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बिहार में चुनाव प्रचार चरम पर, सभी दलों के अपने दावे, अपने वादे, आरोप-प्रत्यारोप भी जारी

Updated at : 28 Oct 2025 7:11 AM (IST)
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Amit Shah BJP Tejashwi Yadav RJD Bihar Election 2025

बिहार चुनाव में एनडीए और इंडिया गठबंधन ने प्रचार में झोंकी पूरी ताकत.

Bihar Chunav 2025: बिहार चुनाव 2025 के लिए 6 नवंबर को पहले चरण का मतदान होगा. इसके पहले सभी दलों के नेता चुनाव प्रचार करने के लिए मैदान में उतर गये हैं. अमित शाह बिहार में लालू प्रसाद यादव के शासनकाल की याद दिला रहे हैं, तो तेजस्वी यादव हर घर में एक सरकारी नौकरी देने का वादा कर रहे हैं. महिलाओं को साल में 30 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने का भी वादा कर रहे हैं. एनडीए और इंडिया गठबंधन के क्या-क्या हैं दावे और वादे, यहां पढ़ें.

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Bihar Chunav 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए प्रचार अपने चरम पर है. सभी दलों के बड़े नेता मैदान में उतर चुके हैं. सत्तारूढ़ गठबंधन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के साथ-साथ नीतीश कुमार ने भी प्रचार की कमान संभाल ली है. इंडिया गठबंधन के प्रचार अभियान की अगुवाई राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव कर रहे हैं. सभी दलों के नेताओं के अपने-अपने दावे हैं. अपने-अपने वादे हैं. दोनों गठबंधन के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी जारी है.

तेजस्वी यादव कर रहे ये वादे

तेजस्वी यादव अपनी जनसभाओं में कह रहे हैं कि अगर उनकी सरकार बनी, तो बिहार के हर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देंगे. जीविका दीदी की सैलरी 30 हजार रुपए प्रति माह कर देंगे. एलपीजी सिलेंडर की कीमत घटाकर 500 रुपए कर देने का वादा कर रहे हैं.

वे (तेजस्वी यादव) हर परिवार को सरकारी नौकरी देने का वादा कर रहे हैं, लेकिन क्या वे बता सकते हैं कि इसके लिए बजट कहां से आयेगा? लोगों को सुनिश्चित करना होगा कि बिहार में जंगल राज फिर कभी न लौटे.

अमित शाह, गृह मंत्री

लालू यादव के शासनकाल की याद दिला रहे अमित शाह

दूसरी तरफ, अमित शाह और नीतीश कुमार लोगों को लालू प्रसाद यादव का शासनकाल याद दिला रहे हैं. अमित शाह कहते हैं कि बिहार विधानसभा 2025 का यह चुनाव तय करेगा कि बिहार में ‘जंगलराज’ लौटेगा या विकास का राज कायम रहेगा. अमित शाह नालंदा विश्वविद्यालय की गौरवगाथा को पुनर्स्थापित करने के सरकार के फैसले को ऐतिहासिक करार दे रहे हैं.

लालू, राहुल और ममता पर भी हमला बोल रहे शाह

बिहार चुनाव में प्रचार के दौरान अमित शाह विपक्षी नेताओं लालू प्रसाद, राहुल गांधी, ममता बनर्जी और मायावती पर भी जमकर बरस रहे हैं. वह कहते हैं कि सभी लोग जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले के खिलाफ थे. उन्होंने दावा किया कि मोदी और नीतीश की सरकार ने मिलकर बिहार को नक्सलवाद से मुक्त कराया है. अब ‘जंगलराज’ की वापसी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यही चुनाव तय करेगा कि राज्य में ‘जंगलराज’ वापस आयेगा या यह विकास के रास्ते पर आगे बढ़ता रहेगा.

बिहार में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दावे.

घुसपैठियों को नहीं बचा सकते राहुल गांधी – अमित शाह

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का विरोध करने के लिए ‘इंडिया’ गठबंधन को वह आड़े हाथों लेते हैं. कहते हैं कि हर एक घुसपैठिये का पता लगाया जायेगा. मतदाता सूची से उनका नाम हटाया जायेगा और ऐसे लोगों को उनके देशों में वापस भेजा जायेगा. शाह कहते हैं, ‘राहुल बाबा कहते हैं कि घुसपैठियों को बिहार में रहने दिया जाये. आप बताइए, क्या हमें घुसपैठियों को रहने देना चाहिए? चाहे वह जितनी भी रैलियां कर लें… ‘घुसपैठिया बचाओ यात्रा’ निकाल लें, वह घुसपैठियों को बचा नहीं सकते.’

महागठबंधन ‘भ्रष्टाचार और परिवारवाद’ का गठबंधन – शाह

अमित शाह विपक्षी महागठबंधन को ‘भ्रष्टाचार और परिवारवाद’ वाला गठबंधन बताते हैं. कहते हैं कि लालू प्रसाद ने सिर्फ अपने परिवार की समृद्धि पर ध्यान दिया. लालू जी अपने बेटे को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं और सोनिया गांधी अपने बेटे को प्रधानमंत्री. लालू जी ने चारा घोटाला से लेकर बीपीएससी (बिहार लोकसेवा आयोग) घोटाले तक अनगिनत स्कैम किये हैं. लालू शासन में हत्या, लूट, फिरौती और अपहरण जैसी घटनाएं आम थीं. इसलिए बिहार पिछड़ गया.

