TVS iQube vs Orbiter: मई 2026 में खूब बिकीं TVS की ये दो इलेक्ट्रिक स्कूटर, जानें आपके लिए सही कौन?

TVS iQube vs Orbiter (Photo: AI Generated)
TVS iQube vs Orbiter: अगर आप TVS का नया इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने का सोच रहे हैं और iQube या Orbiter के बीच उलझे हुए हैं, तो यह कम्पैरिजन आपके काम की है. एक तरफ ज्यादा प्रीमियम एक्सपीरियंस और स्मार्ट फीचर्स हैं, तो दूसरी तरफ कम कीमत में डेली यूज के लिए बढ़िया पैकेज.
TVS मोटर कंपनी फिलहाल भारत की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक स्कूटर कंपनियों में से एक बन चुकी है. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि कंपनी ने मई 2026 में 42,459 यूनिट्स की बिक्री के साथ टॉप पर जगह बनाई है. इसने बाजार में Bajaj Auto, Ather Energy और Hero MotoCorp जैसी बड़ी कंपनियों को कड़ी टक्कर दी है. फिलहाल कंपनी के पास इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में दो मॉडल मौजूद हैं. पहला TVS iQube और दूसरा Orbiter. अगर आप भी इनमें से किसी एक को लेने की सोच रहे हैं लेकिन कन्फ्यूज हैं, तो टेंशन लेने की जरूरत नहीं है. हमने आपके लिए दोनों स्कूटर्स का आसान और डिटेल्ड कम्पैरिजन किया है, ताकि आप सही फैसला ले सकें. चलिए शुरू करते हैं.
TVS iQube vs Orbiter: डिजाइन
TVS iQube का लुक ज्यादा प्रीमियम और फैमिली-फ्रेंडली लगता है. वहीं Orbiter का डिजाइन ज्यादा सिंपल और बजट-फोकस्ड है. iQube में आपको क्लीन बॉडी लाइनें, मैच्योर डिजाइन और बेहतर फिट-फिनिश मिलता है. वहीं Orbiter को खास तौर पर प्रैक्टिकल और सस्ता ऑप्शन रखने के लिए डिजाइन किया गया है. इसका लाइट और मिनिमल लुक डेली राइड को ध्यान में रखकर बनाया गया है. कुल मिलाकर कहें तो, अगर आपको स्टाइल और प्रीमियम फील चाहिए तो iQube बेहतर होगा. लेकिन अगर आपका फोकस बजट और सिंपल यूज है तो Orbiter ज्यादा सही ऑप्शन है.
TVS iQube vs Orbiter: बैटरी और रेंज
TVS iQube में 2.2 kWh 3.1 kWh, 3.5 kWh, 4.7 kWh and 5.3 kWh तक के वेरिएंट मिलते हैं. इसकी रेंज भी काफी अच्छी है. एक बार फुल चार्ज करने पर यह लगभग 94 km से लेकर 212 km तक चल सकता है. हालांकि इसमें फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट नहीं मिलता. 0 से 80% चार्ज होने में करीब 4 घंटे 18 मिनट तक लग सकते हैं. ये वेरिएंट-वेरिएंट पर डिपेंड करता है.
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वहीं दूसरी तरफ TVS Orbiter एक बजट-फ्रेंडली इलेक्ट्रिक स्कूटर है, जो सिर्फ 1.8 kWh और 3.1 kWh ऑप्शन के साथ आता है. इसकी रेंज भी iQube के मुकाबले थोड़ी कम है, जो 86 km से लेकर 158 km तक जाती है. लेकिन चार्जिंग के मामले में यह थोड़ा तेज है. छोटी बैटरी लगभग 2 घंटे 20 मिनट में 80% तक चार्ज हो जाती है और बड़ी बैटरी को करीब 4 घंटे 10 मिनट लगते हैं.
