Venezuela US Crisis: साल 2026 की शुरुआत दुनिया के लिए चौंकाने वाली रही. लैटिन अमेरिका में लंबे समय से सुलग रहा अमेरिका और वेनेजुएला का विवाद आखिरकार खुली कार्रवाई में बदल गया. 3 जनवरी 2026 को अमेरिका ने वेनेजुएला में सीधा सैन्य ऑपरेशन किया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस के साथ हिरासत में ले लिया. यह कदम सिर्फ एक देश पर हमला नहीं था, बल्कि यह संकेत था कि अमेरिका अब शब्दों और प्रतिबंधों से आगे बढ़ चुका है.
Venezuela US Crisis in Hindi: ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व
अमेरिकी सेना ने इस कार्रवाई को ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व नाम दिया. यह एक सीमित लेकिन सीधा सैन्य ऑपरेशन था. अमेरिका ने दावा किया कि यह ऑपरेशन पूरी योजना और खुफिया जानकारी के आधार पर किया गया. इस हमले के साथ ही अमेरिका ने कई सालों से चली आ रही आर्थिक पाबंदियों की नीति को पीछे छोड़ते हुए पहली बार सैन्य रास्ता अपनाया. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का कहना है कि निकोलस मादुरो ड्रग तस्करी से जुड़े हुए हैं और उन्होंने 2024 का राष्ट्रपति चुनाव धोखे से जीता. अमेरिका पहले ही मादुरो पर 50 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित कर चुका था. वॉशिंगटन का दावा है कि वेनेजुएला की सरकार अब एक अपराधी ढांचा बन चुकी है, जो अमेरिका और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरा है.
Venezuela US Crisis Oil Politics: राजनीति या तेल का खेल?
इस हमले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि क्या यह सब केवल लोकतंत्र और कानून की लड़ाई है या इसके पीछे तेल की बड़ी कहानी छिपी है. वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है और यही बात इस पूरे विवाद की जड़ मानी जा रही है. OPEC के आंकड़ों के मुताबिक, वेनेजुएला के पास 303 अरब बैरल से ज्यादा तेल भंडार है, जो दुनिया के कुल तेल भंडार का करीब 17 प्रतिशत है. यह भंडार सऊदी अरब के 267 अरब बैरल से भी ज्यादा है और अमेरिका के तेल भंडार से छह गुना बड़ा है.
सीबीएस न्यूज के अनुसार, यह तेल मुख्य रूप से ओरिनोको ऑयल बेल्ट में है, जो करीब 21 हजार वर्ग मील में फैला हुआ है. इतना तेल होने के बावजूद वेनेजुएला की हालत खराब है. अमेरिकी प्रतिबंधों और निवेश की कमी के कारण देश केवल 10 लाख बैरल तेल रोजाना निकाल पा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पाबंदियां हटें और विदेशी कंपनियां लौटें, तो उत्पादन कई गुना बढ़ सकता है. (Venezuela US Crisis Oil Politics in Hindi)
बर्नी सैंडर्स का विरोध
अमेरिका के सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने इस हमले का खुलकर विरोध किया. उन्होंने एक्स पर लिखा कि राष्ट्रपति ट्रंप को किसी दूसरे देश पर हमला करने का अधिकार नहीं है. सैंडर्स ने कहा कि जब अमेरिका के 60 प्रतिशत लोग तनख्वाह से तनख्वाह तक जी रहे हैं, तब सरकार को देश के अंदर की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, न कि वेनेजुएला को बिग ऑयल के लिए चलाने की कोशिश करनी चाहिए.
ट्रंप का बयान- हम वेनेजुएला चलाएंगे
डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि अमेरिका कुछ समय के लिए वेनेजुएला को चलाएगा और वहां के तेल संसाधनों का इस्तेमाल करेगा. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि लैटिन अमेरिका के दूसरे देशों को अमेरिका की बात माननी होगी. अमेरिकी सरकार का कहना है कि यह हमला तेल के लिए नहीं बल्कि सुरक्षा कारणों से किया गया. अमेरिका के मुताबिक, मादुरो सरकार ड्रग तस्करी, आतंकियों को शरण देने और मानव तस्करी में शामिल थी. इसके अलावा, लाखों वेनेजुएलावासियों के अमेरिका की ओर पलायन को भी सीमा सुरक्षा का मामला बताया गया.
पुरानी दुश्मनी: चावेज से मादुरो तक
वेनेजुएला और अमेरिका के रिश्ते सालों से खराब रहे हैं. ह्यूगो चावेज के दौर में तेल कंपनियों का राष्ट्रीयकरण हुआ और अमेरिका विरोधी नीति अपनाई गई. चावेज के बाद निकोलस मादुरो ने भी वही रास्ता चुना. अमेरिका और पश्चिमी देशों ने वेनेजुएला के विपक्ष को समर्थन दिया, जिससे देश के अंदर टकराव और बढ़ गया. सीबीएस न्यूज के मुताबिक, 2005 से अमेरिका लगातार वेनेजुएला पर पाबंदियां लगाता रहा है. 2019 में राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA की संपत्तियां फ्रीज कर दी गईं और अमेरिकी कंपनियों को कारोबार से रोक दिया गया. हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने तेल से जुड़ी चार कंपनियों और टैंकरों पर नए प्रतिबंध लगाए.
तेल बाजार पर असर क्यों नहीं पड़ा?
विशेषज्ञों के मुताबिक, वेनेजुएला का उत्पादन पहले ही कम है, इसलिए हमले का असर तेल बाजार पर ज्यादा नहीं पड़ा. शनिवार को वेस्ट टेक्सास क्रूड की कीमत 57.32 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि जनवरी में यह करीब 80 डॉलर थी. अमेरिका के पास बड़ा तेल भंडार और घरेलू उत्पादन होने से बाजार संतुलित रहा. अगर अमेरिका समर्थक सरकार बनती है, तो Chevron, ExxonMobil और ConocoPhillips जैसी कंपनियां वेनेजुएला लौट सकती हैं. इससे लंबे समय में तेल उत्पादन और वैश्विक बाजार पर असर पड़ सकता है.
चीन और रूस का एंगल
वेनेजुएला ने रूस, चीन और ईरान से मजबूत रिश्ते बनाए थे. अमेरिका इसे अपने क्षेत्र में सीधी चुनौती मानता है. रूस ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि वेनेजुएला की संप्रभुता का सम्मान होना चाहिए. वहीं चीन दक्षिण अमेरिका में अपनी आर्थिक पकड़ लगातार मजबूत कर रहा है. मादुरो की गिरफ्तारी के बाद उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने खुद को राष्ट्रपति घोषित कर दिया है और अमेरिका के खिलाफ संघर्ष जारी रखने की बात कही है. वेनेजुएला अब सत्ता की लड़ाई, विदेशी दखल और तेल की राजनीति के सबसे नाजुक मोड़ पर खड़ा है.
ये भी पढ़ें:
US Strike on Venezuela: 150 विमान, 30 मिनट, ‘किले’ में छिपे निकोलस मादुरो को अमेरिका ने कैसे दबोचा