नीतीश कुमार की शराबबंदी ‘दिखावटी’ है. शराब अमीरों के घर तक प्रशासन पहुंचा रहा है, जबकि गरीबों और महिलाओं को रात-रात भर छापों का सामना करना पड़ता है.

तेजस्वी यादव, राजद

एनडीए सरकार की उपलब्धियां भी गिना रहे गृह मंत्री

बिहार की एनडीए सरकार की उपलब्धियां भी रैलियों में गिना रहे हैं. वह कहते हैं कि एनडीए सरकार ने हाल ही में ‘जीविका’ से जुड़ी एक करोड़ बहनों के खातों में 10 हजार रुपए दिये हैं. विधवा और वृद्धावस्था पेंशन 400 रुपए से बढ़ाकर 1,100 रुपए कर दी गयी है. आशा बहनों का मानदेय 3,000 रुपए प्रति माह तय किया गया है. पटना में मेट्रो का सपना साकार हो चुका है. इसलिए परिवारवाद की राजनीति को खारिज कर प्रदर्शन की राजनीति को चुनें.

Bihar Chunav 2025 : निवेश लाकर फैक्ट्रियां लगाने का वादा कर रहे तेजस्वी

उधर, तेजस्वी यादव कहते हैं कि वह निवेश लायेंगे. फैक्ट्रियां स्थापित करवायेंगे और बिहार को देश का अग्रणी राज्य बनायेंगे. वह कहते हैं कि उनकी लड़ाई केवल सत्ता हासिल करने की नहीं, राज्य के समग्र विकास की है. बिहार को ‘नंबर-वन’ बनाना है. इसके लिए निवेश लाना होगा. शिक्षा को बढ़ावा देना होगा. स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाना होगा.

तेजस्वी यादव कर रहे हैं बड़े-बड़े वादे.

भाजपा और पीएम मोदी पर हमला बोल रहे राजद नेता

अमित शाह की तरह तेजस्वी भी भाजपा पर हमला करते हैं. कहते हैं कि भाजपा बहाना बनाती है कि बिहार में भूमि की कमी है. इसलिए उद्योग नहीं लग सकते. वह कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासनकाल में बिहार में सुई बनाने तक की फैक्टरी नहीं लगी. फैक्ट्रियां गुजरात में लगती हैं और वोट मांगने बिहार आ जाते हैं.

नीतीश सरकार की शराबबंदी की नीति ‘दिखावटी’ – तेजस्वी

तेजस्वी यादव नीतीश कुमार की शराबबंदी नीति को ‘दिखावटी’ बताते हैं. वह कहते हैं, ‘शराब अमीरों के घर तक प्रशासन पहुंचा रहा है, जबकि गरीबों और महिलाओं को रात-रात भर छापों का सामना करना पड़ता है.’ उन्होंने तंज किया कि पुलिस थानों में जब्त शराब ‘चूहे पी जाते हैं’. तेजस्वी का आरोप है कि पीएम मोदी और अमित शाह ने सीएम नीतीश कुमार को ‘हाइजैक’ कर लिया है. अब वे बिहार का नेतृत्व करने में सक्षम नहीं हैं. इसलिए बदलाव का समय आ गया है.

तेजस्वी यादव को इंडिया गठबंधन का सीएम कैंडिडेट घोषित किये जाने के बाद फूलों का गुलदस्ता देते वीआईपी के नेता मुकेश सहनी.

20 दिन में कानून बनाकर सरकारी नौकरी देने का वादा

लालू प्रसाद के बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव लोगों से वादा कर रहे हैं कि ‘इंडिया’ गठबंधन की सरकार बनने पर 20 दिन के भीतर ऐसा कानून लायेंगे, जिससे हर परिवार से एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिलेगी. 20 महीने में नियुक्तियां पूरी हो जायेंगी. उन्होंने कहा, ‘डिग्रीधारी बेरोजगारों का दर्द अब देखा नहीं जाता. जो लोग पूछते हैं कि नौकरियों के लिए पैसा कहां से आयेगा, मैं जल्द ही अपनी विस्तृत योजना सामने रखूंगा.’

संविदाकर्मियों, सामुदायिक कार्यकर्ताओं की सेवा नियमित करेंगे – तेजस्वी यादव

तेजस्वी यहीं नहीं रुकते. वह संविदाकर्मियों व सामुदायिक कार्यकर्ताओं की सेवाओं को नियमित करने, महिलाओं को 30 हजार रुपए वार्षिक सहायता देने का आश्वासन भी दे रहे हैं.

बक्सर की जनसभा में अमित शाह का हुआ भव्य स्वागत.

शाह बोले- लोग सुनिश्चित करें कि बिहार में फिर जंगलराज न लौटे

तेजस्वी के सरकारी नौकरी देने के वादे पर अमित शाह कहते हैं, ‘वे हर परिवार को सरकारी नौकरी देने का वादा कर रहे हैं, लेकिन क्या वे बता सकते हैं कि इसके लिए बजट कहां से आयेगा? लोगों को सुनिश्चित करना होगा कि बिहार में जंगल राज फिर कभी न लौटे.’

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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