कारों के ये 5 मॉडर्न फीचर्स लगते तो स्मार्ट हैं, लेकिन यूज करना झंझट भरा है

Published by : Ankit Anand Updated At : 23 Apr 2026 2:14 PM

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मॉडर्न कार फीचर्स

आज की मॉडर्न कारें फीचर्स से तो भरपूर हैं, लेकिन हर टेक्नोलॉजी काम की नहीं होती. कई स्मार्ट दिखने वाले फीचर्स रोजमर्रा में सिरदर्द बन जाते हैं. कभी सही से काम नहीं करते, तो कभी जरूरत से ज्यादा दखल देते हैं. आइए जाने कौन-कौन से हैं वो फीचर्स.

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आजकल कार कंपनियां अपनी गाड़ियों को अलग दिखाने के चक्कर में एक के बाद एक नए फीचर्स जोड़ रही हैं. सुनने में ये सब काफी शानदार लगता है, लेकिन असल में कई फीचर्स ऐसे होते हैं जो लंबे समय में कोई खास काम नहीं आते. सच कहें तो आज की कारें जरूरत से ज्यादा टेक्नोलॉजी से भर गई हैं. कई बार ये काम की चीजों से ज्यादा बेकार के तिकड़म लगते हैं. पिछले कुछ साल में कारों में ऐसे फीचर्स सामने आए हैं जो सच में काफी परेशान करने वाले हैं. आइए जाने कौन-कौन से वो फीचर्स हैं.

टच-सेंसिटिव कंट्रोल्स

अगर आपसे पूछा जाए कि ड्राइविंग के दौरान सबसे ज्यादा परेशान करने वाली चीज क्या है, तो टच-सेंसिटिव कंट्रोल्स का नाम जरूर आएगा. दिखने में ये मॉडर्न लगते हैं, लेकिन असल में ये कंपनियों के लिए सस्ते पड़ते हैं क्योंकि अलग-अलग बटन बनाने की जरूरत नहीं होती. दिक्कत ये है कि गाड़ी चलाते वक्त ये ठीक से काम भी नहीं करते. ऊपर से हमारे जैसे गर्म देश में पसीना भी इनके काम में बाधा डालता है.

फ्लश-फिटिंग डोर हैंडल्स

फ्लश-फिटिंग डोर हैंडल्स देखने में तो काफी स्टाइलिश और फ्यूचरिस्टिक लगते हैं, लेकिन जैसे ही असल जिंदगी में इस्तेमाल की बात आती है, कहानी थोड़ी बदल जाती है. धूल-भरी जगह हो, तेज बारिश हो या कार की बैटरी कमजोर हो, इन हैंडल्स को इस्तेमाल करना झंझट बन सकता है. ऊपर से कुछ में प्रेस करके फिर खींचने वाला तरीका होता है, जो पहली बार यूज करने वालों के लिए थोड़ा झंझट भरा लग सकता है.

जरूरत से ज्यादा ADAS की वार्निंग

इसमें कोई शक नहीं है कि ADAS ने ड्राइविंग को पहले से कहीं ज्यादा सेफ बना दिया है. लेकिन सच कहें तो कभी-कभी ये फीचर जरूरत से ज्यादा ‘टोकने’ लगता है. खराब या फीकी लेन मार्किंग पर बार-बार बीप करना, ट्रैफिक में लगातार अलर्ट देना और हर वक्त स्टीयरिंग में दखल देना थोड़ा थका देता है.

भारत जैसी सड़कों पर, जहां लाइनें साफ नहीं होतीं, ADAS के साथ ड्राइव करना कभी-कभी मुश्किल लग सकता है. फिर भी, ये बाकी फीचर्स से बेहतर है. बस थोड़ी बेहतर ट्यूनिंग की जरूरत है, ताकि असल जिंदगी में इसका एक्सपीरियंस और स्मूद हो सके.

ऑटो स्टार्ट/स्टॉप

ऑटो स्टार्ट/स्टॉप फीचर का मकसद तो फ्यूल बचाना था, लेकिन सच कहें तो कुछ समय बाद ज्यादातर लोग इससे परेशान ही हो जाते हैं. ये कभी भी इंजन बंद-चालू कर देता है, वो भी ऐसे समय पर जब बिल्कुल उम्मीद नहीं होती. हालत ये हो जाती है कि गाड़ी स्टार्ट करते ही इसे बंद करना आदत बन जाती है.

जेस्चर वाले पावर टेलगेट

जेस्चर वाले पावर टेलगेट सुनने में जितने स्मार्ट लगते हैं, इस्तेमाल में उतने ही परेशान करने वाले निकलते हैं. कंपनी चाहे जितना सुधार कर ले, सही टाइम पर काम करना इनके जैसे मूड पर डिपेंड करता है. आप हाथ भरे होने पर पैर हिलाते रहो, लेकिन ये या तो बहुत लेट रिएक्ट करेगा या बिल्कुल ही नहीं समझेगा.

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लेखक के बारे में

By Ankit Anand

अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.

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