90% ड्राइवर करते हैं ये गलती, क्लच की उम्र हो जाती है आधी

Edited by Rajeev Kumar
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बार-बार क्लच खराब होने की वजह क्या है // एआई-जेनरेटेड रिप्रेजेंटेशनल इलस्ट्रेशन

गलत ड्राइविंग आदतें क्लच और गियरबॉक्स को समय से पहले खराब कर सकती हैं. जानिए किन आसान उपायों से बढ़ा सकते हैं क्लच की उम्र और घटा सकते हैं रिपेयर का खर्च.

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अगर आप मैनुअल कार चलाते हैं और अक्सर ट्रैफिक में फंसते हैं, तो आपकी ड्राइविंग की एक छोटी-सी गलती क्लच और गियरबॉक्स की उम्र को तेजी से कम कर सकती है. क्लच किसी भी वाहन का ऐसा हिस्सा है जो हर सफर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है. यही वजह है कि इसके खराब होने पर मरम्मत का खर्च भी काफी भारी पड़ सकता है. खासकर शहरों में जहां बार-बार गाड़ी रोकनी और चलानी पड़ती है, वहां क्लच सिस्टम लगातार दबाव में रहता है. लेकिन अच्छी बात यह है कि कुछ आसान ड्राइविंग आदतें अपनाकर आप क्लच की लाइफ बढ़ा सकते हैं और लंबे समय तक महंगे रिपेयर बिल से बच सकते हैं.

आधा क्लच दबाकर चलाना पड़ सकता है महंगा

कई ड्राइवरों की आदत होती है कि वे गाड़ी चलाते समय क्लच पेडल पर हल्का दबाव बनाए रखते हैं. इसे आम भाषा में “राइडिंग द क्लच” कहा जाता है. इससे क्लच प्लेट पूरी तरह लॉक नहीं हो पाती और लगातार घर्षण होता रहता है. नतीजा यह होता है कि क्लच जल्दी घिसने लगता है और ओवरहीटिंग की समस्या भी पैदा हो सकती है. गियर बदलने के बाद क्लच को पूरी तरह छोड़ देना बेहतर माना जाता है.

सही समय पर गियर बदलना है बेहद जरूरी

गियरबॉक्स की सेहत काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि आप कब और कैसे गियर बदलते हैं. जरूरत से ज्यादा आरपीएम पर या गलत स्पीड में गियर बदलने से ट्रांसमिशन सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. स्मूद तरीके से और सड़क की स्थिति के अनुसार गियर बदलने से न केवल वाहन बेहतर चलता है, बल्कि क्लच और गियरबॉक्स की उम्र भी बढ़ती है. यह भी पढ़ें: कार में हमेशा रखें ये 5 जरूरी चीजें, इमरजेंसी में आएंगी काम

ढलान पर क्लच से गाड़ी रोकना नुकसानदायक

कई लोग चढ़ाई या ढलान पर वाहन को रोकने के लिए क्लच का सहारा लेते हैं. यह आदत क्लच प्लेट पर लगातार दबाव डालती है और उसे तेजी से घिसती है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसी स्थिति में ब्रेक का इस्तेमाल करें और आगे बढ़ते समय नियंत्रित तरीके से क्लच छोड़ें.

ट्रैफिक को समझकर चलाने से कम होगा क्लच का इस्तेमाल

भीड़भाड़ वाली सड़कों पर बार-बार क्लच दबाने और गियर बदलने से इसकी लाइफ कम हो सकती है. यदि आप सामने के ट्रैफिक को पहले से समझकर वाहन चलाते हैं और पर्याप्त दूरी बनाए रखते हैं, तो अनावश्यक ब्रेकिंग और गियर शिफ्टिंग से बच सकते हैं. इससे ड्राइविंग भी आरामदायक रहती है और वाहन के जरूरी पार्ट्स पर कम दबाव पड़ता है.

गियर लीवर पर हाथ रखना भी बन सकता है समस्या

बहुत से ड्राइवर सफर के दौरान लगातार गियर लीवर पर हाथ रखे रहते हैं. देखने में यह सामान्य आदत लग सकती है, लेकिन इससे गियरबॉक्स के अंदर मौजूद पार्ट्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. लंबे समय तक ऐसा करने से अंदरूनी हिस्सों में घिसावट बढ़ सकती है. गियर बदलने के बाद हाथ को स्टीयरिंग पर रखना बेहतर होता है.

चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज न करें

अगर गियर बदलने में कठिनाई हो रही है, अजीब आवाजें सुनाई दे रही हैं, क्लच स्लिप कर रहा है या जलने जैसी गंध आ रही है, तो यह किसी बड़ी समस्या का संकेत हो सकता है. समय रहते जांच कराने से महंगी मरम्मत से बचा जा सकता है. साथ ही नियमित सर्विसिंग और गियरबॉक्स ऑयल की जांच भी वाहन के प्रदर्शन को बेहतर बनाए रखती है.

क्लच और गियरबॉक्स की उम्र केवल वाहन की गुणवत्ता पर नहीं, बल्कि ड्राइवर की आदतों पर भी निर्भर करती है. थोड़ी सावधानी, सही ड्राइविंग तकनीक और समय पर रखरखाव से इन महंगे पुर्जों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. इससे न केवल गाड़ी बेहतर परफॉर्म करती है, बल्कि ईंधन की बचत और रखरखाव खर्च में भी कमी आती है. यह भी पढ़ें: कार की माइलेज बढ़ानी है? ये 7 गलतियां तुरंत छोड़ दें, बचेगा पेट्रोल-डीजल

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Rajeev Kumar

लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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