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मंत्री अशोक चौधरी ने 2 साल में खरीदी 200 करोड़ की बेनामी संपत्ति, प्रशांत किशोर ने बेटी-दामाद पर भी लगाए आरोप

Updated at : 20 Sep 2025 9:14 AM (IST)
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prashant kishor on ashok chaudhary| Bihar election 2025

प्रशांत किशोर और अशोक चौधरी की फाइल फोटो

Bihar Election 2025: जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जेडीयू मंत्री अशोक चौधरी पर बड़ा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि बीते दो साल में चौधरी ने परिवार और समधन से जुड़े ट्रस्ट के जरिए 200 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्ति खरीदी है.

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Bihar Election 2025: जन सुराज पार्टी के नेता और चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने एक बार फिर बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है. शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी और जेडीयू के वरिष्ठ मंत्री अशोक चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए. पीके का दावा है कि पिछले दो साल में अशोक चौधरी ने 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति इकट्ठा की है. इस आरोप की जद में उन्होंने चौधरी की सांसद बेटी शांभवी चौधरी, दामाद सायन कुणाल और समधन अनिता कुणाल को भी शामिल कर दिया है.

38 करोड़ की जमीन खरीद का मामला

प्रशांत किशोर ने जमीन खरीद के कागजात दिखाते हुए दावा किया कि शांभवी चौधरी की सगाई और शादी के बीच 38 करोड़ रुपये से अधिक की पांच जमीन खरीदी गई. ये जमीनें पटना में हैं और इनका मालिकाना हक अशोक चौधरी की पत्नी, दामाद सायन कुणाल, समधन अनिता कुणाल या फिर कुणाल परिवार से जुड़े “मानव वैभव विकास ट्रस्ट” के नाम पर दर्ज है.

पीके ने कहा कि जब शांभवी की सगाई हुई, उसके बाद अचानक इस ट्रस्ट के नाम से करोड़ों की जमीन खरीद शुरू हुई. जबकि इससे पहले इस ट्रस्ट की इतनी वित्तीय क्षमता नहीं थी. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतना पैसा कहां से आया और अचानक इतनी संपत्ति खरीदने की आवश्यकता क्यों पड़ी.

ट्रस्ट पर उठाए सवाल

प्रशांत किशोर ने साफ किया कि उनके पास ट्रस्ट के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है. लेकिन, उन्होंने जोर देकर कहा कि ट्रस्ट की ट्रस्टी और ट्रेजरर शांभवी की सास अनिता कुणाल हैं और जमीन खरीद से जुड़ा पूरा सिलसिला ट्रस्ट के इर्द-गिर्द घूमता है. उन्होंने पूछा कि जिस ट्रस्ट के पास पहले एक करोड़ की भी जमीन नहीं थी, वह अचानक इतनी बड़ी जमीनें कैसे खरीदने लगा.

बेनामी संपत्ति का उदाहरण

पीके ने चौधरी पर बेनामी संपत्ति खरीदने के तौर-तरीकों का भी आरोप लगाया. उन्होंने बताया कि 2019 में चौधरी के पीए रहे योगेंद्र दत्त के नाम पर 34 लाख रुपये की एक जमीन बिक्रम में खरीदी गई थी. दो साल बाद वही जमीन 34 लाख रुपये में ही शांभवी चौधरी के नाम कर दी गई.

उन्होंने यह भी बताया कि चौधरी ने दत्त को 2021 में केवल 10 लाख रुपये ट्रांसफर किए. आयकर विभाग की पूछताछ के बाद, चार साल बाद यानी अप्रैल 2025 में 24 लाख रुपये का बाकी भुगतान किया गया. पीके ने कहा कि यह बेनामी संपत्ति का क्लासिक उदाहरण है, जिसमें पैसे और कागजात को गोलमाल करके संपत्ति खरीदी जाती है.

अशोक चौधरी पर पुराने आरोप भी दोहराए

याद रहे कि जून 2025 में प्रशांत किशोर ने अशोक चौधरी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने बेटी शांभवी चौधरी के लिए लोकसभा चुनाव का टिकट पैसा देकर खरीदा. इस मामले में चौधरी ने पीके पर मानहानि का केस भी किया था. शांभवी फिलहाल समस्तीपुर (सुरक्षित) सीट से सांसद हैं और चिराग पासवान की पार्टी लोजपा-आर का हिस्सा हैं.

पीके ने कहा कि जिस तरह लालू प्रसाद यादव का नाम बेनामी संपत्तियों से जोड़ा जाता था, अब उसी तरह अशोक चौधरी ने नया रिकॉर्ड बना दिया है. उन्होंने चौधरी को “नीतीश कुमार का दाहिना हाथ” बताते हुए भ्रष्टतम नेता करार दिया.

भाजपा नेताओं पर भी साधा निशाना

प्रशांत किशोर ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा नेताओं पर भी निशाना साधा. उन्होंने सम्राट चौधरी, दिलीप जायसवाल, मंगल पांडेय और संजय जायसवाल पर अलग-अलग तरह के आरोप लगाते हुए कहा कि ये सभी नेता जनता के सवालों से भाग रहे हैं. उन्होंने कहा कि बिहार के लोग जानना चाहते हैं कि आखिर राजनीति में आकर ये नेता इतने कम समय में करोड़ों-अरबों की संपत्ति कैसे अर्जित कर लेते हैं.

“महादेव नहीं, लक्ष्मी के भक्त”

प्रशांत किशोर ने तंज कसते हुए कहा कि अशोक चौधरी खुद को महादेव का भक्त बताते हैं, लेकिन असल में वे लक्ष्मी के भक्त हैं. उन्होंने कहा कि चौधरी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि करोड़ों की संपत्ति जुटाने के लिए पैसा आखिर कहां से आया और क्यों उनके परिवार व समधन से जुड़े ट्रस्ट के नाम पर जमीनें खरीदी जा रही हैं.

राजनीतिक हलचल तेज

पीके के इन आरोपों ने बिहार की राजनीति में खलबली मचा दी है. अशोक चौधरी की ओर से इस ताजा आरोपों पर प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है. हालांकि माना जा रहा है कि जल्द ही वे इन दावों का खंडन करेंगे.

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Abhinandan Pandey

लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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