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सुनीता विलियम्स NASA से हुईं रिटायर, 27 साल में रिकॉर्ड्स की भरमार; 608 दिन स्पेस में, 4000 घंटे की फ्लाइट और बहुत कुछ...

Updated at : 21 Jan 2026 9:35 AM (IST)
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Sunita Williams retires from NASA after 27 years leaving behind a plethora of records

सुनीता विलियम्स अपने स्पेस मिशन के दौरान.

27 साल का करियर और उपलब्धियां इतनी कि गिनने से ही रोमांच पैदा हो जाए. भारतीय मूल के पिता की संतान सुनीता पांड्या aka सुनीता विलियम्स ने स्पेस साइंस की दुनिया में ढेर सारा नाम भी कमाया. उनकी मिसाल ने दुनिया भर में लड़कियों को हौसला दिया. अब जब उन्होंने अंतरिक्ष की दुनिया से रिटायरमेंट ले ली है, तो उनके इस करियर पर एक नजर डालते हैं.

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Sunita Williams Retirement NASA: नासा की जानी-मानी अंतरिक्ष यात्री भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष की दुनिया को अलविदा कह दिया है. सुनीता विलियम्स ने 27 साल की लंबी सेवा के बाद नासा से रिटायरमेंट ले ली है. उनकी सेवानिवृत्ति 27 दिसंबर 2025 से मानी जाएगी. अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर उन्होंने तीन मिशन पूरे किए और इस दौरान उनका करियर बेहद शानदार रहा. सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष उड़ानों में कई बड़े रिकॉर्ड बनाए. उन्होंने अंतरिक्ष में कुल 608 दिन बिताए, जो किसी नासा अंतरिक्ष यात्री द्वारा बिताया गया दूसरा सबसे ज्यादा कुल समय है. खास बात है कि सुनीता इन दिनों भारत के दौरे पर हैं.

सुनीत विलियम्स का जन्म 19 सितंबर 1965 को अमेरिका के ओहायो के यूक्लिड में हुआ था. उनके पिता दीपक पांड्या एक न्यूरो साइंटिस्ट थे, उनका संबंध गुजरात के मेहसाणा से है. जबकि उनकी मां उर्सुलीन बोनी पांड्या स्लोवेनियाई-अमेरिकी मूल की हैं. उनके पति माइकल जे विलियम्स हैं. सुनीता ने अपने करियर की शुरुआत अमेरिकी सेना से की थी. उसके बाद उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान का रुख किया था. स्पेस साइंस का उनका करियर उपलब्धियों से भरा हुआ है. सुनीता को जून 1998 में नासा ने अपने साथ जोड़ा था. यानी उन्होंने 27 साल से भी ज्यादा का समय इस संस्थान में बिताया.

सुनीता के करियर की उपलब्धियां

सुनीता ने पहली बार दिसंबर 2006 में स्पेस शटल डिस्कवरी (STS-116) से अंतरिक्ष यात्रा की थी और बाद में STS-117 मिशन के तहत स्पेस शटल अटलांटिस से पृथ्वी पर लौटी थीं. इस दौरान उन्होंने एक्सपीडिशन 14/15 में फ्लाइट इंजीनियर के रूप में काम किया और उस मिशन में चार स्पेसवॉक कर रिकॉर्ड बनाया. 

2012 में उन्होंने कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से 127 दिन के मिशन के लिए उड़ान भरी. वह एक्सपीडिशन 32/33 का हिस्सा रहीं और एक्सपीडिशन 33 की कमांडर भी बनीं. इस मिशन में उन्होंने स्टेशन के रेडिएटर में आई खराबी को ठीक करने और सोलर एरे से बिजली पहुंचाने वाले एक अहम हिस्से को बदलने के लिए तीन स्पेसवॉक किए.

विलियम्स ने कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताकर नासा के अंतरिक्ष यात्रियों की सूची में दूसरा स्थान हासिल किया है. वहीं, अमेरिका के अंतरिक्ष यात्रियों में सबसे लंबी एकल अंतरिक्ष उड़ान के मामले में वह छठे नंबर पर हैं. इस सूची में वह नासा के अंतरिक्ष यात्री बुच विलमोर के साथ बराबरी पर हैं. दोनों ने नासा के बोइंग स्टारलाइनर और स्पेसएक्स क्रू-9 मिशन के दौरान 286 दिन अंतरिक्ष में बिताए. 

सुनीता ने कुल 9 स्पेसवॉक किए, जिनका कुल समय 62 घंटे 6 मिनट रहा. यह किसी महिला द्वारा किया गया सबसे ज्यादा स्पेसवॉक समय है और दुनिया भर में यह चौथा सबसे अधिक स्पेसवॉक समय माना जाता है. इसके अलावा, वह अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली पहली इंसान भी बनीं.

अपने रिटायरमेंट पर क्या बोलीं सुनीता?

60 वर्षीय सुनीता विलियम्स ने अपने रिटायरमेंट पर कहा, “जो मुझे जानते हैं, वे जानते हैं कि अंतरिक्ष मेरी सबसे पसंदीदा जगह है.” उन्होंने आगे कहा, “एस्ट्रोनॉट ऑफिस में सेवा करना और तीन बार अंतरिक्ष में उड़ान भरना मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान रहा है. नासा में मेरे 27 साल का करियर शानदार रहा, और इसका श्रेय मेरे सहयोगियों से मिले प्यार और समर्थन को जाता है. अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन, वहां के लोग, इंजीनियरिंग और विज्ञान सचमुच अद्भुत हैं और उन्होंने चंद्रमा और मंगल की ओर अगली खोजों को संभव बनाया है. मुझे उम्मीद है कि हमने जो नींव रखी है, उससे ये बड़े कदम थोड़ा आसान हुए होंगे. मैं नासा और उसके साझेदारों के लिए बेहद उत्साहित हूं और आगे होने वाले ऐतिहासिक पलों को देखने का इंतजार कर रही हूं.”

