कारों के ये 5 मॉडर्न फीचर्स लगते तो स्मार्ट हैं, लेकिन यूज करना झंझट भरा है

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मॉडर्न कार फीचर्स

आज की मॉडर्न कारें फीचर्स से तो भरपूर हैं, लेकिन हर टेक्नोलॉजी काम की नहीं होती. कई स्मार्ट दिखने वाले फीचर्स रोजमर्रा में सिरदर्द बन जाते हैं. कभी सही से काम नहीं करते, तो कभी जरूरत से ज्यादा दखल देते हैं. आइए जाने कौन-कौन से हैं वो फीचर्स.

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आजकल कार कंपनियां अपनी गाड़ियों को अलग दिखाने के चक्कर में एक के बाद एक नए फीचर्स जोड़ रही हैं. सुनने में ये सब काफी शानदार लगता है, लेकिन असल में कई फीचर्स ऐसे होते हैं जो लंबे समय में कोई खास काम नहीं आते. सच कहें तो आज की कारें जरूरत से ज्यादा टेक्नोलॉजी से भर गई हैं. कई बार ये काम की चीजों से ज्यादा बेकार के तिकड़म लगते हैं. पिछले कुछ साल में कारों में ऐसे फीचर्स सामने आए हैं जो सच में काफी परेशान करने वाले हैं. आइए जाने कौन-कौन से वो फीचर्स हैं.

टच-सेंसिटिव कंट्रोल्स

अगर आपसे पूछा जाए कि ड्राइविंग के दौरान सबसे ज्यादा परेशान करने वाली चीज क्या है, तो टच-सेंसिटिव कंट्रोल्स का नाम जरूर आएगा. दिखने में ये मॉडर्न लगते हैं, लेकिन असल में ये कंपनियों के लिए सस्ते पड़ते हैं क्योंकि अलग-अलग बटन बनाने की जरूरत नहीं होती. दिक्कत ये है कि गाड़ी चलाते वक्त ये ठीक से काम भी नहीं करते. ऊपर से हमारे जैसे गर्म देश में पसीना भी इनके काम में बाधा डालता है.

फ्लश-फिटिंग डोर हैंडल्स

फ्लश-फिटिंग डोर हैंडल्स देखने में तो काफी स्टाइलिश और फ्यूचरिस्टिक लगते हैं, लेकिन जैसे ही असल जिंदगी में इस्तेमाल की बात आती है, कहानी थोड़ी बदल जाती है. धूल-भरी जगह हो, तेज बारिश हो या कार की बैटरी कमजोर हो, इन हैंडल्स को इस्तेमाल करना झंझट बन सकता है. ऊपर से कुछ में प्रेस करके फिर खींचने वाला तरीका होता है, जो पहली बार यूज करने वालों के लिए थोड़ा झंझट भरा लग सकता है.

जरूरत से ज्यादा ADAS की वार्निंग

इसमें कोई शक नहीं है कि ADAS ने ड्राइविंग को पहले से कहीं ज्यादा सेफ बना दिया है. लेकिन सच कहें तो कभी-कभी ये फीचर जरूरत से ज्यादा ‘टोकने’ लगता है. खराब या फीकी लेन मार्किंग पर बार-बार बीप करना, ट्रैफिक में लगातार अलर्ट देना और हर वक्त स्टीयरिंग में दखल देना थोड़ा थका देता है.

भारत जैसी सड़कों पर, जहां लाइनें साफ नहीं होतीं, ADAS के साथ ड्राइव करना कभी-कभी मुश्किल लग सकता है. फिर भी, ये बाकी फीचर्स से बेहतर है. बस थोड़ी बेहतर ट्यूनिंग की जरूरत है, ताकि असल जिंदगी में इसका एक्सपीरियंस और स्मूद हो सके.

ऑटो स्टार्ट/स्टॉप

ऑटो स्टार्ट/स्टॉप फीचर का मकसद तो फ्यूल बचाना था, लेकिन सच कहें तो कुछ समय बाद ज्यादातर लोग इससे परेशान ही हो जाते हैं. ये कभी भी इंजन बंद-चालू कर देता है, वो भी ऐसे समय पर जब बिल्कुल उम्मीद नहीं होती. हालत ये हो जाती है कि गाड़ी स्टार्ट करते ही इसे बंद करना आदत बन जाती है.

जेस्चर वाले पावर टेलगेट

जेस्चर वाले पावर टेलगेट सुनने में जितने स्मार्ट लगते हैं, इस्तेमाल में उतने ही परेशान करने वाले निकलते हैं. कंपनी चाहे जितना सुधार कर ले, सही टाइम पर काम करना इनके जैसे मूड पर डिपेंड करता है. आप हाथ भरे होने पर पैर हिलाते रहो, लेकिन ये या तो बहुत लेट रिएक्ट करेगा या बिल्कुल ही नहीं समझेगा.

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अंकित आनंद

लेखक के बारे में

By अंकित आनंद

शॉर्ट बायो

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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