क्या है फिटमेंट फैक्टर , इसके बढ़ने से कितनी बढ़ जाएगी आपकी बेसिक सैलरी ? समझें एक्सपर्ट्स से

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सांकेतिक तस्वीर (फोटो : Canva)

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8th Pay Commission : 8वें वेतन आयोग में कितना होगा फिटमेंट फैक्टर? जानें सैलरी तय करने वाला यह गुणांक (Multiplier) क्या है, इसका फॉर्मूला और एक्सपर्ट्स का क्या है अनुमान.

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8th Pay Commission : केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन संसोधन के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है. इस समय कर्मचारियों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) कितना तय होगा.

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ऐसा इसलिए है क्योंकि यही वह गुणांक (Multiplier) है जो सीधे तौर पर यह तय करता है कि आपकी सैलरी या पेंशन में कितनी बढ़ोतरी होगी. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि फिटमेंट फैक्टर क्या होता है, इसका फॉर्मूला क्या है और इस बार इसके कितना रहने का अनुमान है.

क्या है फिटमेंट फैक्टर ?

फिटमेंट फैक्टर एक प्रकार का ‘मल्टीप्लायर’ (गुणांक) होता है. जब भी कोई नया वेतन आयोग आता है, तो कर्मचारियों की पुरानी बेसिक सैलरी (मूल वेतन) और पेंशन को नए ढांचे में बदलने (रिवाइज करने) के लिए इस नंबर से गुणा किया जाता है. इसका सीधा असर कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी और पीएफ (PF) जैसे भत्तों पर पड़ता है.

फिटमेंट फैक्टर कैलकुलेशन का फॉर्मूला

  • 6ठे वेतन आयोग (2006) : उस समय फिटमेंट फैक्टर 1.86 तय किया गया था.
  • 7वें वेतन आयोग (2016) : साल 2016 में सरकार ने फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 2.57 कर दिया था.

8वें वेतन आयोग में कितना हो सकता है फिटमेंट फैक्टर?

बैंकबाजार (Bankbazaar) के सीईओ आदिल शेट्टी के अनुसार, साल 2016 में 7वां वेतन आयोग लागू होने के बाद से पिछले एक दशक में भारत में रिटेल महंगाई दर (खुदरा महंगाई) में लगभग 56% की बढ़ोतरी हुई है. इस महंगाई के कारण सरकारी कर्मचारियों की परचेजिंग पावर (खरीदने की क्षमता) पर असर पड़ा है.

8वें वेतन आयोग को एक तरफ जहां 1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की जरूरतों को देखना है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी खजाने (Fiscal Budget) पर पड़ने वाले बोझ के बीच संतुलन भी बनाना होगा. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फिटमेंट फैक्टर को लेकर दो मुख्य अनुमान लगाए जा रहे हैं.

एक्सपर्ट्स का अनुमान के अनुसार माना जा रहा है कि यह 2.28 से 2.86 के बीच रह सकता है. यदि सरकार फिटमेंट फैक्टर को 2.86 तय करती है, तो कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 से बढ़कर सीधे ₹51,480 हो जाएगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़ा 2016 से अब तक बढ़ी महंगाई के गणित पर बिल्कुल सटीक बैठता है.

कर्मचारी संगठन (Unions) क्यों मांग रहे हैं ‘फिटमेंट फैक्टर 4’?

वेतन आयोग के सामने कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगें काफी मजबूती से रखी हैं.

  • अधिकतम कर्मचारी संगठनों का कहना है कि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को कम से कम 3 रखा जाना चाहिए.
  • कुछ बड़े कर्मचारी संघ इसे सीधे 4 करने की वकालत कर रहे हैं.
  • कर्मचारी संगठनों का मानना है कि चूंकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में हर 10 साल में सिर्फ एक बार संशोधन किया जाता है, इसलिए अगले 10 सालों की महंगाई और दैनिक जरूरतों को देखते हुए एक बड़ा और वाजिब फिटमेंट फैक्टर बेहद जरूरी है ताकि कर्मचारियों का जीवन स्तर बेहतर हो सके.
वेतन आयोगलागू होने का वर्षतय किया गया फिटमेंट फैक्टर
6ठा वेतन आयोग20061.86
7वां वेतन आयोग20162.57
8वां वेतन आयोग (अनुमानित)प्रक्रिया जारी (2026)2.28 से 2.86 (यूनियनों की मांग 3 से 4 की है)

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