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Explainer : 'गायब' टमाटर का 'नायाब खेल'! मोबाइल वैन, पेटीएम-पिनकोड और ई-कॉमर्स कंपनियों से सेल

Updated at : 18 Aug 2023 9:11 AM (IST)
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Explainer : 'गायब' टमाटर का 'नायाब खेल'! मोबाइल वैन, पेटीएम-पिनकोड और ई-कॉमर्स कंपनियों से सेल

मैजिकपिन ने दावा किया है कि अबतक उसने केवल चार सप्ताह में दिल्ली-एनसीआर और उसके आसपास 90 से अधिक पिन कोड पर 70 रुपये किलो की दर पर 40,000 किलो टमाटर के करीब 20,000 ऑर्डर के लिए डिलिवरी की है. कंपनी का दावा है कि उसकी इस कवायद के बाद अब दिल्ली-एनसीआर में टमाटर की बिक्री 50 रुपये किलो दर पर की जाएगी.

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नई दिल्ली : आम आदमी की थाली, होटलों-रेस्तराओं-ढाबों की टेबल और बर्गर के बीच से गायब हो गए टमाटर को लेकर गजब का खेल खेला जा रहा है. देश में प्री-मानसून की बारिश शुरू होते ही सब्जी मंडियों पर नजर गड़ाए मुनाफाखोरों की बुरी नजर इस बार प्याज के बजाय टमाटर पर पड़ गई और इसकी कीमत माउंट एवरेस्ट पर चढ़कर भांगड़ा करने लगी. इसी का नतीजा रहा कि खुदरा सब्जी मंडियों में इसकी कीमत 200 रुपये के पार पहुंच गई. जब टमाटर को लेकर बाजार में हाहाकार मचने के साथ देश में राजनीति गरमा गई, तब सरकार हरकत में आई और उसने भारतीय राष्ट्रीय विपणन संघ (नेफेड) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (एनसीसीएफ) को देश के खासमखास राज्यों के चुनिंदा स्थानों पर मोबाइल वैन के जरिए सस्ता टमाटर बेचने का निर्देश दिया. इन दोनों सरकारी संस्थानों ने मोबाइल वैन के जरिए घरेलू जरूरतों को पूरा करने की खातिर नेपाल से करीब 10 टन टमाटर का आयात किया, जिसकी बिक्री उत्तर प्रदेश के चुनिंदा स्थानों में की गई. अब जबकि सस्ता टमाटर बेचने को लेकर सरकार की ओर से कवायद शुरू की गई, तो प्राइवेट कंपनियों की भी बांछें खिल गई और खबर है कि कुछ ई-कॉमर्स कंपनियां एनसीसीएफ की मदद से मोबाइल ऐप पेटीएम और पिनकोड के जरिए घरेलू उपभोक्ताओं को 50 रुपये किलो टमाटर देने का दावा कर रही हैं. आइए, जानते हैं कि फिलहाल माउंट एवरेस्ट से उतरकर गंगोत्री में डुबकी लगा खुद को पाक-साफ कर रहे टमाटर की कीमतों को कम करने के लिए देश में किस-किस प्रकार की कवायद की जा रही है?

ई-कॉमर्स कंपनी मैजिकपिन दिल्ली-एनसीआर में बेच रही सस्ता टमाटर

समाचार एजेंसी भाषा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाइपरलोकल ई-कॉमर्स कंपनी मैजिकपिन भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (एनसीसीएफ) के सहयोग से चुनिंदा ऑनलाइन ऐप मसलन पेटीएम और पिनकोड के जरिये 50 रुपये किलो की दर से टमाटर की बिक्री करेगी. मैजिकपिन ने गुरुवार को दावा किया है कि अबतक उसने केवल चार सप्ताह में दिल्ली-एनसीआर और उसके आसपास 90 से अधिक पिन कोड पर 70 रुपये किलो की दर पर 40,000 किलो टमाटर के करीब 20,000 ऑर्डर के लिए डिलिवरी की है. कंपनी का दावा है कि उसकी इस कवायद के बाद अब दिल्ली-एनसीआर में टमाटर की बिक्री 50 रुपये किलो दर पर की जाएगी.

