US Exit International Organizations Donald Trump Retreats Global Cooperation: संयुक्त राज्य अमेरिका अब वैश्विक सहयोग से और पीछे हटता नजर आ रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (स्थानीय समय) को एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत संयुक्त राज्य अमेरिका को उन अंतरराष्ट्रीय संगठनों, सम्मेलनों और संधियों से बाहर निकलने का निर्देश दिया गया है, जो अमेरिका के “हितों के विपरीत” हैं. इनमें वह संयुक्त राष्ट्र संधि भी शामिल है, जो अंतरराष्ट्रीय जलवायु वार्ताओं की आधारशिला मानी जाती है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार, 7 जनवरी 2026) को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए. इसके तहत 66 संगठनों, एजेंसियों और आयोगों को अमेरिकी समर्थन निलंबित कर दिया गया है. यह घोषणा व्हाइट हाउस द्वारा साझा किए गए राष्ट्रपति ज्ञापनों (Presidential Memoranda) के बयान में की गई, जिसमें 35 गैर-संयुक्त राष्ट्र (Non-UN) संगठनों और 31 संयुक्त राष्ट्र (UN) निकायों से हटने का उल्लेख किया गया है.
अमेरिका जिन इंटरनेशनल संगठनों से बाहर हो रहा है, उनमें गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठनों में भारत और फ्रांस के नेतृत्व वाला इंटरनेशनल सोलर एलायंस (International Solar Alliance) शामिल है. इसके अलावा इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंज़र्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) और इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) जैसे प्रमुख पर्यावरणीय संगठन भी इस सूची में हैं. यह कदम ट्रंप प्रशासन द्वारा सभी अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भागीदारी और फंडिंग की समीक्षा के निर्देश के बाद उठाया गया. इसमें संयुक्त राष्ट्र से जुड़े निकाय, जैसे जनसंख्या एजेंसी भी शामिल हैं. यह जानकारी एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर दी, क्योंकि यह राष्ट्रपति का फैसला सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं किया गया था.
किन संयुक्त राष्ट्र एजेंसी से बाहर होगा अमेरिका?
संयुक्त राष्ट्र से जुड़े एजेंसियां, आयोग और सलाहकार पैनल, जो जलवायु, श्रम और अन्य मुद्दों पर काम करते हैं, को ट्रंप प्रशासन ने इन मुद्दों को विविधता और “वोक” (woke) पहलों को बढ़ावा देने वाला करार दिया है. जिन प्रमुख संयुक्त राष्ट्र संगठनों से अमेरिका ने खुद को अलग किया है, उनमें डिपार्टमेंट ऑफ इकनॉमिक एंड सोशल अफेयर्स, इंटरनेशनल लॉ कमीशन, इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर, पीसबिल्डिंग कमीशन, यूएन एनर्जी, यूएन पॉपुलेशन फंड और यूएन वाटर शामिल हैं.
गैर-संयुक्त राष्ट्र निकाय कौन कौन से?
वहीं, गैर-संयुक्त राष्ट्र निकायों ,संगठनों और एजेंसियों से अमेरिका बाहर निकलने जा रहा है, उनमें इंटरनेशनल एनर्जी फोरम, इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी, पार्टनरशिप फॉर अटलांटिक कोऑपरेशन और ग्लोबल काउंटरटेररिज्म फोरम, कार्बन फ्री एनर्जी कॉम्पैक्ट, यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी, इंटरनेशनल कॉटन एडवाइजरी कमेटी, इंटरनेशनल ट्रॉपिकल टिंबर ऑर्गेनाइजेशन, पार्टनरशिप फॉर अटलांटिक कोऑपरेशन, पैन-अमेरिकन इंस्टीट्यूट फॉर जियोग्राफी एंड हिस्ट्री, इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ आर्ट्स काउंसिल्स एंड कल्चर एजेंसिज और इंटरनेशनल लीड एंड जिंक स्टडी ग्रुप सहित कई संगठन शामिल हैं, जिनसे अमेरिका बाहर हो रहा है.
ट्रंप प्रशासन का दावा अमेरिका के हितों के विपरीत ये संगठन
व्हाइट हाउस द्वारा जारी कार्यकारी आदेश में कहा गया है कि ट्रंप ने सभी कार्यकारी विभागों और एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे ज्ञापन में उल्लिखित संगठनों से अमेरिका की वापसी को जल्द से जल्द प्रभावी बनाने के लिए तुरंत कदम उठाएं. इसमें यह भी कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र निकायों के मामले में वापसी का अर्थ कानून द्वारा दी गई सीमा तक उन संस्थाओं में भागीदारी या फंडिंग को रोकना होगा. बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि विदेश मंत्री की रिपोर्ट पर विचार करने और अपने कैबिनेट के साथ विचार-विमर्श के बाद ट्रंप ने यह निष्कर्ष निकाला कि इन संगठनों में अमेरिका की भागीदारी या समर्थन, अमेरिका के हितों के विपरीत है.
