बुरे फंसे प्रशांत किशोर! चुनाव आयोग ने भेजा नोटिस, जन सुराज के नेता बोले- अरेस्ट करवाओ, देख लेंगे

प्रशांत किशोर को चुनाव आयोग ने भेजा नोटिस.
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव लड़ रही जन सुराज पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रशांत किशोर बुरे फंस गये हैं. चुनाव से पहले दो राज्यों की अलग-अलग मतदाता सूची में उनका नाम दर्ज पाया गया है. चुनाव पदाधिकारी ने उन्हें नोटिस जारी कर 3 दिन में जवाब मांगा है. अगर वह संतोषप्रद जवाब नहीं दे पाते, तो उनके खिलाफ बड़ी कार्रवाई हो सकती है. इस बीच जन सुराज पार्टी के प्रवक्ता ने इसके लिए चुनाव आयोग और निर्वाचन आयोग के अधिकारियों को ही जिम्मेदार ठहरा दिया है.
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Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पहली बार चुनाव लड़ रही जन सुराज पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रशांत किशोर बुरे फंस गये हैं. निर्वाचन आयोग ने चुनाव से पहले उन्हें नोटिस जारी किया है. निर्वाची पदाधिकारी, 209-करगहर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र सह भूमि सुधार उप समाहर्ता, सासाराम की ओर से प्रशांत किशोर को नोटिस जारी किया गया है. जन सुराज ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसके लिए चुनाव आयोग को ही जिम्मेदार ठहरा दिया है. वहीं, प्रशांत किशोर ने भी इस पर जबर्दस्त प्रतिक्रिया दी है.
निर्वाची पदाधिकारी ने प्रशांत को क्यों जारी किया नोटिस?
जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर को एक से अधिक विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में नाम दर्ज होने की वजह से मंगलवार को नोटिस जारी किया गया. नोटिस में कहा गया है कि प्रशांत किशोर का नाम पश्चिम बंगाल के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र संत हेलेन स्कूल, बी रानीशंकरी लेन में दर्ज है. उनका नाम बिहार की मतदाता सूची में भी है.
SIR चलाकर ये लोग पूरे बिहार के लोगों को नहीं डरा पाये. इलेक्शन कमीशन से पूछिए कि हमारा नाम मतदाता सूची से क्यों नहीं काटा? यदि 2 जगह हमारा नाम था, तो उन्हें हमारा नाम काटना चाहिए था. यह जबरदस्ती की भूमिका बना रहे हैं. हम अपने गांव करगहर के वोटर हैं. 2 साल कोलकाता रहे, तो वहां के वोटर हो गये. जब SIR करायी, तो हमको नोटिस क्यों भेजे? अरे हमको अरेस्ट करवाइए, देख लेंगे.
प्रशांत किशोर, जन सुराज पार्टी
बिहार के करगहर विधानसभा क्षेत्र के वोटर हैं प्रशांत किशोर
नोटिस के मुताबिक, प्रशांत किशोर का नाम बिहार के सासाराम जिले के 209-करगहर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के भाग संख्या-367 (मध्य विद्यालय, कोनार, उत्तरी भाग) क्रम संख्या 621 में दर्ज है. करगहर निर्वाचन क्षेत्र में उनके मतदाता पहचान पत्र की संख्या IUI3123718 है.
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एक वर्ष का कारावास और जुर्माना दोनों का प्रावधान
निर्वाची पदाधिकारी ने प्रशांत किशोर को नोटिस में कहा है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 17 के तहत एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्र में किसी व्यक्ति का नाम पंजीकृत नहीं किया जायेगा. इसके उल्लंघन की स्थिति में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत एक वर्ष का कारावास या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है.
प्रशांत से निर्वाची पदाधिकारी ने 3 दिन में मांगा जवाब
निर्वाची पदाधिकारी ने प्रशांत किशोर को 3 दिन के अंदर अपना पक्ष रखने के लिए कहा है. निर्वाची पदाधिकारी ने अंग्रेजी समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस के पश्चिम बंगाल-पटना संस्करण में छपी खबर का संज्ञान लेते हुए जन सुराज पार्टी के नेता को नोटिस जारी किया है.
