सीखने की कोई उम्र नहीं: 90 वर्ष की उम्र में दी गीता की परीक्षा, आचार्य सीताराम साहू बने मिसाल
90 वर्ष की उम्र में परीक्षा देते आचार्य सीताराम साहू
Begusarai News : बेगूसराय के 90 वर्षीय आचार्य सीताराम साहू ने जीडी कॉलेज में आयोजित इग्नू की श्रीमद्भगवद्गीता परीक्षा में शामिल होकर शिक्षा के प्रति अपनी लगन का परिचय दिया. उन्होंने युवाओं को धार्मिक और सांस्कृतिक साहित्य के अध्ययन के लिए प्रेरित करते हुए सीखने की कोई उम्र नहीं होने का संदेश दिया.
Begusarai News : सीखने की कोई उम्र नहीं होती. इस कहावत को बेगूसराय के 90 वर्षीय आचार्य सीताराम साहू ने एक बार फिर सच साबित कर दिया है. उम्र के इस पड़ाव पर भी उन्होंने शिक्षा और धार्मिक अध्ययन के प्रति अपनी गहरी रुचि बनाए रखते हुए जीडी कॉलेज में आयोजित इग्नू की संस्कृत विषय से श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय की परीक्षा में भाग लिया.
उम्र नहीं, जज्बा होता है मायने
जहां आज कई युवा परीक्षा के नाम से घबरा जाते हैं, वहीं आचार्य सीताराम साहू ने अपनी लगन, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति से सभी को प्रेरित किया है. सफेद बाल, चेहरे पर अनुभव की लकीरें और आंखों में ज्ञान की चमक लिए वे लगातार परीक्षा केंद्र पहुंचते रहे. उनकी यह प्रतिबद्धता लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है.
9 जून से लगातार दे रहे थे परीक्षा
आचार्य सीताराम साहू ने बताया कि उनकी उम्र लगभग 90 वर्ष हो चुकी है, लेकिन पढ़ाई के प्रति उनका उत्साह आज भी बरकरार है. उन्होंने कहा कि वे श्रीमद्भगवद्गीता का अध्ययन कर चुके हैं और 9 जून से लगातार परीक्षा में शामिल हो रहे थे. गुरुवार को उनकी अंतिम परीक्षा थी.
धार्मिक ग्रंथ जीवन को देते हैं सही दिशा
उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन व्यक्ति को जीवन में सही मार्ग दिखाता है. युवाओं को भी अपने धार्मिक और सांस्कृतिक साहित्य के प्रति रुचि विकसित करनी चाहिए. आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन भी आवश्यक है, ताकि जीवन में नैतिक मूल्यों और संस्कारों का विकास हो सके.
युवाओं के लिए प्रेरणा बने आचार्य
आचार्य सीताराम साहू की यह पहल केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणादायक संदेश है. उनकी उपलब्धि यह साबित करती है कि शिक्षा का सफर कभी समाप्त नहीं होता और सीखने की ललक व्यक्ति को जीवनभर सक्रिय, जागरूक और ऊर्जावान बनाए रखती है.
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लेखक के बारे में
By Nikhil Anurag
मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर पलायन कर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.
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