नालंदा के ग्रामीण अस्पतालों में शुद्ध पेयजल का संकट, चापाकलों ने छोड़ा साथ, पानी के लिए भटक रहे लोग
मॉडल अस्पताल, बिहारशरीफ की तस्वीर
Bihar Sharif News : सदर अस्पताल, राजगीर, हिलसा, कल्याणबिगहा और नूरसराय को छोड़ अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों में आरओ सुविधा नहीं, बढ़ती गर्मी के बीच मरीजों की परेशानी बढ़ी.
बिहारशरीफ से कंचन की रिपोर्ट
Bihar Sharif News : नालंदा जिले में भीषण गर्मी के बीच अस्पतालों में पेयजल संकट गहरा गया है. जिले के 36 ग्रामीण अस्पतालों में पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने से इलाज कराने पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. कई अस्पतालों में लगे नल और चापाकल खराब पड़े हैं, जबकि कुछ स्थानों पर भू-जल स्तर नीचे जाने के कारण चापाकल पानी देना बंद कर चुके हैं.
बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर लोग
अस्पतालों में पानी नहीं मिलने के कारण मरीजों और परिजनों को बाहर की दुकानों से बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है. कई लोग घर से ही पानी की बोतल लेकर अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन लंबी प्रतीक्षा और इलाज में समय लगने के कारण एक-दो बोतल पानी पर्याप्त नहीं हो पाता. ऐसे में उन्हें बार-बार पानी की तलाश में भटकना पड़ता है.
नालंदा के अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों में आरओ पानी की व्यवस्था नहीं
सदर अस्पताल, राजगीर, हिलसा, कल्याणबिगहा और नूरसराय जैसे कुछ अस्पतालों को छोड़ अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों में आरओ आधारित शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है. मरीजों को बोरिंग या जलमीनार का गर्म पानी पीकर ही प्यास बुझानी पड़ रही है. गर्मी बढ़ने के साथ यह समस्या और गंभीर होती जा रही है.
रोजाना हजारों मरीज हो रहे प्रभावित
जिले में 370 ग्रामीण अस्पतालों सहित करीब 439 स्वास्थ्य संस्थानों में प्रतिदिन चार से पांच हजार लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं. अकेले बिहारशरीफ सदर अस्पताल में रोजाना करीब 1200 मरीज और उनके परिजन आते हैं. ऐसे में पेयजल संकट स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पैदा कर रहा है.
प्रसूता मरीजों के परिजनों की बढ़ी मुश्किलें
अस्पतालों में भर्ती प्रसूता महिलाओं के साथ रहने वाले परिजनों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है. कई दिनों तक अस्पताल में रहने के दौरान भोजन की व्यवस्था किसी तरह हो जाती है, लेकिन भीषण गर्मी में पीने के पानी की कमी लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गई है. पानी के लिए बार-बार अस्पताल परिसर और आसपास दौड़ लगानी पड़ रही है.
प्रशासन ने दिए व्यवस्था सुधारने के निर्देश
जिलाधिकारी कुंदन कुमार लगातार समीक्षा बैठकों में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अस्पतालों में पेयजल समेत सभी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दे रहे हैं. इसके बावजूद कई स्वास्थ्य केंद्रों में स्थिति जस की तस बनी हुई है. मरीजों ने अस्पतालों में शीघ्र पेयजल व्यवस्था बहाल करने की मांग की है.
अस्पतालों में पेयजल संकट पर लोगों ने उठाए सवाल, व्यवस्था सुधारने की मांग
जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों में शुद्ध पेयजल की कमी को लेकर लोगों ने चिंता जताई है. गिरियक के महेंद्र राम, राणा बिगहा के दिनेश प्रसाद और बिहारशरीफ के विवेक कुमार ने कहा कि अधिकांश अस्पतालों में पर्याप्त पेयजल व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को बोतलबंद पानी खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है. महेंद्र ठाकुर और वीरमणी कुमार ने आरोप लगाया कि अस्पतालों के आसपास बिकने वाले कई बोतलबंद पानी की गुणवत्ता संदिग्ध रहती है, फिर भी लोग मजबूरी में अधिक कीमत देकर उसे खरीदते हैं. उन्होंने प्रशासन से ऐसे पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच कराने की मांग की. वहीं स्वयंसेवी विकास कुमार उर्फ गांधी जी और बैंककर्मी विजय कुमार ने कहा कि अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, मॉल और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में शुद्ध पेयजल तथा स्वच्छ शौचालय की व्यवस्था अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशानी न उठानी पड़े.
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