सेना में भर्ती के लिए अमेरिका ने बढ़ाई उम्र, अब 42 साल वाले भी बन सकेंगे फौजी

यूएस आर्मी की तस्वीर. इमेज सोर्स- @INDOPACOM
US Army: दुनियाभर की सेनाएं अब सैनिकों की कमी का सामना कर रही हैं. अमेरिका ने भर्ती के लिए उम्र की सीमा बढ़ाकर 42 साल कर दी है, वहीं ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों में भी भारी कमी देखी गई है.
US Army: दुनियाभर की बड़ी सेनाएं इन दिनों जवानों की कमी से जूझ रही हैं. अमेरिका से लेकर ब्रिटेन और जर्मनी तक, हर जगह युवाओं का फौज की तरफ रुझान कम हुआ है. हालात ये हैं कि अब भर्ती के नियमों में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं.
अमेरिका में 42 साल की उम्र तक मौका
अमेरिकी सेना ने अपनी भर्ती की अधिकतम उम्र 35 से बढ़ाकर 42 साल कर दी है. आर्मी रेगुलेशन 601-210 के मुताबिक, ये नए नियम 20 अप्रैल से लागू हो जाएंगे. इतना ही नहीं, अब उन लोगों को भी मौका दिया जा रहा है जिन पर ड्रग्स से जुड़े केस रहे हैं. हालांकि, कम से कम उम्र अभी भी 18 साल ही है (17 साल वालों को पेरेंट्स की परमिशन चाहिए). ये बदलाव ऐसे समय में हुए हैं जब ईरान के साथ तनाव की स्थिति बनी हुई है.
ब्रिटेन में 6% कम रह गई सेना की ताकत
ब्रिटेन की हालत भी कुछ ठीक नहीं है. साल 2023-24 के डेटा बताते हैं कि वहां 10,450 भर्ती का टारगेट था, लेकिन सिर्फ 6,720 लोग ही सेना में आए. अप्रैल 2025 के आंकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन की कुल सैन्य क्षमता 1,47,300 रह गई है, जो कि टारगेट से 6% कम है. इसमें रॉयल नेवी और रॉयल मरीन्स में तो 8% की भारी कमी देखी गई है. इसका मुख्य कारण भर्ती का बहुत मुश्किल प्रोसेस बताया जा रहा है.
जर्मनी में रिटायरमेंट और इस्तीफों का संकट
जर्मनी की सेना ‘बुंडेसवेहर’ साल 2024 में और छोटी हो गई है. साल के आखिर तक वहां सैनिकों की संख्या घटकर 1,81,174 रह गई, जबकि साल 2031 तक इसे 2,03,000 पहुंचाने का लक्ष्य है. रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में 20,000 नए लोग भर्ती तो हुए, लेकिन पुराने सैनिकों के रिटायर होने और बीच में नौकरी छोड़ने (ड्रॉपआउट) की वजह से संख्या बढ़ नहीं पाई. वहां के प्राइवेट सेक्टर में अच्छी नौकरियों के कारण भी युवा फौज में नहीं रुक रहे हैं.
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फ्रांस, इटली और स्पेन का भी बुरा हाल
यूरोप के अन्य देशों में भी यही कहानी है. फ्रांस में बड़े लेवल पर कैंपेन चलाने के बाद भी टारगेट पूरा नहीं हो पा रहा है. इटली में सेना और नेवी दोनों ही खाली पदों से परेशान हैं. वहीं, स्पेन में स्पेशलाइज्ड रोल (तकनीकी काम) के लिए लोग नहीं मिल रहे हैं, क्योंकि वहां का युवा सेना के बजाय प्राइवेट कंपनियों में काम करना ज्यादा पसंद कर रहा है.
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लेखक के बारे में
By Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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