TVS iQube vs Orbiter: सेफ्टी पैकेज
सेफ्टी के मामले में TVS iQube और Orbiter दोनों ही स्कूटर्स अच्छे फीचर्स के साथ आते हैं, लेकिन दोनों का फोकस थोड़ा अलग है. iQube ज्यादा एडवांस टेक्नोलॉजी पर जोर देता है. वहीं Orbiter को रोजमर्रा की प्रैक्टिकल यूज के हिसाब से बनाया गया है.
iQube में आपको रेगेनरेटिव ब्रेकिंग, ट्यूबलेस टायर्स, डे/नाइट डिस्प्ले मोड, जियोफेंसिंग, एंटी-थेफ्ट अलर्ट, क्रैश और फॉल डिटेक्शन जैसे स्मार्ट सेफ्टी फीचर्स मिलते हैं. वहीं TVS Orbiter में भी जरूरी सेफ्टी फीचर्स दिए गए हैं, जैसे एंटी-थेफ्ट और जियोफेंस अलर्ट, क्रैश और फॉल डिटेक्शन, टॉव अलर्ट और पानी-धूल से बचाव की सुविधा. इसमें 14-इंच का बड़ा फ्रंट अलॉय व्हील और 34 लीटर का स्टोरेज भी मिलता है. साथ ही इसे 600 से ज्यादा सेफ्टी टेस्ट्स से भी गुजारा गया है.
TVS iQube vs Orbiter: टेक्नोलॉजी और फीचर्स
iQube में Smart LED हेडलैंप DRLs के साथ, HMI कंट्रोलर, TFT डिस्प्ले, 32-लीटर स्टोरेज और SmartXonnect जैसे स्मार्ट फीचर्स मिलते हैं. इसमें म्यूजिक कंट्रोल, कॉल अलर्ट, OTA अपडेट, पार्किंग और रिवर्स असिस्ट, ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन, TPMS, इनकॉग्निटो मोड और USB चार्जिंग जैसी खूबियां भी हैं.
वहीं Orbiter भी फीचर्स के मामले में पीछे नहीं है. इसमें LED हेडलैंप, SmartXonnect, नेविगेशन, कॉल और मैसेज अलर्ट, OTA अपडेट, लाइव लोकेशन शेयरिंग, क्रूज कंट्रोल, हिल-होल्ड असिस्ट, रिवर्स पार्किंग असिस्ट, USB चार्जिंग, Eco और City राइड मोड, LCD क्लस्टर और DTE जैसी सुविधाएं मिलती हैं.
TVS iQube vs Orbiter: कीमत
TVS iQube की एक्स-शोरूम कीमत 94,434 रुपये है, लेकिन अगर आप BaaS (Battery as a Service) ऑप्शन चुनते हैं तो यह सिर्फ 59,999 रुपये में मिल जाता है. वहीं दूसरी तरफ TVS Orbiter की कीमत 84,500 रुपये है, जबकि BaaS के साथ यह सिर्फ 49,999 रुपये में उपलब्ध हो जाता है.
TVS iQube vs Orbiter: आपको कौन सा खरीदना चाहिए?
TVS iQube थोड़ी प्रीमियम प्राइस पर आता है क्योंकि इसमें ज्यादा फीचर्स, बेहतर डिजाइन और एडवांस टेक्नोलॉजी मिलती है. वहीं Orbiter को खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाया गया है जो बजट में एक सिंपल और काम का इलेक्ट्रिक स्कूटर चाहते हैं. इसका डिजाइन सीधा-साधा है और रोजमर्रा की सिटी राइडिंग के लिए यह काफी कम्फर्टेबल और प्रैक्टिकल है.
अब दोनों में से कौन सा बेहतर है, ये आपकी जरूरत पर डिपेंड करता है. अगर आपको प्रीमियम लुक, नए फीचर्स और टेक्नोलॉजी चाहिए तो iQube सही रहेगा. लेकिन अगर आपका फोकस कम कीमत, इजी यूज और डेली कम्यूट है तो Orbiter ज्यादा बेहतर ऑप्शन है.
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By अंकित आनंद
शॉर्ट बायो
अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.
काम के बारे में
अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.
उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.
पढ़ाई और करियर
बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.
प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.
विजन
अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.
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