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “ट्रंप प्रशासन ने पाया है कि ये संस्थान अपने दायरे में दोहराव वाले हैं, कुप्रबंधित हैं, अनावश्यक और फिजूलखर्ची करने वाले हैं, सही तरीके से संचालित नहीं हो रहे हैं, ऐसे हितधारकों के प्रभाव में हैं जो अपने एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं जो हमारे हितों के विपरीत हैं, या फिर हमारे देश की संप्रभुता, स्वतंत्रताओं और समग्र समृद्धि के लिए खतरा हैं.” प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र को अपने बकाये का भुगतान “आ-ला-कार्ट” तरीके से करने का रुख अपनाया है, यानी वे केवल उन्हीं अभियानों और एजेंसियों को समर्थन देंगे, जिन्हें ट्रंप के एजेंडे के अनुरूप माना जाता है, जबकि बाकी को अमेरिका के हितों के खिलाफ समझा जा रहा है.
वैश्विक एजेंसियों से अमेरिका की वापसी से क्या प्रभाव पड़ा
कई स्वतंत्र गैर-सरकारी संगठनों ने बताया है कि अमेरिका द्वारा पिछले साल USAID के जरिए दी जाने वाली विदेशी सहायता में भारी कटौती के कारण कई परियोजनाएं बंद करनी पड़ी हैं. हालांकि, इतने बड़े बदलाव के बावजूद, ट्रंप सहित अमेरिकी अधिकारी कहते हैं कि वे संयुक्त राष्ट्र की संभावनाओं को देखते हैं और करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल उन मानक-निर्धारण से जुड़ी संयुक्त राष्ट्र पहलों में अमेरिकी प्रभाव बढ़ाने पर करना चाहते हैं, जहां चीन से प्रतिस्पर्धा है. इनमें इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन, इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन और इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन शामिल हैं.
इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी UNRWA, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद और संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक एजेंसी यूनेस्को (UNESCO) जैसी संस्थाओं को दिया जाने वाला समर्थन भी निलंबित कर दिया था. लगभग एक साल पहले ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2025 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से बाहर निकलने की घोषणा की थी. उस समय COVID-19 महामारी के कुप्रबंधन का हवाला दिया गया था.
इसके अलावा अमेरिका ने जुलाई 2025 में यूनेस्को (UNESCO) से भी खुद को अलग कर लिया था, यह कहते हुए कि वह अमेरिका के “राष्ट्रीय हित” में नहीं है. अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने वाले संगठनों से हटने का ट्रंप का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब उनका प्रशासन सैन्य कार्रवाइयों की शुरुआत कर चुका है या ऐसी धमकियां दे चुका है, जिनसे सहयोगी और विरोधी दोनों ही असहज हुए हैं. इनमें वेनेजुएला के तानाशाह नेता निकोलस मादुरो को पकड़ने की कार्रवाई और ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की मंशा जताना भी शामिल है.
यूएन संगठनों से अमेरिका के बाहर निकलने से क्या असर?
संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन (UNFCCC) से हटना ट्रंप और उनके सहयोगियों का जलवायु परिवर्तन पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय संगठनों से दूरी बनाने का ताजा प्रयास है. UNFCCC वर्ष 1992 में 198 देशों के बीच हुआ समझौता है, जिसके तहत विकासशील देशों में जलवायु परिवर्तन से निपटने की गतिविधियों को वित्तीय सहायता दी जाती है. यही संधि ऐतिहासिक पेरिस जलवायु समझौते की आधारशिला है. ट्रंप जलवायु परिवर्तन को एक “धोखा” बताते रहे हैं. वही व्हाइट हाउस में वापसी के तुरंत बाद उस समझौते से भी अमेरिका को बाहर ले गए थे.
वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण घातक और महंगी चरम मौसम घटनाएं बढ़ रही हैं, जिनमें बाढ़, सूखा, जंगलों में आग, अत्यधिक वर्षा और खतरनाक गर्मी शामिल हैं. विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि दुनिया के सबसे बड़े उत्सर्जकों और अर्थव्यवस्थाओं में से एक अमेरिका के सहयोग के बिना जलवायु परिवर्तन पर ठोस प्रगति करना बेहद कठिन होगा.
वहीं, संयुक्त राष्ट्र की जनसंख्या एजेंसी, जो दुनियाभर में यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती है. ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में इस एजेंसी की फंडिंग रोक दी थी. ट्रंप और अन्य रिपब्लिकन नेताओं ने इस एजेंसी पर चीन जैसे देशों में “जबरन गर्भपात प्रथाओं” में शामिल होने का आरोप लगाया है.
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