टल गया अडाणी ग्रुप का संकट! रेटिंग एजेंसियों, बैंकों और विदेशी साझेदारों ने ऐसे दिया सहारा

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :04 Feb 2023 12:03 PM (IST)
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टल गया अडाणी ग्रुप का संकट! रेटिंग एजेंसियों, बैंकों और विदेशी साझेदारों ने ऐसे दिया सहारा

अमेरिकी रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने शुक्रवार को अडाणी पोर्ट्स और अडाणी इलेक्ट्रिसटी की साख को बरकरार रखते हुए दोनों कंपनियों के परिदृश्य को स्थिर से नकारात्मक डाल दिया. हिंडनबर्ग रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में अडाणी ग्रुप में कंपनी संचालन के स्तर पर काफी गड़बड़ी का आरोप लगाया है.

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नई दिल्ली : अडाणी ग्रुप पर मंडराने वाला संकट अब टलता हुआ नजर आ रहा है. अमेरिकी शॉर्ट सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद अडाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में मची उथल-पुथल के बाद रेटिंग एजेंसियों, बैंकों और उसके साझेदारों ने जबरदस्त तरीके से सहारा दिया है. इन सबके साथ आने के बाद अडाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में जारी गिरावट शुक्रवार की शाम तक अचानक थम गई और फिर वे स्थिर हो गए. शुक्रवार के कारोबार के दौरान अडाणी ग्रुप की कुछ कंपनियों के शेयरों में लोअर सर्किट तक लगने की नौबत आ गई थी.

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने साख रखा बरकरार

मीडिया की खबरों के अनुसार, अमेरिकी रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने शुक्रवार को अडाणी पोर्ट्स और अडाणी इलेक्ट्रिसटी की साख को बरकरार रखते हुए दोनों कंपनियों के परिदृश्य को स्थिर से नकारात्मक डाल दिया. हिंडनबर्ग रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में अडाणी ग्रुप में कंपनी संचालन के स्तर पर काफी गड़बड़ी का आरोप लगाया है. इस रिपोर्ट के बाद समूह की कंपनियों के शेयरों में तीव्र गिरावट आई है. इसका असर ग्रुप की कंपनियों के बॉन्ड की कीमतों और प्रतिफल भी पड़ा है.

अडाणी इलेक्ट्रिसिटी और अडाणी पोर्ट्स का रेटिंग परिदृश्य नकरात्मक

एसएंडपी ने बयान में कहा कि ग्रुप के संचालन और खुलासा स्तर को लेकर निवेशकों में चिंता है. हमने अपनी रेटिंग में जितना इस पर गौर किया है, चिंता उससे कहीं बड़ी है और यह एक जोखिम है. नई जांच और नकारात्मक बाजार धारणा से पूंजी की लागत बढ़ सकती है और रेटिंग वाली इकाइयों के लिए वित्तपोषण पहुंच में कमी आ सकती है. उसने कहा कि इन सबको देखते हुए अडाणी इलेक्ट्रिसिटी और अडाणी पोर्ट्स के लिए रेटिंग परिदृश्य को स्थिर से नकारात्मक कर दिया है.

अडाणी एंटरप्राइजेज के शेयर में 35 फीसदी तक गिरावट

बताते चलें कि 24 जनवरी के बाद पहली बार अडाणी ग्रुप की प्रमुख फर्म अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए. हालांकि, दिन के कारोबार में कंपनी के शेयर 35 फीसदी तक गिर गए थे. अडाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड भी आठ फीसदी की तेजी के साथ बंद हुआ. हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट में आरोप लगाए जाने के बाद से ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में लगातार गिरावट दर्ज की गई.

फ्रांसीसी कंपनी टोटल एनर्जीज ने दिया सहारा

अडाणी समूह की दो कंपनियों में हिस्सा रखने वाली फ्रांस की दिग्गज ऊर्जा कंपनी टोटलएनर्जीज ने शुक्रवार को कहा कि समूह के शेयरों में भारी गिरावट के बीच उसने अपनी हिस्सेदारी को लेकर कोई पुनर्मूल्यांकन नहीं किया है. टोटलएनर्जीज ने बयान में कहा कि अडाणी समूह की कंपनियों में उसने अपना निवेश भारतीय कानूनों का पूरी तरह पालन करते हुए और अपनी आंतरिक संचालन प्रक्रिया के आधार पर किया था.