मैजिकपिन एनसीसीएफ और ओएनडीसी के साथ मिलाया हाथ

मैजिकपिन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और सह-संस्थापक अंशु शर्मा का दावा है कि दामों में ताजा कटौती के बाद टमाटर कीमत 50 रुपये किलो हो जाने से उपभोक्ताओं को और अधिक फायदा होगा. हम एनसीसीएफ और ओएनडीसी की पहल के साथ हाथ मिला रहे हैं और इसकी सफलता में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

हफ्ते में दो किलो टमाटर देने का ऑफर

मैजिकपिन के सीईओ अंशु शर्मा का दावा यह भी है कि उनकी कंपनी बिना किसी डिलिवरी चार्ज के अपने यूजर्स को हर हफ्ते अधिक से अधिक दो किलो टमाटर मुहैया कराने का ऑफर दे रही है. कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि एनसीसीएफ और नेफेड ने पूरी दिल्ली में 70 स्थानों और नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 15 स्थानों पर अपनी मोबाइल वैन तैनात करके खुदरा उपभोक्ताओं को टमाटर की आपूर्ति की मात्रा में काफी वृद्धि की है. इसमें कहा गया है कि इस साझेदारी के साथ ओएनडीसी पर सबसे बड़े विक्रेता ऐप के रूप में मैजिकपिन उपभोक्ताओं की समस्याओं को कम करने के लिए टमाटर की ऑनलाइन बिक्री को अंजाम दे रही है.

होटलों और रेस्तराओं से टमाटर की छुट्टी

भारत में टमाटर की बढ़ती कीमतों से होटलों और रेस्तराओं के लजीज व्यंजनों जायका खराब हो गया है. आलम यह है कि शहरी क्षेत्रों में आम आदमी के बीच प्रचलित बर्गर से टमाटर गायब हो गया है. देश में करीब 400 से अधिक रेस्तराओं का संचालन करने वाले बर्गर किंग ने टमाटर की बढ़ती कीमतों के बीच खाने में इस सब्जी का इस्तेमाल बंद कर दिया है. इतना ही नहीं, इससे पहले मैकडॉनल्ड्स और सबवे जैसी कंपनियों ने भी अपने व्यंजनों से टमाटर की छुट्टी कर दी है. सबसे बड़ी बात यह है कि टमाटर की बेकाबू हुई कीमतों को कंट्रोल करने के लिए सरकार को नेपाल से टमाटर का आयात करना पड़ रहा है. खबर है कि सरकार की ओर से निर्देश मिलने के बाद भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ (एनसीसीएफ) ने नेपाल से करीब 10 टन टमाटर का आयात किया है, जिसकी अंतिम खेप बुधवार की देर रात उत्तर प्रदेश के कई शहरी इलाकों में भेजी गई है, ताकि को मोबाइल वैन के जरिए नेपाल से मंगाए गए टमाटर को 50 रुपये प्रति किलो की दर से उपभोक्ताओं के बीच बेचा जा सके.

बर्गर किंग ने टमाटर का इस्तेमाल किया बंद

चौंकाने वाली बात यह है कि बर्गर और खाने का अन्य सामान बेचने वाली कंपनी बर्गर किंग ने टमाटर की बढ़ती कीमतों के बीच अपने खाने में इस सब्जी का इस्तेमाल बंद कर दिया है. इसके साथ ही वह रेस्तरा चलाने वाली मैकडॉनल्ड्स और सबवे जैसी कंपनियों की लिस्ट में शामिल हो गई है. ‘रेस्टूरेन्ट ब्रांड्स एशिया’ की ओर से भारत में करीब 400 रेस्टूरेंट का संचालन करने वाली बर्गर किंग ने अपनी वेबसाइट पर एक मैसेज में अपने भोजन से टमाटर हटाने के कारणों के रूप में ‘गुणवत्ता’ और ‘आपूर्ति’ जैसी समस्या का हवाला दिया है.

