कार में पुश स्टार्ट-स्टॉप फीचर के क्या हैं फायदे और नुकसान? जान लें जरूरी बातें
Published by : Ankit Anand Updated At : 10 Feb 2026 5:10 PM
पुश स्टार्ट-स्टॉप बटन (Photo: Freepik)
Push Start Stop System: कारों में पुश स्टार्ट-स्टॉप फीचर धीरे-धीरे पॉपुलर हो रहा है. लेकिन हर चीज की तरह इसके भी दो पहलू हैं. एक तरफ फायदे हैं, तो दूसरी तरफ कुछ नुकसान भी. आइए जानते हैं, ये फीचर वास्तव में कितना काम का है और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
Push Start Stop System: आजकल की कारों में पुश स्टार्ट-स्टॉप फीचर धीरे-धीरे नॉर्मल होते जा रहे हैं. पहले तो ये सिर्फ महंगी गाड़ियों में ही देखने मिलती थीं, लेकिन अब ये छोटी हैचबैक से लेकर बड़ी SUV तक में मिलने लगा है. पहले जहां कार स्टार्ट करने के लिए चाबी घुमाते थे, अब बस कार के अंदर की-फोब होना चाहिए और एक बटन दबाते ही गाड़ी स्टार्ट या बंद हो जाती है. सुनने और इस्तेमाल करने में ये फीचर काफी मॉडर्न और प्रीमियम लगता है. लेकिन हर फीचर की तरह ये भी पूरी तरह परफेक्ट नहीं है. आइए जल्दी से जानते हैं इसके कुछ फायदे और नुकसान के बारे में.
पुश स्टार्ट-स्टॉप फीचर के फायदे
सबसे बड़ा फायदा है कन्वीनियंस यानी सुविधा. हर बार आपको चाबी ढूंढने की झंझट नहीं रहती. बस कार में बैठिए, ब्रेक या क्लच दबाइए और बटन दबा दीजिए. हो गयी गाड़ी आपकी स्टार्ट. खासकर शहर के ट्रैफिक में ये फीचर बड़े काम का लगता है.
साथ ही ये सिक्योरिटी के लिहाज से भी थोड़ा बेहतर होता है. क्योंकि कार तभी स्टार्ट होती है जब की-फॉब आसपास हो. इसलिए पुराना हॉट-वायरिंग वाला तरीका लगभग नामुमकिन हो जाता है. ज्यादातर कारों में इसके साथ इंजन इम्मोबिलाइजर भी मिलता है.
एक छोटा लेकिन काम का फायदा ये भी है कि इसमें घिसावट कम होती है. पुरानी चाबियों में मैकेनिकल पार्ट्स होते थे, जो समय के साथ घिस जाते थे. Push Start सिस्टम इलेक्ट्रॉनिक्स पर चलता है. इसलिए मूविंग पार्ट्स कम होते हैं और लंबे समय तक दिक्कत कम आती है.
पुश स्टार्ट-स्टॉप फीचर के नुकसान
पुश स्टार्ट-स्टॉप फीचर में कुछ परेशानियां भी हैं. एक आम गलती ये होती है कि लोग इंजन बंद करना भूल जाते हैं. ये जितना लगता है, उससे ज्यादा होता है. क्योंकि इसमें कोई की (Key) निकालने की चीज नहीं है. कई ड्राइवर सोचते हैं कि कार बंद हो गई. हाइब्रिड जैसी शांत कारों में, ये बिलकुल भी नोटिस नहीं होता है.
स्मार्ट की फॉब खो जाना कोई सस्ता मजाक नहीं है. इसे रिप्लेस करने का मतलब है डीलरशिप के पास जाना और फिर से प्रोग्राम करवाना. इसमें खर्चा भी अच्छा-खासा लग जाता है. इसके अलावा, अगर वारंटी खत्म हो जाए तो सिस्टम से जुड़ी रिपेयर भी महंगी पड़ सकती हैं.
फिर आता है इलेक्ट्रॉनिक्स पर निर्भर होने का मसला. अगर कार की बैटरी कमजोर या डेड हो जाए, तो पुश स्टार्ट सिस्टम काम करने से इनकार कर देगा. ज्यादातर कारों में बैकअप तरीका जरूर होता है, लेकिन कई मालिकों को इसके बारे में पता ही नहीं होता. और ऐसे में इमरजेंसी में पैनिक होना स्वाभाविक है.
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By Ankit Anand
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