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यूपीआई पर टूट पड़े लोग, एक झटके में बना दिया रिकॉर्ड

Updated at : 03 Jan 2025 10:33 AM (IST)
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UPI Transactions

दिसंबर में यूपीआई पेमेंट में बाढ़ आ गई.

UPI Transactions: यूपीआई ने भारत में डिजिटल पेमेंट को नया आयाम दिया है. दिसंबर 2024 में यूपीआई लेनदेन की संख्या और मूल्य दोनों में जोरदार वृद्धि हुई. एनपीसीआई और यूपीआई की भूमिका ने डिजिटल लेनदेन को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया है.

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UPI Transactions: साल 2024 के दिसंबर महीने में भारत के लोग डिजिटल पेमेंट करने के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) पर टूट पड़े. लोगों ने इसके जरिए पैसों का इतना अधिक ट्रांजेक्शन किया कि एक रिकॉर्ड बन गया. भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2024 में यूपीआई के जरिए लेनदेन की संख्या दिसंबर 2024 में 8% बढ़कर रिकॉर्ड 16.73 अरब हो गई. यह बढ़ोतरी भारत में डिजिटल पेमेंट सिस्टम की बढ़ती लोकप्रियता और सुविधा को दर्शाती है.

यूपीआई पेमेंट में ग्रोथ

नवंबर 2024 में यूपीआई लेनदेन की संख्या 15.48 अरब थी. दिसंबर में कुल लेनदेन का मूल्य 23.25 लाख करोड़ रुपये रहा, जो नवंबर में 21.55 लाख करोड़ रुपये था. लोग यूपीआई के जरिए बड़े पैमाने पर लेनदेन कर रहे हैं, जिससे इसका महत्व बढ़ता जा रहा है.

यूपीआई के जरिए रोजाना औसत लेनदेन

दिसंबर 2024 में रोजाना औसतन 53.97 करोड़ लेनदेन हुए. नवंबर 2024 में यह आंकड़ा 51.1 करोड़ था. रोजाना लेनदेन का औसत मूल्य दिसंबर में 74,990 करोड़ रुपये था. नवंबर में यह 71,840 करोड़ रुपये था. दिसंबर में न केवल यूपीआई लेनदेन की संख्या में बल्कि इसके मूल्य में भी महत्वपूर्ण बढ़ोतरी दर्ज की गई.

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यूपीआई का कहां-कहां होता है इस्तेमाल

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) भारत में डिजिटल लेनदेन की देखरेख करता है. एनपीसीआई यूपीआई का संचालन करता है, जो डिजिटल पेमेंट का एक सुरक्षित और विश्वसनीय माध्यम है. यूपीआई की मदद से लोग आपस में पैसे भेजते हैं, दुकानों पर भुगतान करते हैं और बिलों का निपटान करते हैं. यह प्रक्रिया न केवल तेज और आसान है, बल्कि यह नकद लेनदेन पर निर्भरता को भी कम करती है.

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यूपीआई का भारत में तेजी से बढ़ रहा चलन

भारत में डिजिटल भुगतान का चलन तेजी से बढ़ रहा है. यह न केवल बड़े शहरों में बल्कि छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोकप्रिय हो रहा है. यूपीआई ने भारत को एक कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में अग्रसर किया है. इसके इस्तेमाल से समय की बचत होती है और यह प्रक्रिया पारदर्शी और सुरक्षित है. इससे लेनदेन करना हर किसी के लिए सरल और सुलभ हो गया है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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