भोजन में टमाटर शामिल करने में हैं असमर्थ

बर्गर किंग के मैसेज में कहा गया है कि रेस्टूरेंट ब्रांड्स एशिया लिमिटेड में गुणवत्ता के बहुत ऊंचे मानक हैं, क्योंकि हम वास्तविक और प्रामाणिक भोजन परोसने में विश्वास करते हैं. टमाटर की फसल की गुणवत्ता और आपूर्ति के संदर्भ में अनश्चितता रहने के कारण, हम अपने भोजन में टमाटर शामिल करने में असमर्थ हैं. निश्चिंत रहें, हम जल्द ही टमाटर लेकर वापस आएंगे. कंपनी ने ग्राहकों से इस स्थिति के लिए ‘धैर्य’ बनाए रखने का अनुरोध किया है.

टमाटर को भी छुट्टी की जरूरत

कुछ बर्गर किंग इंडिया सप्लाई सेंटर्स ने कथित तौर पर कुछ हास्य के साथ एक नोटिस लगाया है, जिसमें कहा गया है, ‘‘यहां तक कि टमाटर को भी छुट्टी की जरूरत है… हम अपने भोजन में टमाटर शामिल करने में असमर्थ हैं.

खुदरा बाजार में टमाटर 200 रुपये किलो

भारी बारिश के कारण आपूर्ति बाधित होने के बीच देश के कुछ हिस्सों में टमाटर की खुदरा कीमत 200 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है. इससे सरकार को पहली बार टमाटर आयात करने पर मजबूर होना पड़ा है. भारत फिलहाल नेपाल से टमाटर आयात कर रहा है. पिछले हफ्ते, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बताया कि घरेलू बाजार में कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि के बीच भारत ने नेपाल से टमाटर का आयात शुरू कर दिया है.

मैकडॉनल्ड्स और सबवे में टमाटर का इस्तेमाल बंद

जुलाई में फास्ट फूड चेन मैकडॉनल्ड्स ने कहा था कि उसने गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की अनुपलब्धता के कारण,देश के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में अधिकतर दुकानों में अपने खाने के सामान में टमाटर का इस्तेमाल बंद कर दिया है. उसके बाद, सबवे इंडिया ने भी प्रमुख शहरों में बढ़ती कीमतों की स्थिति से निपटने के लिए टमाटर का इस्तेमला बंद करने की सूचना दी थी.

नेपाल से मंगाया जा रहा टमाटर

भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ मर्यादित (एनसीसीएफ) ने बुधवार को जानकारी दी है कि नेपाल से आने वाली टमाटर की खेप की उत्तर प्रदेश में बिक्री की जाएगी. एनसीसीएफ ने नेपाल से 10 टन टमाटर के आयात का अनुबंध किया है. एनसीसीएफ आयात के साथ-साथ केंद्र सरकार की ओर से टमाटर की घरेलू खरीद भी कर रही है और उपभोक्ताओं को इसकी बिक्री रियायती दर पर कर रही है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के निर्देश के बाद एनसीसीएफ खुदरा स्तर पर ‘हस्तक्षेप’ कर रही है.

10 टन टमाटर का आयात

एनसीसीएफ की प्रबंध निदेशक एनीस जोसेफ चंद्रा ने कहा कि हमने नेपाल से 10 टन टमाटर आयात का अनुबंध किया है. इसमें से 3-4 टन मंगलवार को उत्तर प्रदेश में वितरित किया गया और करीब पांच टन टमाटर अभी रास्ते में है. इसकी बिक्री गुरुवार को उत्तर प्रदेश में की जाएगी. उन्होंने कहा कि टमाटर जल्दी खराब हो जाता है. इस वजह से देश के अन्य हिस्सों में इसकी बिक्री नहीं की जा सकती है.

Also Read: Explainer : होटलों और रेस्टूरेंटों से टमाटर की छुट्टी, बर्गर से पलायन

मोबाइल वैन से की जा रही टमाटर की बिक्री

एनीस जोसेफ चंद्रा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आयातित और स्थानीय रूप से खरीदे गए टमाटर को खुदरा दुकानों के साथ-साथ चुनिंदा स्थानों पर मोबाइल वैन के माध्यम से बेचा जा रहा है. उन्होंने कहा कि दिल्ली-एनसीआर और राजस्थान में देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों से खरीदा गया टमाटर 50 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर बेचा जा रहा है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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