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तीसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान : मॉर्गन एंड स्टेनले

Updated at : 26 Feb 2018 3:41 PM (IST)
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तीसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान : मॉर्गन एंड स्टेनले

नयी दिल्ली : देश की आर्थिक वृद्धि में तेजी आने की उम्मीद है और दिसंबर तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर सात प्रतिशत रह सकती है. वित्तीय सेवाएं देने वाली प्रतिष्ठित संस्था मॉर्गन स्टेनली ने एक रिपोर्ट में यह बात कही है. चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 6.3 […]

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नयी दिल्ली : देश की आर्थिक वृद्धि में तेजी आने की उम्मीद है और दिसंबर तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर सात प्रतिशत रह सकती है. वित्तीय सेवाएं देने वाली प्रतिष्ठित संस्था मॉर्गन स्टेनली ने एक रिपोर्ट में यह बात कही है. चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत तथा पहली तिमाही में 5.7 प्रतिशत रही थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि उद्योग एवं सेवा क्षेत्र में वृद्धि दर तेज होने तथा कृषि क्षेत्र में घटने का अनुमान है.

मॉर्गन स्टेनली ने कहा, ‘‘हमारा अनुमान है कि आर्थिक सुधार को बढ़ावा मिला है और दिसंबर तिमाही में सालाना आधार पर जीडीपी वृद्धि दर सात प्रतिशत रही है. ‘ कंपनी के अनुसार कहा कि सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) के संदर्भ में वृद्धि दर सालाना आधार पर दूसरी तिमाही के 6.1 प्रतिशत की तुलना में बढ़कर तीसरी तिमाही में 6.7 प्रतिशत रही है. रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों की आय में भी दिसंबर तिमाही के दौरान सुधार हुआ है. वाहन एवं दोपहिया वाहनों की बिक्री भी इस दौरान तेजी से बढ़ी है. वस्तुओं के निर्यात की वृद्धि में भी दहाई अंकों में वृद्धि दर्ज की गयी है.
गौरतलब है कि जनवरी महीने में मार्गन एंड स्टैनले द्वारा एक रिपोर्ट जारी की गयी थी. रिपोर्ट में कहा गया था 2018 में निजी निवेश खर्च में सुधार होगा और कंपनियों की आय में वृद्धि होगी. बही खातों में सुधार के साथ – साथ वित्तीय प्रणाली भी मजबूत होगा. वहीं मार्गन एंड स्टैनले ने कहा था कि 2020 -22 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था की जीडीपी 7.3 प्रतिशत रहेगी.

क्रिसिल का क्या है अनुमान

क्रिसिल के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है. 2019 में भारत की अर्थव्यवस्था चार बिन्दुओं पर अधारित रहेगी. बैंकों पर खराब कर्ज को लेकर पैदा दबाव का समाधान, लगातार जारी आर्थिक सुधार, ग्लोबल इकोनॉमी में रिकवरी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूती. गौरतलब है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले दिनों कहा था कि पीएनबी जैसे घोटाले से सुधारों को झटका लगता है.
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