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बिहार में विधानसभा चुनाव लड़ रही प्रशांत की पार्टी
चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर का नाम बिहार और पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों की मतदाता सूची में है. किशोर की जन सुराज पार्टी बिहार में विधानसभा चुनाव लड़ रही है. निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, पश्चिम बंगाल में मतदाता के रूप में पंजीकृत किशोर का पता 121, कालीघाट रोड के रूप में दर्ज है, जो कोलकाता के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस मुख्यालय का पता है.
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ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र में भी मतदाता हैं प्रशांत किशोर
भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी का निर्वाचन क्षेत्र है. पश्चिम बंगाल में वर्ष 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान प्रशांत किशोर ने तृणमूल कांग्रेस के लिए राजनीतिक सलाहकार के रूप में काम किया था. निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि किशोर का नाम बिहार में रोहतास जिले के सासाराम संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत करगहर विधानसभा क्षेत्र में पंजीकृत है.
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Bihar Election 2025: मतदाता प्रविष्टियों में दोहराव की वजह से ही एसआईआर जरूरी – आयोग
निर्वाचन आयोग ने स्वीकार किया है कि मतदाता प्रविष्टियों का दोहराव बार-बार सामने आने वाला मुद्दा है. उन्होंने इसे पूरे देश में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू करने का एक कारण बताया है.
जिम्मेदारी चुनाव आयोग की – जन सुराज पार्टी
चुनाव आयोग के नोटिस पर जन सुराज पार्टी ने देर शाम प्रतिक्रिया दी. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सैयद मसीह उद्दीन ने ‘प्रभात खबर’ (prabhatkhabar.com) को बताया कि इसके लिए चुनाव आयोग जिम्मेदार है. प्रशांत किशोर की ओर से पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से उनका नाम हटाने का आवेदन दिया गया है. अब तक यदि नाम नहीं हटाया गया है, तो गलती प्रशांत किशोर की नहीं, चुनाव आयोग और निर्वाचन विभाग के अधिकारियों की है.
नोटिस क्यों भेजे? हमको अरेस्ट करवाइए, देख लेंगे
प्रशांत किशोर ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि SIR (मतदाता गहन पुनरीक्षण अभियान) चलाकर ये लोग पूरे बिहार के लोगों को नहीं डरा पाये. उन्होंने कहा कि इलेक्शन कमीशन से पूछिए कि हमारा नाम इलेक्शन कमीशन ने क्यों नहीं काटा? यदि 2 जगह हमारा नाम था, तो उन्हें हमारा नाम काटना चाहिए था. यह जबरदस्ती की भूमिका बना रहे हैं. हम अपने गांव करगहर के वोटर हैं. 2 साल कोलकाता रहे, तो वहां के वोटर हो गये. जब SIR करायी, तो हमको नोटिस क्यों भेजे? अरे हमको अरेस्ट करवाइए, देख लेंगे.
एक मतदाता कितनी जगह कर सकता है वोट?
भारत में एक मतदाता एक जगह ही वोट कर सकता है. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 17 के तहत कोई भी व्यक्ति एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं हो सकता है.
मतदाता अगर निवास बदलता है, तो उसे क्या करना चाहिए?
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 18 एक ही निर्वाचन क्षेत्र में एक से अधिक प्रविष्टियों पर रोक लगाती है. मतदाताओं को निवास बदलने पर अपना नामांकन स्थानांतरित करने के लिए फॉर्म-8 भरना जरूरी है.
एक साथ 2 जगह का वोटर होने की क्या सजा है?
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत इस नियम का उल्लंघन करने वाले को एक वर्ष का कारावास या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है.
क्या प्रशांत किशोर को जेल जाना होगा?
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत इस नियम का उल्लंघन करने वाले को एक वर्ष का कारावास या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है. प्रशांत किशोर को इस मामले में जवाब देने के लिए 3 दिन का समय दिया गया है. अगर उनके जवाब से चुनाव आयोग संतुष्ट हो जाता है, तो उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी. अगर वह आयोग को संतुष्ट नहीं कर पाये, तो उनके खिलाफ कार्रवाई करने के बारे में चुनाव आयोग सोच सकता है.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवरेज करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है
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