खत्म हो गई ब्रिटेन की 700 साल पुरानी परंपरा, अब कोई नहीं होगा जन्मजात 'लॉर्ड'

Updated at : 23 Mar 2026 9:18 AM (IST)
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UK abolishes hereditary peers ending 700-year old House of Lord's tradition.

ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर.

UK Lords hereditary peers Abolished: ब्रिटेन ने अपने देश की 700 साल पुरानी परंपरा को समाप्त कर दिया. इसके तहत किसी को जन्मजात लॉर्ड बनने का ‘सौभाग्य’ मिल जाता था. उन्हें संसद में इसी के जरिए एंट्री मिल जाती थी.

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UK Lords hereditary peers Abolished: सात सौ वर्षों से भी अधिक समय तक ब्रिटेन में एक ऐसा वर्ग रहा, जिसे केवल अपने परिवार में जन्म लेने के कारण विशेष अधिकार प्राप्त थे. यह लोग देश के कानून बनाने की प्रक्रिया में भाग ले सकते थे, जबकि आम जनता को यह अवसर नहीं मिलता था. अब इस व्यवस्था का औपचारिक अंत हो गया है. वर्ष 2026 में पारित नए कानून के तहत संसद के ऊपरी सदन से बचे हुए 92 वंशानुगत सदस्यों को हटा दिया गया है. हाउस ऑफ लॉर्ड्स (वंशानुगत पीयर्स) अधिनियम, 2026 को यूके की संसद ने 10 मार्च 2026 को पारित किया था. वहीं इस विधेयक को 18 मार्च 2026 को शाही स्वीकृति (रॉयल एसेंट) मिल गई, जिससे यह अब कानून बन गया है.

भारतीय संसदीय व्यवस्था ब्रिटेन की ही तरह है. जैसे भारत में निचला सदन लोक सभा और ऊपरी सदन राज्य सभा हैं, वैसे ही ब्रिटेन की संसद के भी दो सदन हैं. ब्रिटेन में निचला सदन कॉमन्स कहलाता है, जिसमें 650 निर्वाचित सदस्य होते हैं. वहीं, ऊपरी सदन लॉर्ड्स कहलाता है, जिसमें लगभग 800 सदस्य शामिल हैं. यह सदन कानूनों की समीक्षा करता है, उन पर चर्चा करता है और संशोधन सुझाता है, लेकिन अंतिम निर्णय को रोक नहीं सकता. इसे अनुभवी लोगों का ऐसा मंच माना जाता है, जो सरकार की कार्यप्रणाली पर नजर रखता है, हालांकि इसके सदस्य जनता द्वारा सीधे चुने नहीं जाते.

हॉउस ऑफ लॉर्ड्स का सदस्य बनने के तरीके

अब तक इस सदन का सदस्य बनने के तीन प्रमुख रास्ते थे. 

  • पहला- प्रधानमंत्री की सलाह पर सम्राट द्वारा आजीवन नियुक्ति (आजीवन पीयर)
  • दूसरा- चर्च ऑफ इंग्लैंड के 26 बिशप के रूप में सेवा
  • तीसरा- पिता से विरासत में यह अधिकार मिलना. (यही अब समाप्त हो गया है)

लंबे समय से जारी था बदलाव

यह पहली बार नहीं है जब इस व्यवस्था में बदलाव किया गया हो. वर्ष 1999 में तत्कालीन प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने अधिकांश वंशानुगत सदस्यों को हटा दिया था. उस समय एक समझौते के तहत 92 सदस्यों को अस्थायी रूप से बने रहने दिया गया था. लेकिन यह अस्थायी व्यवस्था दो दशक से भी अधिक समय तक जारी रही.

वर्तमान सरकार के प्रमुख कीर स्टार्मर ने वर्ष 2024 के चुनावी वादों में इस प्रक्रिया को पूरा करने की बात कही थी. सरकार का मानना था कि केवल जन्म के आधार पर किसी को कानून बनाने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए.

अब क्या बदलाव हुआ

नए कानून के लागू होने के बाद अब कोई भी व्यक्ति केवल अपने परिवार के कारण इस सदन का सदस्य नहीं बन सकेगा. हालांकि कुछ मौजूदा सदस्यों को जीवनभर के लिए बने रहने की अनुमति दी गई है, लेकिन वे अपने उत्तराधिकारियों को यह पद नहीं दे पाएंगे.

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क्या यहीं खत्म हो गया सुधार

इस बदलाव को व्यापक सुधार की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है. आगे के लिए कई सुझाव सामने आए हैं, जैसे-

  • सदस्यों के लिए 80 वर्ष की अनिवार्य सेवानिवृत्ति आयु,
  • न्यूनतम भागीदारी की शर्तें,
  • सदन की संरचना व सदस्यता में व्यापक बदलाव.

हालांकि, अभी इनके लागू होने में समय लगेगा, लेकिन वंशानुगत सदस्यों को हटाने वाले कदम के साथ ब्रिटेन ने अपनी संसदीय व्यवस्था को आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप ढालने की दिशा में एक और अहम पहल की है.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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