राजनीतिक हाशिए से प्रधानमंत्री बनने तक, 20 साल बाद सत्ता में BNP, रहमान ने रचा इतिहास

तारिक रहमान बने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री, फोटो- पीटीआई
Tarique Rahman: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के सुप्रीमो तारिक रहमान ने मंगलवार (17 फरवरी) को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. इसी के साथ 20 साल तक शासन से दूर रहने के बाद बीएनपी की एक बार फिर सत्ता में वापसी हो गई. बीएनपी के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं. चुनाव से महज दो महीने पहले तारिक रहमान ने 17 साल स्वनिर्वासन में बिताने के बाद वतन वापसी की. वापस आने के 5 दिन बाद उनकी मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की मौत हो गई. ऐसे माहौल में उन्होंने सत्ता के शीर्ष तक का रास्ता बनाया.
Tarique Rahman: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के सुप्रीमो तारिक रहमान ने मंगलवार (17 फरवरी) को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर देश की राजनीति में नया इतिहास रच दिया. इसके साथ ही करीब 20 वर्षों तक सत्ता से दूर रहने के बाद बीएनपी ने एक बार फिर सरकार का गठन किया है. यह सफर बीएनपी और खुद तारिक रहमान के लिए बिल्कुल आसान नहीं था. चुनाव से ठीक पहले पार्टी नेता और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन हो गया, जिससे बीएनपी को बड़ा झटका लगा. इस कठिन दौर में बीएनपी के सामने नेतृत्व और राजनीतिक भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे. इसी बीच, तारिक रहमान ने 17 वर्षों का स्वनिर्वासन खत्म करते हुए महज दो महीने पहले ही वतन वापसी की. लंबे समय तक विदेश में रहने के बाद उनकी यह वापसी पार्टी के लिए नई उम्मीद लेकर आई. वतन लौटने के बाद उन्होंने तेजी से पार्टी को संगठित किया और चुनाव में जीत दिलाकर बीएनपी को फिर से सत्ता के शिखर तक पहुंचा दिया. राजनीतिक हाशिए से लेकर प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने का यह सफर न केवल तारिक रहमान के लिए ऐतिहासिक है, बल्कि बांग्लादेश की नए युग की शुरुआत के रूप में भी देखी जा रही है.
चुनौतियों को पार कर सत्ता के शीर्ष तक किया सफर
बीएनपी की स्थापना तारिक रहमान के पिता जियाउर रहमान ने की थी. वो खुद एक सैन्य शासक से राजनीतिज्ञ बने थे. तत्कालीन राष्ट्रपति जियाउर रहमान की 1981 में हत्या के बाद करीब चार दशक तक पार्टी का नेतृत्व तारिक की मां खालिदा जिया ने किया. रहमान बीते 17 साल देश के बाहर रहे थे. साल 2025 के दिसंबर महीने में वो बांग्लादेश लौटे. उनका जोरदार स्वागत किया गया. वापसी के पांच दिन बाद ही रहमान की मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. रहमान के लिए यह किसी त्रासदी से कम नहीं था. उन्होंने पार्टी की कमान संभाली और 12 फरवरी को हुए 13वें संसदीय चुनावों में बीएनपी ने झंडे गाड़ दिए. 297 में से 209 सीटें जीतीं, जबकि कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी ने 68 सीटें हासिल कीं.
हाशिए पर थी बीएनपी
आम चुनावों से पहले जब बीएनपी राजनीतिक रूप से हाशिए पर थी तारिक रहमान ने बीएनपी के अध्यक्ष का पदभार संभाला. बदलते हालात ने उन्हें व्यक्तिगत क्षति के बीच कुछ निजी समय बिताने का अवसर नहीं दिया. रहमान को भी वंशवादी राजनीति की उपज के रूप में देखा जाता है, लेकिन उनके परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि ने उन्हें एक प्रकार की दूरदर्शिता प्रदान की है. दिसंबर में बांग्लादेश लौटने के कुछ घंटों बाद रहमान ने कहा था, ‘‘मेरे पास अपने देश के लोगों और अपने देश के लिए एक योजना है.’’ मृदुभाषी रहमान ने चुनाव प्रचार में अपनी पार्टी का नेतृत्व करते हुए अपार जनसमूह को आकर्षित किया. उन्होंने भड़काऊ बयानबाजी से परहेज करने और संयम एवं सुलह के आह्वान का रूख अपनाया.
तारिक रहमान कौन हैं
तारिक रहमान का जन्म 20 नवंबर 1965 को ढाका में हुआ था. बचपन में उन्होंने 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम को देखा. उन्हें अपनी मां और भाई के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन 16 दिसंबर 1971 को उन्हें रिहा कर दिया गया, जब बांग्लादेश को पाकिस्तान से स्वतंत्रता मिली. उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संबंध का अध्ययन किया लेकिन बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी. बाद में उन्होंने कपड़ा और कृषि उत्पादों के व्यवसाय शुरू किए. वह 2009 में बीएनपी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष चुने गए और धीरे-धीरे पार्टी के पुनर्गठन में शामिल हो गए. अवामी लीग के शासनकाल में रहमान भ्रष्टाचार और अपराध के कई मामलों को लेकर निशाने पर आ गए. कुछ मामलों में उन्हें उनकी अनुपस्थिति में दोषी करार दिया गया.
मिली थी उम्रकैद की सजा
साल 2004 में अवामी लीग की नेता शेख हसीना की रैली पर हुए ग्रेनेड हमला मामले में रहमान को उम्रकैद की सजा सुनाई गई. इस हमले में 24 लोग मारे गए थे और दर्जनों घायल हुए थे. रहमान ने हमेशा इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए उन्हें खारिज किया है. हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद मोहम्मद यूनुस के अंतरिम शासनकाल में उन्हें सभी मामलों में बरी कर दिया गया. जब खालिदा जिया को 2018 में भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल भेजा गया, तो रहमान को बीएनपी का कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया था. रहमान 2008 में यह कहते हुए विदेश चले गये थे कि उन्हें इलाज की जरूरत है. उससे पहले सेना समर्थित कार्यवाहक सरकार के तहत उन्हें हिरासत से छोड़ा गया था. (इनपुट भाषा)
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लेखक के बारे में
By Pritish Sahay
12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.
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