ग्रुप वित्तीय स्थिति का आकलन कर रही मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस

वहीं, मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने कहा कि वह अडाणी ग्रुप की कंपनियों के पास नकदी की स्थिति समेत उनकी वित्तीय मजबूती का आकलन कर रही है. एक अन्य रेटिंग एजेंसी फिच ने कहा कि समूह की कंपनियों को लेकर अभी उसकी रेटिंग प्रभावित नहीं होगी. हालांकि, अमेरिकी रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने अडाणी पोर्ट्स और अडाणी इलेक्ट्रिसटी की साख को बरकरार रखते हुए दोनों कंपनियों के परिदृश्य को स्थिर से नकारात्मक कर दिया.

अडाणी ग्रुप को कर्ज देने वाले पर आरबीआई की नजर

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कहा कि भारत का बैंकिंग क्षेत्र मजबूत और स्थिर है. केंद्रीय बैंक ने साथ ही यह भी कहा कि वह ऋणदाताओं पर लगातार नजर बनाए हुए है. आरबीआई ने बयान में कहा कि एक ‘व्यावसायिक समूह’ को भारतीय बैंकों के कर्ज के बारे में चिंता जताने वाली मीडिया रिपोर्टों को संज्ञान में लेते हुए वह लगातार बैंकिंग क्षेत्र की निगरानी कर रहा है. हालांकि, आरबीआई ने अडाणी समूह का नाम नहीं लिया.

एसबीआई ने 27,000 करोड़ रुपये दिया कर्ज

देश के सबसे बड़े कर्जदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने कहा कि अडाणी ग्रुप की कंपनियों को उसने करीब 27,000 करोड़ रुपये का कर्ज दिया हुआ है, जो कुल वितरित ऋणों का सिर्फ 0.88 फीसदी है. वहीं, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा कि उसने संकट में घिरे अडाणी ग्रुप की कंपनियों को कर्ज में पिछले दो साल में कटौती की है और बकाया कर्ज की गुणवत्ता को लेकर उसे कोई चिंता नहीं है.

सरकार पर विपक्ष के हमले

वहीं, अडाणी ग्रुप के मामले को लेकर कांग्रेस समेत 15 विपक्षी दल सरकार पर लगातार हमले कर रहे हैं. कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट और संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की निगरानी में मामले की जांच करने की मांग की है. विपक्ष ने कहा कि वे अडाणी ग्रुप के खिलाफ ‘हिंडनबर्ग रिसर्च’ द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़े मामले पर चर्चा और जांच की मांग संसद के दोनों सदनों में उठाते रहेंगे.

कांग्रेस ने की बैठक

राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के संसद भवन स्थित कक्ष में 16 दलों की बैठक में कांग्रेस, द्रमुक, आम आदमी पार्टी, भारत राष्ट्र समिति, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, जनता दल (यूनाइटेड) और कई अन्य दलों के नेता शामिल हुए. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) अडाणी समूह से जुड़े मामले में संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने की मांग को लेकर 13 फरवरी को प्रदर्शन करेगी.

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अडाणी संकट पर नियामक प्रणाली की कोई राय नहीं : सीतारमण

उधर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने समाचार चैनल न्यूज18 को दिए साक्षात्कार में बताया कि अडाणी घटनाक्रम से भारतीय नियामक प्रणाली के बारे में कोई राय नहीं बनती है और वित्तीय बाजार अच्छी तरह से संचालित हो रहे हैं. वहीं, वित्त सचिव टी वी सोमनाथन ने कहा कि अडाणी समूह के शेयरों में भारी गिरावट से शेयर बाजार में मची आपाधापी वृहद-आर्थिक नजरिये से ‘चाय के प्याले में उठा तूफान’ भर है. ‘चाय के प्याले में उठा तूफान’ एक मुहावरा है, जिसका मतलब है कि ऐेसे मामले को लेकर गुस्सा और चिंता दिखाना, जो महत्वपूर्ण नहीं है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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