ईरान से डील या सीधे वार? ट्रंप ने दिए बातचीत के संकेत, उधर बंदरगाहों पर US ने तैनात किए 100 से ज्यादा लड़ाकू विमान

Author Govind jee
Updated:
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अमेरिकी वायु सेना F-16 फाइटिंग फाल्कन जेट की तस्वीर. क्रेडिट-एक्स/@CENTCOM

US Military Blockade Iranian Ports: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चर्चा में है. एक तरफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ बातचीत और समझौते की उम्मीद जता रहे हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिकी सेना ने ईरान के बंदरगाहों की भारी घेराबंदी कर रही है. ट्रंप का कहना है कि शायद सीजफायर को आगे बढ़ाने की जरूरत न पड़े क्योंकि बातचीत सही दिशा में जा रही है.

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US Military Blockade Iranian Ports: यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी है कि अमेरिकी सेना ईरान के बंदरगाहों और तटों की बड़े पैमाने पर घेराबंदी कर रही है. इस मिशन में 10,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक, 12 से ज्यादा युद्धपोत और 100 से ज्यादा लड़ाकू विमान तैनात किए गए हैं. इसमें एयरक्राफ्ट कैरियर ‘USS अब्राहम लिंकन’ (CVN 72) और गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर ‘USS डेलबर्ट डी ब्लैक’ (DDG 119) जैसे ताकतवर जहाज शामिल हैं, जो ईरान के समुद्री रास्तों पर कड़ी नजर रख रहे हैं.

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कोई पाबंदी नहीं

ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन एयर फोर्स जनरल डैन केन ने मीडिया को बताया कि यह घेराबंदी केवल ईरान के बंदरगाहों और उसके तटों तक सीमित है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को ब्लॉक नहीं किया गया है. यह कार्रवाई ईरान की सीमा के अंदर और अंतरराष्ट्रीय पानी में की जा रही है. जनरल केन के अनुसार, यह नियम हर देश के जहाज पर लागू होगा. अगर कोई जहाज ईरान के बंदरगाहों की तरफ जाता है या वहां से आता है, तो उसे रोका जाएगा.

ईरानी तेल और ‘डार्क फ्लीट’ पर भी नजर

जनरल केन ने बताया कि अमेरिकी सेना उन जहाजों को भी निशाना बनाएगी जो ईरान को सामान या मदद पहुंचा रहे हैं. इसमें खासतौर पर ‘डार्क फ्लीट’ वाले जहाज शामिल हैं. डार्क फ्लीट उन अवैध जहाजों को कहा जाता है जो अंतरराष्ट्रीय नियमों, प्रतिबंधों या इंश्योरेंस की शर्तों को मानकर नहीं चलते और छिपकर ईरानी तेल की तस्करी करते हैं. इस अभियान में एडमिरल पपारो की कमान वाली पैसिफिक फोर्स भी मदद कर रही है.

ट्रंप बोले- ईरान अब डील करने को तैयार

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान एक समझौता करना चाहता है. उनके मुताबिक, ‘ईरान आज उन चीजों को मानने के लिए तैयार है, जिनके लिए वह दो महीने पहले राजी नहीं था.’ ट्रंप ने जोर देकर कहा कि इस डील का सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि ईरान के पास कोई परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि इस तनाव के बीच शेयर बाजार अच्छा चल रहा है और तेल की कीमतें भी नीचे आ रही हैं, जो एक अच्छा संकेत है.

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सीजफायर खत्म हुआ तो फिर शुरू होगी जंग

राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सीजफायर के दौरान अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है और जरूरत पड़ने पर तुरंत बड़े हमले शुरू कर सकती है. ट्रंप ने कहा कि बातचीत में यह साफ कर दिया गया है कि ईरान के परमाणु हथियार न रखने की बात पर कोई ’20 साल की समय सीमा’ नहीं है, यह स्थायी होना चाहिए. अगर बातचीत सफल नहीं रही, तो युद्ध दोबारा शुरू हो जाएगा. अगली आमने-सामने की बातचीत इस वीकेंड होने की संभावना है.

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