Case: गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी ने अमेरिकी सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) द्वारा दायर सिविल फ्रॉड के मुकदमे को चुनौती दी है. न्यूयॉर्क की अदालत में दाखिल अपनी याचिका में उन्होंने तर्क दिया है कि जिस बॉन्ड डील को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उसका अमेरिका से कोई सीधा कानूनी संबंध नहीं है. उन्होंने इन आरोपों को ‘बेबुनियाद’ और ‘कानूनी रूप से कमजोर’ बताया है.
अदाणी ग्रुप की 3 प्रमुख कानूनी दलीलें
- अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) की चुनौती: अदाणी के वकीलों ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिकी कानून देश की सीमा से बाहर (Extraterritorial) लागू नहीं किए जा सकते. उन्होंने तर्क दिया कि बॉन्ड जारी करने वाली कंपनी भारतीय है, वह अमेरिका में लिस्टेड नहीं है और पूरी प्रक्रिया भारत में हुई है, इसलिए SEC का हस्तक्षेप गलत है.
- बॉन्ड डील और निवेशकों का भुगतान: अदाणी पक्ष के मुताबिक, 750 मिलियन डॉलर (करीब ₹6,300 करोड़) के बॉन्ड की बिक्री गैर-अमेरिकी अंडरराइटर्स को की गई थी. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन बॉन्ड्स की मैच्योरिटी 2024 में पूरी हो चुकी है और सभी निवेशकों को उनके निवेश पर पूरा ब्याज और मूलधन वापस कर दिया गया है. SEC यह बताने में विफल रहा है कि किसी निवेशक को कोई वित्तीय नुकसान हुआ है.
- आरोपों में तथ्य की कमी: वकीलों का कहना है कि SEC की शिकायत में ऐसा कोई ठोस आरोप नहीं है कि गौतम अदाणी ने व्यक्तिगत रूप से इस इश्यू को मंजूरी दी थी या अमेरिकी निवेशकों को प्रभावित करने वाली किसी बैठक में हिस्सा लिया था. उन्होंने रिश्वतखोरी के दावों को पूरी तरह कल्पना मात्र बताया है.
बाजार पर असर
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदाणी ग्रुप का यह आक्रामक रुख निवेशकों के भरोसे को बहाल करने की एक कोशिश है. यदि अदालत अधिकार क्षेत्र की दलील को स्वीकार कर लेती है, तो यह अदाणी ग्रुप के लिए एक बड़ी वैश्विक जीत होगी. फिलहाल, बाजार की नजरें 30 अप्रैल को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं.
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By Abhishek Pandey
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