रेलवे को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए ब्रिटेन के साथ समझौता करेगा भारत

नयी दिल्ली : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को भारतीय रेल को ऊर्जा के मामले में आत्म निर्भर बनाने के लिए भारत और ब्रिटेन के बीच समझौता ज्ञापन को मंज़ूरी प्रदान की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी. सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, […]
नयी दिल्ली : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को भारतीय रेल को ऊर्जा के मामले में आत्म निर्भर बनाने के लिए भारत और ब्रिटेन के बीच समझौता ज्ञापन को मंज़ूरी प्रदान की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी.
सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, भारतीय रेल को ऊर्जा मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय विकास विभाग (ब्रिटेन सरकार) के साथ समझौता ज्ञापन पर 2 दिसंबर, 2019 को हस्ताक्षर किये गसे थे. इस समझौते के तहत दोनों पक्ष भारतीय रेल को ऊर्जा सक्षम और ऊर्जा मामले में आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश में उठायी जानी वाली गतिविधियों के विस्तार पर सहमत हुए हैं.
दोनों में से प्रत्येक साझीदार समय-समय पर अपने देश में मौजूदा कानून, नियम, नियमन एवं राष्ट्रीय नीतियों के तहत भारतीय रेल को ऊर्जा सक्षम और ऊर्जा मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आवश्यक कदम उठायेंगे. इसके तहत दोनों पक्ष भारतीय रेल के लिए ऊर्जा योजना जैसे सौर एवं पवन ऊर्जा क्षेत्र, ऊर्जा सक्षमता अभ्यासों को अपनाने, ईंधन कुशलता हासिल करने, इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने, बैटरी से संचालित शंटिंग लोकोमेटिव आदि पर सहमत हैं.
दोनों पक्षों के बीच प्रशिक्षण कार्यक्रम, औद्योगिक दौरा, फिल्ड दौरा या सहयोग के किसी अन्य रूप जैसी विकास क्षमता बढ़ाने पर लिखित में मंज़ूरी दी जा सकती है. इस समझौता ज्ञापन के तहत दोनों देश उचित तरीके से गतिविधियों के संचालन में सहयोग करेंगे. इस समझौते में ऐसा कुछ भी नहीं होगा, जो साझीदारों के बीच सहयोग की मौजूदा और भावी व्यवस्था को नुकसान पहुंचा सके.
इसमें कहा गया है कि साझीदार समझौता ज्ञापन में या इसके कुछ हिस्से में बदलाव या संशोधन के लिए लिखित में आग्रह कर सकते हैं. इसमें किया गया कोई भी बदलाव संशोधित समझौता ज्ञापन का हिस्सा होगा. ये बदलाव या संशोधन साझीदारों द्वारा तय की गयी तारीख से लागू माने जायेंगे. समझौता ज्ञापन दोनों पक्षों के अधिकृत प्रतिनिधियों द्वारा हस्ताक्षर किये जाने के बाद से लागू होगा और कोई भी पक्ष दूसरे पक्ष को लिखित पत्राचार के जरिये समझौते को रद्द कर सकता है.
ऐसे में समझौते का रद्द होना दूसरे पक्ष को लिखित में जानकारी मिलने के छह महीने बाद से लागू माना जायेगा. साझीदारों के बीच किसी भी तरह के विवाद या मतभेद आपसी विमर्श और बातचीत से सुलझाये जायेंगे.
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