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जब कांग्रेस लहर में गूंजा ‘वीर महोबिया क्राम-क्राम, जेने गया धड़ाम-धड़ाम’, 1980 में वीरेंद्र सिंह ने दर्ज की थी ऐतिहासिक जीत

Updated at : 30 Oct 2025 6:30 AM (IST)
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Veer Mahobia Kram Kram Bihar Election News

कांग्रेस की लहर में निर्दलीय उम्मीदवार ने बजाया डंका.

Veer Mahobiya Kram Kram: चुनाव प्रचार भी उनका अनोखा होता था. गांवों में जाते और कहते तू भाइ छह, चाचा छह. वोट नई मिललै त बुझिहा. महोबिया को हाथी पालने का शौक था. उनके नामांकन जुलूस में हाथियों का झुंड होता था. विधायक होते हुए उन्होंने अपनी पुत्री की शादी की. दिल्ली से अनुमति लेकर वायुयान से रात भर विवाह मंडप पर फूलों की वर्षा होती रही.

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Veer Mahobiya Kram Kram‍| Bihar Election 2025: ‘वीर महोबिया क्राम-क्राम जेने गया धड़ाम-धड़ाम’. यह नारा 1980 के चुनाव में वैशाली में गली-गली गूंजता था. वह समय राजनीति में बाहुबलियों की इंट्री का काल माना जाता है. वैशाली जिले की जंदाहा विधानसभा सीट से वीरेंद्र सिंह महोबिया निर्दलीय उम्मीदवार थे. उनके सामने कई दिग्गज मैदान में डटे थे. कांग्रेस की लहर था. देश और बिहार में कांग्रेस की सरकारें सत्ता में लौट आयी थीं, लेकिन जंदाहा में परिणाम जब आया तो वीरेंद्र सिंह महोबिया को जीत मिली.

जनता पार्टी की सरकार गिरने के बाद मध्यावधि चुनाव

दरअसल, केंद्र और बिहार में जनता पार्टी की सरकार गिर गयी थी. मध्यावधि चुनाव हो रहे थे, जंदाहा में जनता पार्टी के नाम से कई पार्टियां मैदान में थीं. जनता पार्टी जेपी, जनता पार्टी सेकुलर राजनारायण गुट, जनता पार्टी चरण सिंह गुट. इसी तरह कांग्रेस भी दो फाड़ हो चुकी थी. एक कांग्रेस-आइ और दूसरी कांग्रेस-यू. कुल मिला कर सबके अपने-अपने उम्मीदवार थे.

निर्दलीय वीरेंद्र सिंह महोबिया की ऐतिहासिक जीत

इस दौरान चुनाव परिणाम आया तो निर्दलीय वीरेंद्र सिंह उर्फ वीरेंद्र सिंह महोबिया ने 1687 मतों से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जनता पार्टी सेकुलर के शिव प्रसाद सिंह को पराजित कर दिया. महोबिया तत्कालीन कांग्रेस के दिग्गज डाॅ जगन्नाथ मिश्र के अत्यंत करीबी थे. वे डाॅ मिश्र की तरह ही अपनी सभी उंगलियों में अंगूठी पहनते थे. एक बार किसी यज्ञ कराने के वास्ते अपनी सभी दसों अंगूठियों को बेच दिया था.

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अनेखा था चुनाव प्रचार का तरीका

चुनाव प्रचार भी उनका अनोखा होता था. गांवों में जाते और कहते तू भाइ छह, चाचा छह. वोट नई मिललै त बुझिहा. महोबिया को हाथी पालने का शौक था. उनके नामांकन जुलूस में हाथियों का झुंड होता था. विधायक होते हुए उन्होंने अपनी पुत्री की शादी की. दिल्ली से अनुमति लेकर वायुयान से रात भर विवाह मंडप पर फूलों की वर्षा होती रही. विधायक बनने के बाद पटना के विधायक आवास पर कीर्तन करवाना उनका शगल था. विधायक आवास में रात भर कीर्तन से जब पड़ोसी विधायक परेशान हो गये तो उन लोगों ने महोबिया से इसे बंद करने को कहा. इस पर महोबिया भड़क गये और सबको डांट कर भगा दिया.

1985 के चुनाव में मिली हार

1985 का जब चुनाव आया तो वीरेंद्र सिंह महोबिया एक बार फिर निर्दलीय उम्मीदवार हुए. महोबिया को उम्मीद थी कि इस बार भी वो दिग्गजों को परास्त करने में सफल होंगे, लेकिन उनके सामने इस बार लोकदल के तुलसी दास मेहता थे. चुनाव परिणाम आया तो तुलसी दास मेहता 3776 मतों से चुनाव जीत गये. इस चुनाव परिणाम के कुछ दिनों बाद ही महोबिया की हत्या हो गयी. (सभार : वरिष्ठ पत्रकार विकास कुमार झा की पुस्तक बिहार में राजनीति का अपराधीकरण)

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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