ट्रंप के गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में कई देश हुए शामिल, एक भारत का दोस्त तो एक रूस का, यूरोप कन्नी काट रहा, जानें क्यों?

Updated at : 21 Jan 2026 8:23 AM (IST)
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Countries Joining Board of Peace for Gaza

गाजा में रिकंस्ट्रक्शन और शांति के लिए डोनाल्ड ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में अब देशों शामिल होना शुरू हो चुके हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के रिकंस्ट्रक्शन और वहां शांति बहाल करने के लिए बोर्ड ऑफ पीस बनाया है. इसके लिए उन्होंने 60 देशों को इनविटेनशन भेजा है. जिसमें अब देशों ने स्वीकार करना शुरू कर दिया है. इसकी मेंबरशिप काफी महंगी है. जो देश 1 अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान देंगे, उन्हें इस बोर्ड में स्थायी सदस्यता मिलेगी.

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Donald Trump’s Gaza Board of Peace: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलिस्तीन के गाजा पट्टी में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए 20 पॉइंट एजेंडा पेश किया था. इसके पहले चरण में इजरायल के साथ युद्ध विराम और कैदियों की रिहाई हुई. अब दूसरे चरण के तहत “बोर्ड ऑफ पीस” नाम से एक मंच बनाने का एलान किया है. इसी पहल के तहत कई देशों को इसमें शामिल होने का न्योता दिया गया है और कुछ देशों ने इसे स्वीकार भी कर लिया है. मंगलवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बहरीन, मोरक्को, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, अर्जेंटीना और बेलारूस अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बनाए गए नए बोर्ड ऑफ पीस में शामिल हो गए.

भारत के सबसे नजदीकी दोस्तों में शुमार, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने अमेरिका का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है. इस बारे में जानकारी यूएई के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने दी. यूएई के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, शेख अब्दुल्ला बिन जायद ने कहा कि यूएई बोर्ड ऑफ पीस के काम में पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है. उनका कहना था कि इसका मकसद देशों के बीच सहयोग बढ़ाना, स्थिरता लाना और सबके लिए तरक्की के रास्ते खोलना है.

अबू धाबी ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका की इस नई शांति पहल के साथ खड़ा है. शेख अब्दुल्ला बिन जायद ने यह भी कहा कि यूएई का यह फैसला दिखाता है कि गाजा के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 20 बिंदुओं वाली शांति योजना को पूरी तरह लागू करना कितना जरूरी है. उन्होंने कहा कि यह योजना फिलिस्तीनी लोगों के सही और वैध अधिकारों को पूरा करने के लिए बेहद अहम है. उन्होंने यह भी दोहराया कि यूएई को राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व और दुनिया में शांति लाने की उनकी कोशिशों पर पूरा भरोसा है. उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा उदाहरण अब्राहम समझौते हैं.

बेलारूस भी बोर्ड ऑफ पीस में हुए शामिल

रूस का पड़ोसी और यूक्रेन युद्ध के दौरान उसका सबसे बड़ा सहायक, बेलारूस ने इस बोर्ड ऑफ पीस को जॉइन कर लिया है. बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने भी बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए. बेलारूस के राष्ट्रपति कार्यालय से जुड़े एक टेलीग्राम चैनल पर लुकाशेंको का वीडियो जारी किया गया, जिसमें वह दस्तावेज पर साइन करते दिख रहे हैं. इस दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वह यूक्रेन में शांति लाने में अपना योगदान दे पाएंगे.

ट्रंप ने राष्ट्रपति पुतिन और पीएम मोदी को भी भेजा है न्यौता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भी गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का न्योता दिया है. ट्रंप ने कहा कि पुतिन उन कई बड़े विश्व नेताओं में से एक हैं, जिनके नाम इस पहल के लिए सोचे जा रहे हैं. मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि पुतिन उन नेताओं में शामिल हैं जिन्हें इस बोर्ड में शामिल होने के लिए बुलाया गया है. उन्होंने दावा किया कि यह बोर्ड गाजा में शांति और स्थिरता लाने का काम करेगा. जब ट्रंप से सीधे पूछा गया कि क्या उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन को बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए बुलाया है, तो उन्होंने कहा, “हां, वह उनमें से एक हैं. ये सभी विश्व नेता हैं. और जवाब हां है.” भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी राष्ट्रपति ट्रंप ने गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने का न्योता दिया है.

ट्रंप के 20 सूत्रीय प्लान में क्या है ?

डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार बोर्ड ऑफ पीस बनाने का प्रस्ताव पिछले साल सितंबर में रखा था, जब उन्होंने गाजा में चल रहे संघर्ष को खत्म करने की अपनी योजना का ऐलान किया था. मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए बनाई गई 20 बिंदुओं वाली शांति योजना के दूसरे चरण में गाजा बोर्ड ऑफ पीस बनाया जा रहा है. इसका मकसद इलाके में शांति बनाए रखना और लड़ाई खत्म होने के बाद गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण पर नजर रखना है.

व्हाइट हाउस के बयान के मुताबिक, इस बोर्ड के कार्यकारी सदस्य गाजा को स्थिर बनाने और लंबे समय तक सफल बनाने से जुड़े अहम कामों की जिम्मेदारी संभालेंगे. इनमें शासन व्यवस्था को मजबूत करना, आसपास के देशों से रिश्ते बेहतर करना, गाजा का रिकंस्ट्रक्शन, इन्वेस्टमेंट लाना, बड़े स्तर पर फंड जुटाना और पूंजी की व्यवस्था करना शामिल है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ने करीब 60 देशों को एक मसौदा चार्टर भेजा है. हालांकि, पिछले हफ्ते दुनिया के कई नेताओं को भेजे गए निमंत्रण पत्र से साफ हुआ कि अब इस बोर्ड की भूमिका सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह दुनिया भर के संघर्षों को खत्म करने में भी काम करेगा.

यूरोप की चिंता क्या है?

पत्र के मुताबिक, बोर्ड ऑफ पीस के अध्यक्ष डोनाल्ड ट्रंप जीवनभर रहेंगे. निमंत्रण पत्र में शामिल इस “चार्टर” को लेकर कुछ यूरोपीय देशों ने चिंता जताई है. उनका कहना है कि इससे संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के काम को नुकसान पहुंच सकता है. ट्रंप पहले भी संयुक्त राष्ट्र पर आरोप लगा चुके हैं कि वह दुनिया के संघर्ष खत्म करने में उनके प्रयासों का समर्थन नहीं करता. दरअसल, जो देश 1 अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान देंगे, उन्हें इस बोर्ड में स्थायी सदस्यता मिलेगी और वही पैसा बोर्ड के कामकाज में इस्तेमाल होगा. लेकिन, जो देश यह रकम नहीं देंगे, वे भी बोर्ड में शामिल हो सकते हैं, लेकिन उनकी सदस्यता सिर्फ तीन साल के लिए होगी.

वहीं कनाडा भी इसमें शामिल होगा, लेकिन वह पैसे नहीं देगा. नॉर्वे के उप-विदेश मंत्री एंड्रियास मोट्सफेल्ड्ट क्राविक ने मंगलवार को नॉर्वे के अखबार आफ्टेनपोस्टेन से कहा कि मौजूदा रूप में पेश की गई इस योजना का नॉर्वे हिस्सा नहीं बनेगा. वहीं, यूनाइटेड किंगडम ने कहा कि वह इस बात को लेकर चिंतित है कि ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का न्योता दिया है.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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