पिछले साल मुश्किलों में फंस गई थीं सुनीता

अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मंगलवार को बताया कि भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स की सेवानिवृत्ति का आदेश पिछले साल दिसंबर के अंत से प्रभावी हो गया. यानी अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर महीनों तक फंसे रहे दो अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल नासा की सुनीता विलियम्स सेवानिवृत्त हो गई हैं. बोइंग की कैप्सूल परीक्षण उड़ान के दौरान विलियम्स के साथ अंतरिक्ष में फंसे रहे बुच विलमोर ने पिछले साल गर्मियों में नासा छोड़ दिया था. विलियम्स और विलमोर को 2024 में अंतरिक्ष स्टेशन भेजा गया था और वे बोइंग के नए ‘स्टारलाइनर’ कैप्सूल से उड़ान भरने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री थे. उनका मिशन केवल एक सप्ताह का था लेकिन स्टारलाइनर में आई दिक्कतों के कारण यह नौ महीने से भी लंबा खिंच गया. वे अंतत: पिछले साल मार्च में पृथ्वी पर लौटे.

सुनीता की उपलब्धियों का आंकड़ा बहुत बड़ा है

मैसाचुसेट्स के नीडहम की रहने वाली सुनीता विलियम्स ने यूनाइटेड स्टेट्स नेवल अकादमी से भौतिक विज्ञान में स्नातक और फ्लोरिडा के मेलबर्न स्थित फ्लोरिडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री ली है. वह अमेरिकी नौसेना की सेवानिवृत्त कप्तान हैं और एक बेहतरीन हेलीकॉप्टर व फिक्स्ड-विंग पायलट भी हैं. उन्होंने 40 अलग-अलग विमानों में 4,000 घंटे से ज्यादा उड़ान भरी है.

हाल ही में, जून 2024 में सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर ने नासा के बोइंग क्रू फ्लाइट टेस्ट मिशन के तहत स्टारलाइनर यान से उड़ान भरी. इसके बाद दोनों एक्सपीडिशन 71/72 में शामिल हुए. सुनीता विलियम्स ने फिर से एक्सपीडिशन 72 के दौरान स्पेस स्टेशन की कमान संभाली. इस मिशन में उन्होंने दो स्पेसवॉक किए और मार्च 2025 में नासा के स्पेसएक्स क्रू-9 मिशन के जरिए पृथ्वी पर वापस लौटीं.

अंतरिक्ष उड़ानों के अलावा भी सुनीता विलियम्स ने नासा में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं. 2002 में वह नीमो (NEEMO) मिशन का हिस्सा बनीं, जिसमें उन्होंने 9 दिन समुद्र के नीचे बने एक खास आवास में रहकर काम किया. अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा के बाद वह नासा के एस्ट्रोनॉट ऑफिस की डिप्टी चीफ भी रहीं. दूसरी अंतरिक्ष यात्रा के बाद उन्होंने रूस के स्टार सिटी में संचालन निदेशक की जिम्मेदारी संभाली. हाल ही में उन्होंने भविष्य में चंद्रमा पर उतरने की तैयारी के लिए अंतरिक्ष यात्रियों को ट्रेनिंग देने के लिए हेलीकॉप्टर ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म तैयार करने में भी मदद की.

नासा ने सुनीता के जज्बे और उपलब्धियों को सराहा

नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड आइजैकमैन  ने सुनीता की उपलब्धियों की खूब सराहना की. नासा के बयान के अनुसार, उन्होंने कहा, “सुनी विलियम्स मानव अंतरिक्ष उड़ान की एक अग्रदूत रही हैं. उन्होंने स्पेस स्टेशन पर अपने नेतृत्व से भविष्य की खोजों को दिशा दी और निचली पृथ्वी कक्षा में व्यावसायिक मिशनों का रास्ता खोला. साइंस और टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने में उनके काम ने चंद्रमा के लिए आर्टेमिस मिशनों और मंगल की ओर बढ़ने की नींव रखी है. उनकी असाधारण उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों को बड़े सपने देखने और सीमाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करती रहेंगी. उनके शानदार रिटायरमेंट के लिए बधाई और नासा व हमारे देश की सेवा के लिए धन्यवाद.”

वहीं नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर (ह्यूस्टन) की निदेशक वैनेसा वाइच ने कहा, “सुनी के शानदार करियर के दौरान वह एक अग्रणी नेता रही हैं. स्पेस स्टेशन में उनके योगदान और उपलब्धियों से लेकर बोइंग स्टारलाइनर मिशन में उनकी ऐतिहासिक टेस्ट फ्लाइट भूमिका तक, उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों के खोजकर्ताओं को प्रेरित करता रहेगा.” नासा जॉनसन स्पेस सेंटर में एस्ट्रोनॉट ऑफिस के प्रमुख स्कॉट टिंगल ने कहा, “सुनी बेहद तेज दिमाग वाली हैं और एक शानदार दोस्त व सहयोगी हैं. उन्होंने मुझे और कई अन्य अंतरिक्ष यात्रियों समेत अनगिनत लोगों को प्रेरित किया है. हम सभी उन्हें बहुत मिस करेंगे और उनके भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएं देते हैं.”

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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