World News : क्या ट्रंप का अगला निशाना क्यूबा है? जहां पहले से जारी है अमेरिका की ऊर्जा नाकाबंदी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस साल की शुरुआत में वेनेजुएला पर आक्रमण किया. इसके बाद तुरंत ग्रीनलैंड पर आक्रमण की धमकी दी और ईरान पर तो इस्राइल के साथ मिलकर हमला ही कर दिया. इस बीच वह कई बार क्यूबा पर मैत्रीपूर्ण कब्जे की बात कह चुके हैं और अब उस पर रूस सेना भेजने का आरोप लगा रहे हैं. वहीं, क्यूबा के राष्ट्रपति ने अमेरिका को द्वीप पर हमला करने या उन्हें पद से हटाने की कोशिश करने के खिलाफ चेतावनी दी है...
World News : क्यूबा इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन आर्थिक दौर से गुजर रहा है. कैरिबियाई सागर का यह देश एक गंभीर ऊर्जा संकट, उच्च मुद्रास्फीति और बुनियादी वस्तुओं की कमी का सामना कर रहा है. लेकिन इस समय एक देश के तौर पर उसकी अस्मिता के सामने इन संकटों से भी बड़ा एक संकट मुंह बाये खड़ा है. यह है अमेरिकी कब्जे का संकट. जबकि, क्यूबा पहले से ही अमेरिका द्वारा द्वीप और उसकी कम्युनिस्ट-शासित सरकार पर लगायी गयी ऊर्जा नाकाबंदी के दौर से गुजर रहा है.
ट्रंप का क्यूबा को लेकर नया दावा
ट्रंप प्रशासन ने दावा किया है कि क्यूबा ने रूस को लगभग 5,000 सैनिक भेजे हैं. अधिकारियों का कहना है कि इस कथित तैनाती से हवाना और मॉस्को के बीच सैन्य सहयोग और गहरा सकता है. इस दावे से अमेरिका और क्यूबा के बीच तनाव बढ़ गया है. अमेरिका सीधे तौर पर यह संकेत दे रहा है कि क्यूबा की मौजूदा सरकर रूस को मुहैया करा और राजनयिक व राजनीतिक समर्थन भी दे रही है. अमेरिका का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब व्हाइट हाउस ने हवाना में नेतृत्व परिवर्तन के लिए दबाव अभियान तेज कर दिया है और प्रभावी रूप से इस कम्युनिस्ट शासित देश को तेल की आपूर्ति तो और पहले से बाधित कर रखी है.
अमेरिकी ऊर्जा नाकाबंदी से चरमराई अर्थव्यवस्था
अमेरिकी ऊर्जा नाकाबंदी और ईंधन की कमी के कारण क्यूबा में अब दिन के 22 घंटे बिजली कटौती होती है और केवल दो घंटे ही लाइट आती है. बिजली और ईंधन की कमी ने देश में पर्यटन को पूरी तरह ठप कर दिया है, जो कि यहां की एक बड़ी आबादी की आय का साधन है. हाल में आई रिपोर्ट्स बताती हैं कि क्यूबा में पिछले वर्ष की तुलना में फरवरी में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के आगमन में 56 प्रतिशत की गिरावट आई है. इस देश के कई इलाके पानी की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं दूरदराज के इलाकों में हमेशा से ही मुश्किलों से भरी रहने वाली चिकित्सा सेवाएं अब बिजली कटौती और संचार व्यवस्था की कमी के कारण लगभग असंभव हो गयी हैं.दरअसल, क्यूबा अपनी खपत का केवल 40 प्रतिशत ईंधन ही उत्पादित करता है और जनवरी की शुरुआत में अमेरिकी सेना के वेनेजुएला पर हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने के बाद क्यूबा को वेनेजुएला से महत्वपूर्ण तेल खेप मिलनी बंद हो गयी.
क्यूबा लड़ने के लिए तैयार
जनवरी 2026 से लेकर अब तक क्यूबा को सिर्फ रूस से तेल की एक खेप मिली है . दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किये थे, जिसके बाद से मार्च में क्यूबा का राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड ध्वस्त हो गया और उसके 10 मिलियन लोगों को बार-बार बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है. अस्पतालों की गहन देखभाल इकाइयों में बिजली चली गयी है और परिवहन एवं उद्योग ठप हो गये हैं. इस बीच ट्रंप का बयान आया -‘मुझे विश्वास है कि मुझे क्यूबा पर कब्जा करने का सम्मान मिलेगा.’ वहीं क्यूबा अपनी बढ़ती समस्याओं के लिए अमेरिका द्वारा लगाये गये ऊर्जा प्रतिबंध को जिम्मेदार बता रहा है. वैश्विक समाचार संगठन एपी की एक रिपोर्ट के मुताबिक क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने कहा है कि ‘अमेरिका के पास द्वीप पर सैन्य हमला करने या उन्हें पद से हटाने का प्रयास करने का कोई वैध कारण नहीं है. अगर ऐसा हुआ, तो लड़ाई होगी, संघर्ष होगा, हम अपनी रक्षा करेंगे और अगर हमें मरना भी पड़ा, तो हम मरेंगे, क्योंकि हमारे राष्ट्रगान में कहा गया है- ‘मातृभूमि के लिए मरना ही जीना है.’
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लेखक के बारे में
By Preeti Singh Parihar
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