ब्रह्मपुर में गेहूं खरीद की रफ्तार धीमी, अब तक सिर्फ 16 मीट्रिक टन की खरीद; दो पैक्सों में शुरू भी नहीं

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 03 Jun 2026 11:09 AM

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अनाज का सांकेतिक फोटो.

Buxar News : ब्रह्मपुर ब्लॉक के ब्रह्मपुर और हरनाथपुर पैक्स में अब तक सरकारी गेहूं खरीद की शुरुआत तक नहीं हो सकी है. इससे किसानों की भागीदारी और व्यवस्था की सक्रियता पर सवाल उठ रहे हैं.

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Buxar News : (संतोष कांत की रिपोर्ट)

सरकार द्वारा किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के दावों की जमीनी हकीकत बक्सर जिले के ब्रह्मपुर ब्लॉक में कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है. रबी विपणन सत्र 2026–27 के तहत शुरू की गई सरकारी गेहूं खरीद प्रक्रिया बेहद सुस्त रफ्तार का शिकार हो गई है. आधिकारिक प्रगति रिपोर्ट के ताजा आंकड़े बताते हैं कि क्षेत्र के चयनित पैक्सों और व्यापार मंडल के माध्यम से अब तक नाममात्र की खरीद ही हो सकी है, जिससे इस बार के खरीद लक्ष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं.

अब तक केवल 4 किसानों से खरीद

जारी रिपोर्ट के अनुसार ब्रह्मपुर ब्लॉक के चार प्रमुख पैक्स क्षेत्रों में अब तक सिर्फ 4 किसानों से कुल 16.000 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद दर्ज की गई है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान तिथि तक किसी भी केंद्र पर नई खरीद दर्ज नहीं हुई है, जिससे पूरी प्रक्रिया के ठप होने की आशंका जताई जा रही है.

पैक्सवार स्थिति : कहीं प्रगति, कहीं पूरी तरह शून्य

महुआंर पैक्स:
ब्लॉक में सबसे अधिक खरीद इसी पैक्स के माध्यम से हुई है. अब तक 3 किसानों से 15 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद दर्ज की गई है. हालांकि, वर्तमान रिपोर्ट में यहां भी नई खरीद शून्य है.

पोखराहा पैक्स:
इस पैक्स में अब तक केवल 1 किसान से 1 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई है, जिससे इसकी शुरुआत बेहद धीमी मानी जा रही है.

ब्रह्मपुर पैक्स:
पूरे सीजन में अब तक यहां कोई खरीद नहीं हुई है, जिससे यह पैक्स पूरी तरह शून्य पर बना हुआ है.

हरनाथपुर पैक्स:
इस पैक्स की स्थिति भी ब्रह्मपुर पैक्स जैसी ही है, यहां भी अब तक एक भी किसान से खरीद दर्ज नहीं की गई है.

ब्रह्मपुर और हरनाथपुर में शुरुआत भी नहीं

ब्रह्मपुर ब्लॉक के ब्रह्मपुर और हरनाथपुर पैक्स में अब तक सरकारी गेहूं खरीद की शुरुआत तक नहीं हो सकी है. इससे किसानों की भागीदारी और व्यवस्था की सक्रियता पर सवाल उठ रहे हैं.

एसएफसी को आपूर्ति पूरी तरह शून्य

रिपोर्ट का एक और गंभीर पहलू यह है कि अब तक खरीदे गए गेहूं में से एक भी मात्रा बिहार राज्य खाद्य निगम (SFC) को नहीं भेजी गई है। ‘टू एसएफसी’ कॉलम में शून्य दर्ज है.
इसका अर्थ है कि खरीदा गया अनाज अब तक गोदाम या मिल तक नहीं पहुंच सका है, जिससे भंडारण और गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है.

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