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Budget 2025: एसआईपी और म्यूचुअल फंड जाएंगे भूल, बजट में फिक्स्ड डिपॉजिट पर तगड़ा बेनिफिट दे सकती है सरकार

Updated at : 03 Jan 2025 11:33 AM (IST)
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Budget 2025

बजट के लिए वित्तीय संस्थानों और बैंकों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सुझाव दिए.

Budget 2025: वित्त वर्ष 2025-26 के बजट के लिए देश के वित्तीय संस्थानों और बैंकों ने सरकार को कुछ अहम सुझाव दिए हैं. इन सुझावों का उद्देश्य लोगों को अधिक बचत करने और लंबे समय तक निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना है.

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Budget 2025: अपने जीवन की गाढ़ी कमाई से बंपर रिटर्न पाने के लिए एसआईपी के जरिए म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए एक जरूरी खबर है. 1 फरवरी 2025 को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए संसद में पेश होने वाले बजट में सरकार फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit) पर तगड़ा बेनिफिट दे सकती है. इसके बाद आप एसआईपी और म्यूचुअल फंड में पैसा निवेश करना भूल जाएंगे.

वित्तीय संस्थानों और बैंकों ने सरकार को दिया सुझाव

वित्त वर्ष 2025-26 के बजट के लिए देश के वित्तीय संस्थानों और बैंकों ने सरकार को कुछ अहम सुझाव दिए हैं. इन सुझावों का उद्देश्य लोगों को अधिक बचत करने और लंबे समय तक निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना है. खासतौर पर, फिक्स्ड डिपॉजिट पर टैक्स बेनिफिट देने की बात कही गई है, जिससे लोग अपनी बचत को सुरक्षित और आकर्षक मान सकें.

बजट में बचत पर हो सकता है जोर

हाल के दिनों में बचत में गिरावट देखने को मिली है. इस समस्या का समाधान करने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की है. इसमें सुझाव दिया गया कि अगर फिक्स्ड डिपॉजिट पर टैक्स छूट मिले, तो लोग इसमें अधिक निवेश करेंगे.

निवेश को मिलेगा बढ़ावा

एडलवाइस म्यूचुअल फंड की सीईओ राधिका गुप्ता ने वित्त मंत्री की बैठक के बाद बताया कि पूंजी बाजार को मजबूत बनाने, बॉन्ड और इक्विटी जैसे लॉन्गटर्म निवेश को प्रोत्साहित करने की सिफारिश की गई. इससे निवेशकों को बेहतर रिटर्न और सुरक्षित निवेश विकल्प मिलेंगे.

ग्रीन फाइनेंस के लिए नियमों में हो सकता है बदलाव

एनबीएफसी सेक्टर ने ग्रीन फाइनेंस (Green Finance) और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए विशेष रीफाइनेंस फैसिलिटी की मांग की है. एफआईडीसी (वित्त उद्योग विकास परिषद) के निदेशक रमन अग्रवाल ने कहा कि छोटे एनबीएफसी को लाभ पहुंचाने के लिए सरफेसी अधिनियम की सीमा 20 लाख रुपये से घटाने की सिफारिश की गई. इसके अलावा, नॉन-इंडीविजुल उधारकर्ता पर टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) हटाने का सुझाव दिया गया, क्योंकि इससे सरकार को अतिरिक्त राजस्व नहीं मिलता. एमएसएमई, छोटे उधारकर्ताओं और पर्यावरण-अनुकूल परियोजनाओं के लिए सिडबी और नाबार्ड जैसे संगठनों के जरिए विशेष फंड स्थापित करने का प्रस्ताव दिया गया.

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एलटीसीजीटी को फिक्स्ड डिपॉजिट के साथ लिंक करने का प्रस्ताव

बैंकों ने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (Long-Term Capital Gains Tax) को फिक्स्ड डिपॉजिट के साथ लिंक की सिफारिश की है. वर्तमान में, फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाले ब्याज पर आयकर लगाया जाता है, जिससे लोग इसे बचत के एक विकल्प के रूप में अपनाने से हिचकिचाते हैं. टैक्स में छूट मिलने से यह एक अधिक आकर्षक विकल्प बन सकता है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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