ईरान को हथियार दिए तो खैर नहीं, ट्रंप लगाएंगे 50% टैरिफ; न्यूक्लियर कचरा हटाने पर भी सख्त पाबंदी

Updated at : 08 Apr 2026 6:39 PM (IST)
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Trump Iran Weapons Tariff nuclear rules

तस्वीर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. सोर्स- एक्स/ @WhiteHouse

Iran Weapons Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक साथ 'नरम और गरम' रुख अपनाया है. एक तरफ उन्होंने ईरान के साथ बातचीत और पाबंदियों में छूट के संकेत दिए हैं, तो दूसरी तरफ उन देशों को खुली चेतावनी दी है जो ईरान को हथियार सप्लाई कर रहे हैं.

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Iran Weapons Tariff: ट्रंप ने साफ कहा है कि जो भी देश ईरान को सैन्य हथियार देगा, उसके अमेरिका आने वाले सामान पर तुरंत 50% का भारी टैक्स (टैरिफ) लगा दिया जाएगा. इसमें किसी को भी छूट नहीं मिलेगी. अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच दो हफ्ते का सीजफायर (युद्धविराम) हो गया है. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर बताया कि ईरान के साथ 15 अहम मुद्दों में से कई पर सहमति बन गई है. शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान की राजधानी इस्लाबाद में दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत शुरू होगी. ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अगर बात बनी, तो ईरान पर लगी आर्थिक पाबंदियों और टैक्स में राहत दी जा सकती है.

न्यूक्लियर कचरा हटाने और यूरेनियम पर सख्त पाबंदी

ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान को अब यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) की इजाजत नहीं होगी. उन्होंने पोस्ट में लिखा कि अमेरिका और ईरान मिलकर उस न्यूक्लियर सामग्री या ‘मलबे’ को खोदकर बाहर निकालेंगे, जो पिछले साल अमेरिकी हवाई हमलों (B-2 बॉम्बर्स के जरिए) के बाद जमीन में दब गया था. ट्रंप का दावा है कि सैटेलाइट के जरिए इन साइट्स पर नजर रखी जा रही है और हमले के बाद से वहां किसी ने कुछ नहीं छुआ है.

ईरानी सेना ने कहा- अमेरिका पर भरोसा नहीं, उंगली ट्रिगर पर है

ट्रंप ने भले ही ईरान में ‘सफल सत्ता परिवर्तन’ की बात कही हो, लेकिन ईरान की सेना (IRGC) ने कड़ा विरोध जताया है. IRGC ने टेलीग्राम पर जारी बयान में कहा कि उन्हें अमेरिकी वादों पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है. उन्होंने कहा कि उनके सैनिक नए सुप्रीम कमांडर मोजतबा खामेनेई के आदेश का इंतजार कर रहे हैं और उनकी उंगली ट्रिगर पर है. ईरानी सेना ने खाड़ी देशों को भी चेतावनी दी है कि वे अमेरिका का साथ देना बंद करें.

पाकिस्तान की भूमिका

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पुष्टि की है कि उनका देश इस शुक्रवार को दोनों देशों की बातचीत की मेजबानी करेगा. उन्होंने इस सीजफायर को हर जगह (लेबनान सहित) लागू बताया है. हालांकि, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने स्पष्ट किया है कि वे इस अस्थाई रोक का समर्थन तो करते हैं, लेकिन लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ उनका ऑपरेशन जारी रहेगा, जहां अब तक 1500 से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं.

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क्या था पूरा विवाद?

यह तनाव तब चरम पर पहुंचा जब 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत हो गई थी. इसके बाद ईरान ने खाड़ी देशों और इजरायल पर पलटवार किया था. ट्रंप ने अल्टीमेटम दिया था कि अगर ईरान शर्तों को नहीं मानता और होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) का रास्ता नहीं खोलता, तो भारी तबाही होगी. हालांकि, डेडलाइन खत्म होने से ठीक एक घंटे पहले यह सीजफायर समझौता हो गया.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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