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Economic Survey: वित्त वर्ष 2024-25 में 6.3% से 6.8% के बीच रहेगी भारत की जीडीपी वृद्धि, पढ़ें प्रमुख बातें

Updated at : 31 Jan 2025 2:27 PM (IST)
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Budget Session of Parliament

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण. फोटो साभार: निर्मला सीतारमण

Economic Survey: आर्थिक समीक्षा मुख्य आर्थिक सलाहकार की देखरेख में वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के विभाग का आर्थिक प्रकोष्ठ तैयार करता है. पहली आर्थिक समीक्षा 1950-51 में पेश की गयी थी. उस समय यह बजट दस्तावेज का हिस्सा होती थी.

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Economic Survey: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार 31 जनवरी 2025 को संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में वित्तीय वर्ष 2024-25 के आर्थिक सर्वेक्षण को पेश कर दिया है. संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में भारत की अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है. इसमें कहा गया है कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.3 से 6.8 के बीच रहने का अनुमान है. आइए, इससे जुड़ी प्रमुख बातों के बारे में जानते हैं.

आर्थिक सर्वेक्षण की प्रमुख बातें

  • आर्थिक वृद्धि दर: आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.3 से 6.8 के बीच रहने का अनुमान है.
  • अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत: आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, मजबूत बाहरी खाता और स्थिर निजी खपत के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है. इसमें कहा गया है कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतिक, सूझ-बूझ और नीतिगत प्रबंधन के साथ घरेलू बुनियाद को और मजबूत करने की जरूरत होगी.
  • निवेश में तेजी आने की उम्मीद: आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि सरकारी खर्च में बढ़ोतरी होने और बेहतर होती कारोबारी उम्मीदों से निवेश गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है.
  • आर्थिक वृद्धि की बाधाएं: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की आर्थिक संभावनाएं संतुलित हैं. भू-राजनीतिक और व्यापार अनिश्चितताएं आर्थिक वृद्धि की राह की प्रमुख बाधाएं हैं.
  • महंगाई दर में कमी: वित्त वर्ष 2023-24 में महंगाई दर 5.4% रही, जो पिछले वर्ष 6.7% थी. आर्थिक सवेक्षण में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में खाद्य महंगाई के नरम पड़ने की संभावना है. सब्जियों की कीमतों में गिरावट और खरीफ फसलों की आवक से महंगाई को कम करने में मदद मिलेगी.
  • महंगाई का जोखिम: वित्त वर्ष 2025-26 में वस्तुओं की ऊंची कीमतों से महंगाई का जोखिम सीमित लगता है. भू-राजनीतिक दबाव अब भी जोखिम पैदा कर रहा है.
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा बेहतर करने की जरूरत: भारत को जमीनी स्तर के संरचनात्मक सुधारों और नियमन को शिथिल करते हुए अपनी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बेहतर करने की जरूरत है.
  • तकनीकी दुरुपयोग: एआई के लिए उचित शासन ढांचे की कमी से तकनीकी का दुरुपयोग होने की आशंका बनी हुई है.
  • दिवाला कानून: दिवाला कानून के निवारक प्रभाव ने हजारों देनदारों को शुरुआती चरण में ही संकट से बाहर निकलने में मदद की.

इसे भी पढ़ें: Economic Survey: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में पेश किया आर्थिक सर्वेक्षण

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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